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भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में बाधा बन रहीं समस्याएं, सीआईआई ने सुझाव दिए

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भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में बाधा बन रहीं समस्याएं, सीआईआई ने सुझाव दिए

सारांश

सीआईआई ने भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है। नई रिपोर्ट में भूमि की उपलब्धता को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

मुख्य बातें

सीआईआई ने औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक बनाने का सुझाव दिया गया है।
डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम की सिफारिश की गई है।
भूमि के स्वामित्व की अस्पष्टता और प्रक्रियाओं का बिखराव समस्याएं हैं।
सुधारों से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।

नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की गति को बढ़ाने के लिए उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने औद्योगिक भूमि प्रबंधन में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया है। सीआईआई ने अपनी रिपोर्ट 'सीआईआई भूमि मिशन: भारत में औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार हेतु एक रूपरेखा' पेश करते हुए कहा कि अगर भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलना है, तो औद्योगिक जमीन की उपलब्धता को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना अत्यंत आवश्यक है।

यह रिपोर्ट सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष टीवी नरेंद्रन के नेतृत्व में तैयार की गई है। इसमें विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ गहन संवाद किया गया, जिससे जमीनी स्तर की समस्याएं और उनके व्यावहारिक समाधान सामने आ सकें।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि औद्योगिक जमीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों की बुनियादी आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में कई गंभीर समस्याएं हैं, जैसे प्रक्रियाओं का बिखराव, नियमों की जटिलता, जमीन के स्वामित्व (टाइटल) की अस्पष्टता, कब्जा मिलने में देरी और आवंटित भूमि का सही उपयोग न होना। इन समस्याओं के कारण परियोजनाओं की लागत में वृद्धि होती है, समय की अधिक आवश्यकता होती है, और निवेशकों, विशेषकर एमएसएमई और नई परियोजनाओं के लिए विश्वास कमजोर होता है।

रिपोर्ट में भूमि से जुड़े पूरे लाइफसाइकिल का विश्लेषण किया गया है। इसमें भूमि की पहचान से लेकर आवेदन, आवंटन, भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू), सत्यापन, अधिग्रहण, कब्जा, उपयोग और संस्थागत क्षमता तक की प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसमें यह भी सामने आया कि दस्तावेजों का मानकीकरण नहीं है, कई विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, समय सीमा तय नहीं है और भूमि रिकॉर्ड अधूरे हैं।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "मेक इन इंडिया, नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, नवीकरणीय ऊर्जा और आधुनिक लॉजिस्टिक्स जैसे बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए औद्योगिक जमीन का पूरी तरह तैयार, पारदर्शी और निवेश के अनुकूल होना आवश्यक है।"

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुझाव है कि 'राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक' बनाया जाए, जो जीआईएस तकनीक से जुड़ा हो और जिसमें भूमि की उपलब्धता, जोनिंग, सुविधाएं, पर्यावरणीय स्थिति और स्वामित्व की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध हो। इससे निवेशक तेजी से और सही निर्णय ले सकेंगे।

साथ ही, एक डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम बनाने की सिफारिश की गई है, जिससे सभी मंजूरियां एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकें। इसमें तय समयसीमा (एसएलए), रियल टाइम ट्रैकिंग और डिम्ड अप्रूवल जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं। हर आवेदन के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी (केस ओनर) निर्धारित करने की भी बात कही गई है।

टीवी नरेंद्रन ने कहा, "समस्या केवल भूमि हासिल करने की नहीं है, बल्कि उसे तैयार करने और उपयोग में लाने की भी है। कई परियोजनाएं आवंटन के बाद भी अटक जाती हैं।" रिपोर्ट में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में राज्यों के बीच बड़े अंतर को भी चिंता का विषय बताया गया है और इसे समान करने की सिफारिश की गई है।

कानूनी विवादों को कम करने के लिए भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, जीआईएस मैपिंग और टाइटल इंश्योरेंस लागू करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज करने के लिए एसआईए टेम्पलेट, जिला स्तर पर विशेष सेल और भूमि पूलिंग मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

संस्थागत स्तर पर, सीआईआई ने नेशनल इंडस्ट्रियल लैंड काउंसिल (एनआईएलसी) बनाने का सुझाव दिया है, जो जीएसटी काउंसिल की तरह कार्य करे और राज्यों के बीच समन्वय बनाए।

सीआईआई का विश्वास है कि यदि इन सुधारों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो परियोजनाएं तेजी से पूरी होंगी, लागत घटेगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने में सहायता मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि भारत औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार करे। यदि हमें वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनना है, तो हमें निवेशकों का विश्वास जीतना होगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईआई की रिपोर्ट में क्या सुझाव दिए गए हैं?
सीआईआई ने औद्योगिक भूमि प्रबंधन में सुधार के लिए राष्ट्रीय औद्योगिक भूमि बैंक और डिजिटल सिंगल विंडो सिस्टम बनाने का सुझाव दिया है।
भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए क्या आवश्यक है?
औद्योगिक जमीन की उपलब्धता को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना आवश्यक है।
क्या समस्याएं वर्तमान औद्योगिक भूमि प्रबंधन में हैं?
भूमि के स्वामित्व की अस्पष्टता, प्रक्रियाओं का बिखराव, और कब्जे में देरी जैसी समस्याएं हैं।
सीआईआई के महानिदेशक ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया और अन्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए औद्योगिक जमीन का पारदर्शी होना आवश्यक है।
भूमि सुधारों का क्या लाभ होगा?
यदि सुधार सही से लागू किए जाएं, तो परियोजनाएं तेजी से पूरी होंगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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