सुदिव्य कुमार सोनू के द्वादशकर्म में भावुक हुए CM हेमंत सोरेन, बोले- झारखंड को अपूरणीय क्षति
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को गिरिडीह पहुँचे और दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के द्वादशकर्म कार्यक्रम में शामिल हुए। हरसिंहरायडीह स्थित उत्सव उपवन में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में सोरेन ने दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री का भावुक संबोधन
श्रद्धांजलि सभा में हेमंत सोरेन स्पष्ट रूप से भावुक नज़र आए। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और समूचे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता को महज़ एक सहयोगी नहीं, बल्कि बड़े भाई और मार्गदर्शक के समान बताया।
सोरेन ने कहा कि राज्य के अधिकारों एवं 'झारखंडियत' की लड़ाई में सुदिव्य सोनू का योगदान और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके इन शब्दों ने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।
कल्पना सोरेन और मंत्रियों की उपस्थिति
गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी दिवंगत नेता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार से भेंट की। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू का असमय निधन झामुमो परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी गहरी पीड़ा है। कल्पना सोरेन ने कहा कि 'सोनू भैया' का स्नेह और अपनापन हमेशा उनकी स्मृतियों में जीवित रहेगा।
कार्यक्रम में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, दीपक बिरुआ, इरफान अंसारी और हफीजुल हसन सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, जनप्रतिनिधि और पार्टी नेता उपस्थित रहे।
सुदिव्य सोनू का निधन और शोक की लहर
गौरतलब है कि झामुमो के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर को आकस्मिक निधन हो गया था। उनके जाने के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई थी। वे गिरिडीह से विधायक एवं राज्य सरकार में मंत्री थे, और झामुमो की राजनीति में उनकी केंद्रीय भूमिका थी।
कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब
श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में आम लोग, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतज़ाम किए थे। कार्यक्रम स्थल पर समुचित व्यवस्था की गई थी।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झारखंड की राजनीति में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं होगा — यह भाव इस कार्यक्रम में हर तरफ महसूस किया गया।