CM विजय ने चेन्नई में ₹2.23 करोड़ की आविन सेंट्रल लैबोरेटरी बिल्डिंग का उद्घाटन किया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को चेन्नई के माधवरम डेयरी कॉम्प्लेक्स में आविन की सेंट्रल लैबोरेटरी के लिए नवनिर्मित अतिरिक्त भवन का उद्घाटन किया। ₹2.23 करोड़ की लागत से बनाए गए इस भवन का उद्देश्य राज्य की सरकारी डेयरी की गुणवत्ता-परीक्षण क्षमता को मज़बूत करना है।
उद्घाटन और निरीक्षण
मुख्यमंत्री विजय ने लैबोरेटरी भवन के उद्घाटन के साथ-साथ आविन सेंट्रल डेयरी के समग्र परिचालन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने दूध की खरीद, प्रोसेसिंग और वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। साथ ही, कॉम्प्लेक्स के भीतर निर्माणाधीन नई डेयरी सुविधा के प्रगति-कार्य का भी जायज़ा लिया।
माधवरम डेयरी की उत्पादन क्षमता
जानकारी के अनुसार, माधवरम सुविधा में प्रतिदिन 4 लाख से 4.5 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। यहाँ से पैकेट दूध को 45 से अधिक वितरण मार्गों के ज़रिए ट्रकों द्वारा चेन्नई के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता है। डेयरी में 3 लाख से 3.6 लाख लीटर दूध को दैनिक आधार पर प्रोसेस और विपणन किया जाता है। यहाँ दूध को ठंडा रखने की आधुनिक सुविधा के अलावा 80 मीट्रिक टन दूध पाउडर संग्रहीत करने की क्षमता वाले स्टोरेज रूम भी हैं।
आपूर्ति की कमी की शिकायतें
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब उपभोक्ताओं की ओर से आविन दूध की सीमित उपलब्धता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। बताया जा रहा है कि खुदरा दुकानों पर स्टॉक शीघ्र समाप्त हो जाता है, जिससे कुछ उपभोक्ताओं को महंगे निजी ब्रांड का दूध खरीदने पर विवश होना पड़ रहा है। इस अनिश्चितता से विशेष रूप से वे परिवार प्रभावित हुए हैं जो नियमित रूप से आविन के किफ़ायती दूध पर निर्भर हैं।
अधिकारियों संग चर्चा
सीएम विजय ने निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चेन्नई के विभिन्न क्षेत्रों में पैकेट दूध की आपूर्ति व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। गौरतलब है कि इतने व्यापक वितरण नेटवर्क के बावजूद मोहल्ले की दुकानों पर कमी की समस्या बनी हुई है, जो डेयरी की 'लास्ट-माइल' आपूर्ति शृंखला की सीमाओं को उजागर करती है।
आगे का रास्ता
नई लैबोरेटरी बिल्डिंग से आविन के दूध की गुणवत्ता-परीक्षण तंत्र में सुधार की उम्मीद है। निर्माणाधीन नई डेयरी सुविधा के पूरा होने पर माधवरम कॉम्प्लेक्स की उत्पादन और वितरण क्षमता में और विस्तार संभव होगा, जिससे आपूर्ति की कमी की समस्या को दूर करने में मदद मिल सकती है।