चीन की शानशी कोयला खदान में गैस विस्फोट: 90 लोग फँसे, PM मोदी ने शी जिनपिंग को दी संवेदना
सारांश
मुख्य बातें
चीन के उत्तरी शानशी प्रांत की लिउशेन्यू कोयला खदान में शुक्रवार रात 9 बजकर 43 मिनट (स्थानीय समय) हुए भीषण गैस विस्फोट में 247 मजदूर जमीन के नीचे फँस गए। शनिवार तड़के 3 बजकर 33 मिनट तक 157 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका था, जबकि 90 लोग अभी भी भूमिगत थे — जिनमें से 16 की हालत गंभीर बताई गई और 4 की मौत की पुष्टि हो चुकी थी। यह हादसा चांगजी के किनयुआन काउंटी में हुआ।
हादसे का घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट के समय खदान में 247 मजदूर काम कर रहे थे। बचाव दल ने रात भर अभियान जारी रखा और शनिवार सुबह तक 157 श्रमिकों को बाहर निकाला। हालाँकि, 90 मजदूर अभी भी भूमिगत थे, जिनमें से कुछ की हालत नाज़ुक बताई गई। बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
शी जिनपिंग के निर्देश
चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की केंद्रीय समिति के महासचिव शी जिनपिंग ने हादसे के तुरंत बाद आपातकालीन निर्देश जारी किए। उन्होंने लापता श्रमिकों को बचाने, घायलों का समुचित उपचार करने और हादसे के कारणों की पूरी जाँच कर कानूनी जवाबदेही तय करने का आदेश दिया। शी ने देशभर के अधिकारियों से इस घटना से सबक लेने और कार्यस्थल सुरक्षा को और मज़बूत करने की अपील की।
PM मोदी की संवेदना
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए लिखा, 'भारत की जनता की ओर से मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीन की जनता के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ। ईश्वर शोक संतप्त परिवारों को इस दुख की घड़ी में शक्ति प्रदान करें। हम प्रार्थना करते हैं कि सभी लापता व्यक्तियों की शीघ्र और सुरक्षित वापसी हो।' यह संदेश भारत-चीन के बीच हाल के कूटनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बाढ़ के बीच आपदा प्रबंधन की चुनौती
गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब चीन में बाढ़ का मौसम शुरू हो चुका है। राष्ट्रपति शी ने इमरजेंसी तैयारियों को मज़बूत करने और बाढ़ नियंत्रण व आपदा राहत के ठोस उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। चीन में खनन दुर्घटनाएँ एक पुरानी समस्या रही हैं — आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा मानकों के कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण ऐसे हादसे बार-बार होते हैं।
आगे क्या
बचाव अभियान अभी जारी है और अधिकारियों के अनुसार लापता सभी लोगों को खोजने की कोशिशें युद्धस्तर पर चल रही हैं। हादसे की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।