चांद बावड़ी: एक रहस्यमयी स्थल, क्या सच में यहां से गायब हो गई थी पूरी बारात?

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चांद बावड़ी: एक रहस्यमयी स्थल, क्या सच में यहां से गायब हो गई थी पूरी बारात?

सारांश

राजस्थान की चांद बावड़ी न केवल अद्भुत वास्तुकला का उदाहरण है, बल्कि इसकी रहस्यमयी कहानियाँ भी इसे खास बनाती हैं। क्या सच में यहां से एक बारात गायब हो गई थी? जानिए इस दिलचस्प कहानी के बारे में।

मुख्य बातें

चांद बावड़ी की गहराई लगभग १९.५ मीटर है।
यहां एक बारात गायब होने की कहानी प्रसिद्ध है।
बावड़ी का निर्माण ८वीं-९वीं शताब्दी में हुआ था।
स्थल पर १३०० सीढ़ियां हैं जो इसकी जटिलता को दर्शाती हैं।
यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।

दौसा, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान की रेतीली ज़मीन सदैव रहस्यों और कहानियों से भरी रही है, और इनमें से एक अद्भुत स्थल है चांद बावड़ीदौसा जिले के आभानेरी गांव में स्थित यह बावड़ी अपनी अनोखी स्थापत्य कला और रहस्यमय कथाओं के चलते विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करती है। कहा जाता है कि यहां कभी एक पूरी बारात आई थी, जो कभी वापस नहीं लौटी।

चांद बावड़ी का निर्माण ८वीं-९वीं शताब्दी में निकुम्भ वंश के राजा चांद ने कराया था। यह बावड़ी लगभग १९.५ मीटर गहरी है और इसमें कुल १३०० सीढ़ियां हैं। इसकी बनावट इतनी जटिल है कि इसे 'भूल-भुलैया' भी कहा जाता है। इसका प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है और नीचे जाने के लिए तीन अलग-अलग दिशाओं में डबल सीढ़ियां बनाई गई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भी व्यक्ति जिस सीढ़ी से पानी तक जाता है, वह उसी रास्ते से वापस नहीं लौट सकता।

चांद बावड़ी की सबसे भयानक और रहस्यमयी कहानी उस गायब हुई बारात की है। यहां के बुजुर्गों का कहना है कि सदियों पहले एक बारात बावड़ी के अंदर उतरी थी। उस बारात के लोग बावड़ी की गहराई में इस तरह खो गए कि आज तक कोई भी वापस नहीं आया। हालांकि, इतिहासकार इसे केवल कल्पना मानते हैं, लेकिन यह कहानी आज भी पर्यटकों की जिज्ञासा को बढ़ाती है।

चांद बावड़ी की विशिष्टता केवल इसकी गहराई या सीढ़ियों में नहीं है, बल्कि इसके स्तंभों और मंडपों में भी दिखती है। उत्तर दिशा में बने स्तंभों पर बहुमंजिली दीर्घा और महिषासुरमर्दिनी तथा गणेश जी की मूर्तियां इसे और भी आकर्षक बनाती हैं। इसके अलावा, स्थानीय मान्यता है कि चांदनी रात में जब चंद्रमा की रोशनी बावड़ी पर पड़ती है, तो यह पूरी तरह से चमक उठती है, जिससे देखने वाले लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

वर्तमान में, यह ऐतिहासिक धरोहर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित की जा रही है। पर्यटक सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही इस बावड़ी का भ्रमण कर सकते हैं और यहां उतरते हुए रहस्यमय, ऐतिहासिक और वास्तुकला का अनूठा संगम महसूस कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि इसकी रहस्यमयी कहानियाँ भी इसे खास बनाती हैं। जबकि कुछ लोग इसे महज एक लोककथा मानते हैं, यह स्थल आज भी पर्यटकों के लिए एक रोमांचक अनुभव पेश करता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांद बावड़ी क्यों प्रसिद्ध है?
चांद बावड़ी अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और रहस्यमयी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है, विशेषकर गायब हुई बारात की कहानी के लिए।
क्या चांद बावड़ी में कोई बारात गायब हुई थी?
स्थानीय मान्यता है कि सदियों पहले यहां एक बारात आई थी, जो कभी वापस नहीं लौटी, हालांकि इसे केवल एक कहानी माना जाता है।
चांद बावड़ी कब बनी थी?
चांद बावड़ी का निर्माण ८वीं-९वीं शताब्दी में निकुम्भ वंश के राजा चांद ने कराया था।
चांद बावड़ी की गहराई कितनी है?
चांद बावड़ी लगभग १९.५ मीटर गहरी है और इसमें १३०० सीढ़ियां हैं।
क्या पर्यटक चांद बावड़ी का भ्रमण कर सकते हैं?
हां, पर्यटक सूर्योदय से सूर्यास्त तक चांद बावड़ी का भ्रमण कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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