तमिलनाडु: आविन नेटवर्क में 22,500 दुधारू गायें जोड़ेगी सरकार, 10,000 गायें ग्रामीणों को मुफ्त
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सहकारी डेयरी नेटवर्क में 22,500 अतिरिक्त दुधारू गायें जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करना और सहकारी डेयरी ब्रांड आविन की दूध खरीद में आई गिरावट को पलटना है। वर्ष 2026-27 में 10,000 दुधारू गायें पात्र ग्रामीण लाभार्थियों को निःशुल्क वितरित की जाएंगी।
योजना की संरचना और लक्ष्य
कुल 22,500 गायों में से 10,000 गायें सीधे ग्रामीण लाभार्थियों को मुफ्त दी जाएंगी, जबकि शेष 12,500 गायें मध्यम और मिनी डेयरी योजनाओं के माध्यम से खरीदी जाएंगी। सरकार को अनुमान है कि इन उपायों से आविन की दैनिक दूध खरीद में कम से कम 1.5 लाख लीटर की वृद्धि होगी।
योजना के तहत सभी लाभार्थियों को गाँव स्तर की प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे सीधे आविन को दूध की आपूर्ति कर सकें। इसके अतिरिक्त उन्हें पशु चारा सब्सिडी और अन्य सरकारी सहायता भी प्रदान की जाएगी।
मध्यम और मिनी डेयरी इकाइयों का विस्तार
प्रस्तावित 12,500 गायों में से 2,500 गायें नई 500 मध्यम आकार की डेयरी इकाइयों के लिए आवंटित होंगी — प्रत्येक इकाई में पाँच गायें। शेष 10,000 गायें मौजूदा मिनी डेयरी कार्यक्रम के अंतर्गत 5,000 इकाइयों को मिलेंगी, जिनमें प्रत्येक को दो-दो गायें दी जाएंगी।
मीडियम डेयरी योजना में लाभार्थी पहले तीन गायें खरीदेंगे और छह महीने तक उनकी देखभाल करेंगे। इसके बाद वे दो और गायें खरीदने के लिए आर्थिक सहायता पाने के पात्र होंगे। इस योजना के तहत सरकार ने परियोजना लागत का 25 प्रतिशत पूँजी सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा है और शेष राशि के लिए रियायती संस्थागत ऋण की व्यवस्था की जाएगी।
ऋण सुविधा डेयरी विकास विभाग और तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग आर्थिक विकास निगम के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। मिनी-डेयरी स्कीम के तहत दो गायें खरीदने वाले लाभार्थियों को 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
आविन की गिरती खरीद: संकट की पृष्ठभूमि
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब आविन की औसत दैनिक दूध खरीद एक वर्ष पूर्व के लगभग 35 लाख लीटर से घटकर करीब 31.5 लाख लीटर रह गई है — यानी लगभग 3.5 लाख लीटर की गिरावट। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि बेहतर खरीद मूल्य मिलने के चलते कई डेयरी किसान निजी डेयरियों की ओर रुख कर चुके हैं।
इसके अलावा आविन को खरीदे जा रहे दूध में औसत फैट और सॉलिड्स-नॉट-फैट (SNF) की मात्रा में गिरावट जैसी गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि 2025-26 के दौरान मिनी-डेयरी कार्यक्रम के अंतर्गत 1,625 किसानों को 3,363 गायें खरीदने में सहायता मिली, हालाँकि ऋण स्वीकृति, मंजूरी और मूल्य निर्धारण में देरी के कारण क्रियान्वयन लक्ष्य से पीछे रहा।
नस्ल दिशानिर्देश और पशु आहार सब्सिडी
सरकार जल्द ही जर्सी क्रॉस-ब्रेड और होल्स्टीन फ्रिसियन जैसी मान्यता प्राप्त नस्लों के मवेशी खरीदने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की तैयारी में है। इसके साथ ही गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के पात्र दूध उत्पादकों को सब्सिडी वाला पशु आहार उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है।
यह आहार ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से दिया जाएगा और प्रत्येक पशु के लिए 300 दिनों तक प्रतिदिन 3 किलोग्राम आहार मिलेगा। यह कदम छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों की उत्पादन लागत को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आगे की राह
राज्य सरकार की यह बहुआयामी डेयरी विस्तार योजना ग्रामीण आय बढ़ाने और आविन की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास है। क्रियान्वयन की गति और ऋण वितरण में पारदर्शिता इस योजना की सफलता की कुंजी होगी, विशेष रूप से पिछले वर्ष की देरी को देखते हुए।