सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: डाकघर के पूर्व अधिकारी को रिश्वत मांगने पर 4 साल की जेल

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सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: डाकघर के पूर्व अधिकारी को रिश्वत मांगने पर 4 साल की जेल

सारांश

सीबीआई ने ओडिशा में एक डाकघर के पूर्व अधिकारी को रिश्वत मांगने के आरोप में दोषी पाया, जिसके लिए उसे चार साल की सजा सुनाई गई। यह मामला कई सालों से चल रहा था और सीबीआई ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा।

मुख्य बातें

सीबीआई की कार्रवाई: डाकघर के पूर्व सहायक अधीक्षक को रिश्वत मांगने पर चार साल की सजा।
जुर्माना: एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम: यह मामला सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को दर्शाता है।
न्यायालय का निर्णय: यह निर्णय समाज में विश्वास को बढ़ाने में सहायक है।
असम में भी कार्रवाई: एक अन्य अधिकारी को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

भुवनेश्वर, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एक विशेष सीबीआई अदालत ने ओडिशा के मयूरभंज जिले के बारीपदा क्षेत्र में स्थित डाकघरों के एक पूर्व सहायक अधीक्षक को 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे चार साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। यह जानकारी शनिवार को एक अधिकारी ने साझा की।

अधिकारी ने बताया कि राधा कृष्ण साहू, जो उस समय बारीपदा के सेंट्रल सब-डिवीजन के इंचार्ज और पोस्ट ऑफिस के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट के पद पर थे, को शुक्रवार को सजा सुनाई गई।

सीबीआई ने 4 फरवरी, 2014 को साहू के खिलाफ मामला दर्ज किया।

आरोप था कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से देबसोल ब्रांच पोस्ट ऑफिस में जीडीएस (ग्रामीण डाक सेवक), एमडी (मेल डिलीवरर/एबीपीएम), और एमसी (मेल कैरियर) के तौर पर उसकी जॉइनिंग के लिए 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।

सीबीआई ने बताया कि आरोपी ने जॉइनिंग में मदद करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए और 3 फरवरी, 2014 को (कुल 2 लाख रुपए की रिश्वत में से) 50,000 रुपए की मांग की।

बयान में कहा गया कि जब शिकायतकर्ता ने 50,000 रुपए देने में असमर्थता जताई, तो आरोपी पैसे को दो किस्तों में लेने के लिए सहमत हो गया; यानी 50,000 रुपए में से 20,000 रुपए 6 फरवरी, 2014 को बालिगंज स्थित अपने किराए के घर पर लेने के लिए सहमत हुआ।

एजेंसी ने बताया कि सीबीआई ने एक जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से 20,000 रुपए की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

जांच के बाद, सीबीआई ने 25 जून, 2014 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और मामला 12 साल तक चला, जिसके बाद संघीय एजेंसी ने दोषी को चार साल की जेल की सजा दिलवाई।

एक अन्य मामले में, सीबीआई ने असम के कामरूप (ग्रामीण) जिले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की गुमी ब्रांच के असिस्टेंट मैनेजर-सह-लोन ऑफिसर अभिषेक सेन गुप्ता को गिरफ्तार किया। शुक्रवार को जारी एक बयान में बताया गया कि उन पर एक शिकायतकर्ता से 16,000 रुपए की रिश्वत मांगने और लेने का आरोप है।

यह मामला 12 मार्च को एक शिकायत के बाद दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी अधिकारी ने उन ग्राहकों के लोन आवेदनों को प्रोसेस करने के लिए 16,000 रुपए का अनुचित लाभ मांगा था, जो अपने घरों की छतों पर सोलर बिजली लगाने के लिए वित्तीय सहायता चाहते थे।

बयान में कहा गया है कि आरोपों की पुष्टि करने के बाद सीबीआई ने एक जाल बिछाया और आरोपी को शिकायतकर्ता से रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डाकघर के पूर्व अधिकारी को किस आरोप में सजा मिली?
उसे 2 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में चार साल की सजा मिली।
सीबीआई ने आरोपी को कब गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने आरोपी को 6 फरवरी, 2014 को रंगे हाथों पकड़ा।
क्या आरोपी को कोई जुर्माना भी हुआ?
हाँ, आरोपी को एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।
इस मामले की जांच कब शुरू हुई?
इस मामले की जांच 4 फरवरी, 2014 को शुरू हुई।
क्या डाकघर के पूर्व अधिकारी के अलावा कोई और आरोपी है?
हाँ, एक अन्य मामले में असम में भी एक अधिकारी को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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