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चिनाब नदी डायवर्जन पर कविंदर गुप्ता का समर्थन, पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी नीति की वकालत

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चिनाब नदी डायवर्जन पर कविंदर गुप्ता का समर्थन, पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी नीति की वकालत

सारांश

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने चिनाब नदी का पानी मोड़ने के केंद्र के फैसले को 'बेहतरीन' बताया और पाकिस्तान के खिलाफ नई नीति का समर्थन किया। ₹2,600 करोड़ की जलविद्युत परियोजनाओं की मंजूरी और सीमा पर अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश के बीच यह बयान भारत की सख्त रणनीतिक दिशा का संकेत है।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने चिनाब नदी के पानी को मोड़ने के केंद्र सरकार के फैसले को उचित और जरूरी बताया।
केंद्र सरकार ने चिनाब नदी डायवर्जन के लिए ₹2,600 करोड़ की जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध निर्माण गिराने का आदेश दिया गया है।
राज्यपाल ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का हवाला देते हुए कहा कि अतीत की गलतियाँ दोहराना उचित नहीं होगा।
गुप्ता ने पंजाब और हरियाणा की जल-जरूरतों को स्वीकार करते हुए भारत के अपने राज्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने 28 मई को केंद्र सरकार के चिनाब नदी के पानी को मोड़ने के निर्णय को पूरी तरह उचित ठहराया और कहा कि पाकिस्तान के विरुद्ध कठोर रणनीतिक कदम उठाना अब देश की अनिवार्यता बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला भारत के अपने राज्यों को पर्याप्त जल-आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस पहल है।

राज्यपाल का स्पष्ट समर्थन

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने कहा, "पिछली सरकारों की गलतियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जा सकता। जिस तरह यह मामला सिर्फ पहलगाम तक सीमित नहीं है, उसी तरह पाकिस्तान पहले भी इस तरह के बयान देता रहा है और हमने उसे कड़ा व निर्णायक जवाब दिया है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान भारत की ओर से खाता-पीता है, फिर भी जिस तरह के बयान देता है, वह किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है।

नई नीति और 'ऑपरेशन सिंदूर' का संदर्भ

गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार पाकिस्तान से निपटने के लिए एक नई व्यापक नीति तैयार कर रही है, जिसे सभी नागरिकों का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए अतीत की भूलों को दोहराना देश के हित में नहीं होगा। उन्होंने केंद्र के नए फैसले की सराहना करते हुए कहा, "यह फैसला बहुत ही बेहतरीन है और इससे निस्संदेह हमारे अपने लोगों को फायदा होगा।"

पड़ोसी राज्यों की जल-जरूरतें और केंद्र की प्राथमिकता

पानी के मुद्दे पर राज्यपाल ने पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों की स्वाभाविक जल-आवश्यकताओं को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, "इन राज्यों के बीच पहले से ही समझौते और व्यवस्थाएं मौजूद हैं। भारत के अपने राज्यों को पर्याप्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब चिनाब नदी के जल-बंटवारे पर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से कहीं अधिक गहरा हो चुका है।

चीन के विस्तारवाद पर चिंता

राज्यपाल गुप्ता ने चीन की विस्तारवादी नीतियों पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, "चाहे अरुणाचल प्रदेश हो या कोई अन्य क्षेत्र, चीन लगातार दावे करता रहता है — और भारत भी उसी दृढ़ता से मुंहतोड़ जवाब देता आ रहा है।" गलवान घाटी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ भी चीन ने सीमा पर कार्रवाई की हिमाकत की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने पूरी तैयारी के साथ निर्णायक जवाब दिया।

केंद्र के रणनीतिक फैसले

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के विरुद्ध कड़े रणनीतिक कदम उठाते हुए भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, चिनाब नदी के पानी को मोड़ने के लिए ₹2,600 करोड़ की जलविद्युत परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। राज्यपाल गुप्ता ने इन सभी निर्णयों का समर्थन करते हुए विश्वास जताया कि नई नीतियाँ भारत को और सशक्त बनाएंगी तथा किसी भी पड़ोसी की नापाक हरकत का करारा जवाब देने में सक्षम होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश है — सिंधु जल संधि, जो दशकों से पाकिस्तान के पक्ष में झुकी मानी जाती रही है, उस पर भारत की पुनर्विचार की इच्छाशक्ति अब कार्रवाई में बदल रही है। ₹2,600 करोड़ की परियोजनाओं की मंजूरी और सीमा पर अवैध निर्माण ध्वस्त करने के आदेश एक साथ आना संयोग नहीं है। असली सवाल यह है कि इन परियोजनाओं की समयसीमा और क्रियान्वयन कितना पारदर्शी होगा — क्योंकि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा की जल-जरूरतें भी इसी समीकरण का हिस्सा हैं, और उनकी अनदेखी एक नई घरेलू जटिलता खड़ी कर सकती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिनाब नदी के पानी को मोड़ने का केंद्र सरकार का फैसला क्या है?
केंद्र सरकार ने चिनाब नदी के पानी को भारत के अपने राज्यों की ओर मोड़ने के लिए ₹2,600 करोड़ की जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए व्यापक रणनीतिक कदमों का हिस्सा है।
कविंदर गुप्ता ने इस फैसले पर क्या कहा?
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इस फैसले को 'बेहतरीन' बताया और कहा कि इससे भारत के अपने नागरिकों को निश्चित रूप से लाभ होगा। उन्होंने पाकिस्तान के रवैये की आलोचना करते हुए केंद्र की नई नीति का पूरा समर्थन किया।
'ऑपरेशन सिंदूर' का इस संदर्भ में क्या महत्व है?
राज्यपाल गुप्ता ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद पाकिस्तान के रुख को देखते हुए अतीत की गलतियाँ दोहराना उचित नहीं होगा। यह संदर्भ इस बात का संकेत है कि मौजूदा नीतिगत बदलाव उस घटनाक्रम के बाद की रणनीतिक समीक्षा का परिणाम है।
क्या इस फैसले से पंजाब और हरियाणा प्रभावित होंगे?
राज्यपाल गुप्ता ने स्वयं माना कि पंजाब और हरियाणा को पानी की स्वाभाविक जरूरत है और इन राज्यों के बीच पहले से समझौते मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत के अपने राज्यों को पर्याप्त जल-आपूर्ति सुनिश्चित करना केंद्र की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सीमा पर अवैध निर्माण गिराने का आदेश क्या है?
केंद्र सरकार ने भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। यह कदम चिनाब नदी डायवर्जन परियोजना के साथ-साथ पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए व्यापक रणनीतिक उपायों का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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