सेवा पखवाड़ा 2025: CM धामी ने ऋषिकेश से किया शुभारंभ, 5 साल की जनसेवा को समर्पित अभियान
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2025 को ऋषिकेश से 'सेवा, सुशासन एवं समर्पण – जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' अभियान, जिसे सेवा पखवाड़ा नाम दिया गया है, के द्वितीय चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। उत्तराखंड सरकार का यह अभियान धामी के मुख्यमंत्री पद पर 5 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आरंभ किया गया है, जिसका मूल उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।
अभियान का उद्देश्य और संरचना
सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत प्रदेशभर में बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में स्वास्थ्य, आयुष्मान कार्ड, पेंशन, राजस्व, समाज कल्याण, कृषि और स्वरोजगार सहित विभिन्न विभागों की सेवाएँ एक ही स्थान पर नागरिकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। यह 'सिंगल-विंडो' दृष्टिकोण ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों के निवासियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है।
किन्हें मिलेगा विशेष लाभ
अभियान में दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, किसानों, युवाओं और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। शिविरों में जनसमस्याओं का मौके पर पंजीकरण, त्वरित निस्तारण और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहेंगे।
जनभागीदारी और सामाजिक कार्यक्रम
सेवा पखवाड़ा केवल प्रशासनिक शिविरों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान, पौधरोपण, स्वच्छता अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम भी इसका हिस्सा हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशासनिक और राजनीतिक सहभागिता
प्रदेश के सभी जनपदों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता से यह अभियान संचालित किया जाएगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में शुरू हुआ है जब उत्तराखंड में आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारियाँ भी चल रही हैं। सरकार का तर्क है कि यह अभियान शासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास है।
आगे की राह
सेवा पखवाड़ा के द्वितीय चरण के तहत आने वाले पखवाड़े में प्रदेशभर में शिविर आयोजित होंगे। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम छोर तक पहुँचता है या यह अभियान केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह जाता है।