12 जुलाई 2026
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सुगाली प्रीति मामला: जगन मोहन रेड्डी का चंद्रबाबू नायडू पर आरोप — न्याय फिर उपेक्षित

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सुगाली प्रीति मामला: जगन मोहन रेड्डी का चंद्रबाबू नायडू पर आरोप — न्याय फिर उपेक्षित

सारांश

नौ साल बाद भी सुगाली प्रीति के परिवार को न्याय नहीं मिला। जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू सरकार पर मामले की उपेक्षा और पीड़ित परिवार की पेंशन रोकने का आरोप लगाया। CBI ने खुद संसाधनों की कमी स्वीकारी, फिर भी राज्य सरकार चुप है।

मुख्य बातें

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 26 मई 2026 को मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर सुगाली प्रीति मामले की उपेक्षा का आरोप लगाया।
2017 में कुरनूल के एक निजी स्कूल में कक्षा 10 की छात्रा सुगाली प्रीति के साथ बलात्कार और हत्या हुई थी।
जगन सरकार ने SIT गठित की थी और बाद में CBI जांच का आदेश दिया था; परिवार को पाँच सेंट भूखंड , पाँच एकड़ कृषि भूमि और सरकारी नौकरी दी गई थी।
आरोप है कि CBI के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और राज्य सरकार ने सहयोग बंद कर दिया है।
पीड़ित माता-पिता पार्वती और राजू नाइक की पेंशन कथित तौर पर सरकार की आलोचना के कारण रोकी गई।
YSRCP ने न्याय मिलने तक परिवार को पूर्ण कानूनी सहायता देने का वादा किया।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 26 मई 2026 को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप लगाए कि उनकी सरकार कुरनूल की 10वीं कक्षा की छात्रा सुगाली प्रीति के बलात्कार और हत्या मामले को एक बार फिर नज़रअंदाज़ कर रही है। यह मामला 2017 में कुरनूल के एक निजी स्कूल में हुई उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जिसमें एक नाबालिग छात्रा की बेरहमी से हत्या की गई थी। नौ साल बीत जाने के बाद भी पीड़िता के परिवार को न्याय नहीं मिला है।

मामले की पृष्ठभूमि

2017 में कुरनूल के एक निजी स्कूल में कक्षा 10 की छात्रा सुगाली प्रीति के साथ बलात्कार और हत्या की घटना सामने आई थी। आरोप है कि तत्कालीन चंद्रबाबू नायडू सरकार दोषियों की पहचान कर उन्हें दंडित करने में पूरी तरह विफल रही। जगन मोहन रेड्डी के अनुसार, जब उनकी सरकार सत्ता में आई, तब पीड़ित परिवार के अनुरोध पर एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया और बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच का भी आदेश दिया गया।

जगन मोहन रेड्डी के आरोप

रेड्डी ने बताया कि उनकी सरकार ने पीड़ित परिवार को कुरनूल में पाँच सेंट का भूखंड, पाँच एकड़ कृषि भूमि और एक सरकारी नौकरी आवंटित की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू के सत्ता में लौटने के बाद यह मामला फिर से उपेक्षित हो गया। रेड्डी ने कहा, "अब जब CBI खुद दावा कर रही है कि उसके पास जांच को प्रभावी ढंग से जारी रखने के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन नहीं हैं, तो राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पूरा सहयोग दे। इसके बजाय, सरकार ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।"

पेंशन रोके जाने का गंभीर आरोप

जगन मोहन रेड्डी ने एक और गंभीर आरोप लगाया — कि सुगाली प्रीति के माता-पिता की पेंशन केवल इसलिए रोक दी गई क्योंकि वे सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा, "जब इतने पुख्ता सबूत और वैज्ञानिक रिपोर्टें — SIT रिपोर्टें, CDFD प्रयोगशाला रिपोर्टें और DNA प्रोफाइलिंग के विवरण — पहले से ही उपलब्ध हैं, तो राज्य सरकार का मूक दर्शक बने रहना अन्यायपूर्ण नहीं है क्या?" यह बयान उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद दिया।

परिवार की गुहार

सुगाली प्रीति के माता-पिता पार्वती और राजू नाइक ने ताडेपल्ली स्थित YSRCP के केंद्रीय कार्यालय में जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात की और न्याय की अपील की। उन्होंने गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि नौ साल बीत जाने के बाद भी न्याय नहीं मिला है।

आगे क्या होगा

जगन मोहन रेड्डी ने परिवार को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि YSRCP की ओर से न्याय मिलने तक परिवार को पूर्ण कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी। यह मामला आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और अब विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्य है, तो यह सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण होगा। असली सवाल यह है कि DNA प्रोफाइलिंग और SIT रिपोर्टें मौजूद होने के बावजूद नौ साल में मुकदमा तार्किक निष्कर्ष तक क्यों नहीं पहुँचा — यह जवाबदेही दोनों सरकारों को देनी होगी।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुगाली प्रीति मामला क्या है?
यह 2017 में कुरनूल के एक निजी स्कूल में कक्षा 10 की छात्रा सुगाली प्रीति के साथ हुए बलात्कार और हत्या का मामला है। नौ साल बाद भी दोषियों को सज़ा नहीं मिली है और मामले की CBI जांच अधूरी बताई जा रही है।
जगन मोहन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू पर क्या आरोप लगाए?
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू सरकार ने सुगाली प्रीति मामले को फिर से उपेक्षित कर दिया है, CBI को राज्य सहयोग नहीं दे रही और पीड़ित परिवार की पेंशन कथित तौर पर इसलिए रोकी गई क्योंकि वे सरकार की आलोचना कर रहे थे।
जगन सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए थे?
जगन मोहन रेड्डी के अनुसार, उनकी सरकार ने SIT गठित की, CBI जांच का आदेश दिया और परिवार को पाँच सेंट भूखंड , पाँच एकड़ कृषि भूमि और एक सरकारी नौकरी दी। साथ ही SIT रिपोर्टें , CDFD प्रयोगशाला रिपोर्टें और DNA प्रोफाइलिंग भी तैयार की गई।
CBI जांच में क्या समस्या आ रही है?
कथित तौर पर CBI ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसके पास जांच को प्रभावी ढंग से जारी रखने के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन नहीं हैं। ऐसे में राज्य सरकार के सहयोग की ज़रूरत है, जो अभी नहीं मिल रहा।
पीड़ित परिवार की वर्तमान स्थिति क्या है?
सुगाली प्रीति के माता-पिता पार्वती और राजू नाइक ने YSRCP कार्यालय में जगन मोहन रेड्डी से मुलाकात कर न्याय की अपील की। उनका आरोप है कि सरकार की आलोचना के कारण उनकी पेंशन रोक दी गई है और नौ साल बाद भी न्याय नहीं मिला।
राष्ट्र प्रेस
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