चंद्रशेखर आजाद की लखनऊ में हुंकार: ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ; वी.पी. सिंह को भारत रत्न की मांग
सारांश
मुख्य बातें
नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने 7 अगस्त 2026 को लखनऊ के ईको गार्डन में आयोजित 'मंडल चेतना जन आंदोलन' के मंच से देश में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग उठाई। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने, जाति आधारित जनगणना कराने और पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह को मरणोपरांत भारत रत्न देने की माँग भी रखी।
मुख्य घटनाक्रम
लखनऊ के ईको गार्डन में उमड़ी भीड़ के सामने चंद्रशेखर आजाद ने 'बैलेट पेपर लाओ, लोकतंत्र बचाओ, ईवीएम हटाओ' का नारा बुलंद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मंडल आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू नहीं होतीं और पिछड़े वर्गों को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। कार्यकर्ताओं ने मंच से 'ओबीसी समाज की जाति आधारित जनगणना करो, वरना कुर्सी खाली करो' के नारे भी लगाए।
वी.पी. सिंह और सामाजिक न्याय के महापुरुषों को श्रद्धांजलि
चंद्रशेखर ने पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह को सामाजिक न्याय का बड़ा योद्धा बताते हुए केंद्र सरकार से उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न देने की माँग की। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्गों को राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी दिलाने में वी.पी. सिंह की ऐतिहासिक भूमिका अतुलनीय है। अपने संबोधन में उन्होंने कांशीराम और रामविलास पासवान को भी याद किया और कहा कि आज देश में जो संवैधानिक और सामाजिक अधिकार दिखाई देते हैं, वे इन नेताओं के लंबे संघर्ष का परिणाम हैं।
आरक्षण पर आरोप और माँगें
कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी के नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी आदित्य प्रकाश वर्मा ने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्गों के लिए संवैधानिक रूप से निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल रहा। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब जाति आधारित जनगणना का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में तेज़ी से केंद्र में आ रहा है।
पार्टी में नई एंट्री
कार्यक्रम के दौरान बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व विधायक बाल गोविंद राजवंशी ने अपने समर्थकों सहित आजाद समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। चंद्रशेखर ने दावा किया कि भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का मुकाबला करने की हिम्मत किसी भी राजनीतिक दल में नहीं है।
आंदोलन का राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि चंद्रशेखर ने इस कार्यक्रम को चुनावी राजनीति से जोड़कर देखे जाने की कोशिशों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सामाजिक न्याय और महापुरुषों के संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संकल्प दिलाया कि जहाँ-जहाँ उनका पसीना गिरेगा, वहीं सामाजिक बदलाव और क्रांति के नए बीज अंकुरित होंगे। आने वाले समय में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, यह उत्तर प्रदेश की सामाजिक राजनीति के लिए निर्णायक होगा।