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चेन्नई में 'आविन' दूध की बिक्री 6 महीनों में 15% घटी, हरे पैकेट की कमी से आमजन परेशान

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चेन्नई में 'आविन' दूध की बिक्री 6 महीनों में 15% घटी, हरे पैकेट की कमी से आमजन परेशान

सारांश

चेन्नई में 'आविन' दूध की बिक्री छह महीनों में 15% तक गिरी — हरे पैकेट की कमी से आम परिवार महँगे निजी ब्रांड खरीदने पर मजबूर हैं। ₹22 का सरकारी पैकेट ₹24 में बिक रहा है। कोयंबटूर, मदुरै सहित कई ज़िलों में भी यही हाल है।

मुख्य बातें

आविन दूध की चेन्नई में बिक्री पिछले छह महीनों में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरी।
शहर में रोज़ाना की बिक्री पहले लगभग 16.5 लाख लीटर थी, जो अब माँग के अनुरूप नहीं।
अगस्त 2026 के बाद से हरे पैकेट की कमी और गंभीर हुई।
सरकारी मूल्य ₹22 प्रति आधा लीटर के बावजूद कई दुकानों पर ₹24 में बिक्री के आरोप।
कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, सलेम और इरोड में भी आपूर्ति की कमी।
एजेंटों ने तमिलनाडु सरकार से खरीद बढ़ाने और नियमित रिटेल जाँच की माँग की।

तमिलनाडु की सरकारी डेयरी सहकारी संस्था 'आविन' के दूध की चेन्नई में बिक्री पिछले छह महीनों में 10 से 15 प्रतिशत तक गिर गई है, और इसकी मुख्य वजह लोकप्रिय हरे पैकेट की लगातार आपूर्ति में कमी है। दूध एजेंटों के अनुसार, यह कमी अगस्त 2026 के बाद और गंभीर हो गई है, जिससे हज़ारों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़रूरतें प्रभावित हो रही हैं।

क्या है हरे पैकेट का महत्व

'आविन' अपना दूध फैट और बनावट के आधार पर नारंगी, हरे और नीले पैकेट में बेचती है। इनमें हरे पैकेट को चेन्नई के घरों में सबसे अधिक पसंद किया जाता है। कुछ समय पहले तक शहर में 'आविन' दूध की रोज़ाना बिक्री लगभग 16.5 लाख लीटर थी, जो अब मांग के अनुरूप नहीं रह पा रही।

ग्राहकों का कहना है कि 'आविन' आउटलेट और आसपास की दुकानों पर हरे पैकेट अक्सर सुबह-सुबह ही खत्म हो जाते हैं। देर से पहुँचने वाले ग्राहकों को या तो कई आउटलेट्स पर भटकना पड़ता है या फिर महँगे निजी डेयरी ब्रांड खरीदने पर मजबूर होना पड़ता है।

आपूर्ति की समस्या और एजेंटों की चेतावनी

दूध एजेंटों ने इस संकट के लिए आविन प्रबंधन द्वारा अपर्याप्त खरीद को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्राहकों की लगातार बढ़ती माँग के बावजूद दूध की खरीद की मात्रा नहीं बढ़ाई गई। कई 'आविन' आउटलेट्स पर सप्लाई किए जाने वाले क्रेट्स की संख्या भी घटा दी गई है।

एजेंटों ने चेतावनी दी है कि यदि चेन्नई और अन्य प्रभावित ज़िलों में दूध की खरीद और वितरण को तत्काल नहीं सुधारा गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

राज्यभर में फैली समस्या

यह आपूर्ति संकट केवल चेन्नई तक सीमित नहीं है। कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, सलेम और इरोड जिलों से भी ऐसी ही कमी की खबरें सामने आई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में दूध की माँग मौसमी कारणों से आमतौर पर अधिक रहती है।

आम जनता पर असर और मूल्यवृद्धि के आरोप

ग्राहकों का आरोप है कि हरे 'आविन' पैकेट की सरकारी कीमत आधे लीटर के लिए ₹22 है, लेकिन कई दुकानों पर यह ₹24 में बेचा जा रहा है — यानी प्रति पैकेट ₹2 की अतिरिक्त वसूली। गौरतलब है कि कुछ छोटी किराना दुकानों पर कृत्रिम कमी पैदा कर अधिक दाम वसूलने के आरोप भी लग रहे हैं।

जो परिवार नियमित रूप से 'आविन' दूध पर निर्भर हैं, उनका कहना है कि इस कमी से मासिक घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है क्योंकि उनके पास महँगे निजी ब्रांड की ओर रुख करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

ग्राहकों की माँगें और आगे की राह

ग्राहकों और एजेंटों ने तमिलनाडु सरकार और आविन प्रबंधन से माँग की है कि दूध की खरीद एवं वितरण को पहले के स्तर पर लाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि दूध के पैकेट तय सरकारी मूल्य पर ही बिकें। साथ ही, ज़्यादा दाम वसूलने और कृत्रिम कमी रोकने के लिए खुदरा आउटलेट्स की नियमित जाँच की भी माँग की गई है। यदि आपूर्ति शृंखला में शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट अन्य ज़िलों में भी और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो निजी डेयरी कंपनियाँ उस खाली जगह को महँगे दामों में भरती हैं। इससे सबसे अधिक नुकसान निम्न और मध्यम आय वर्ग को होता है जो सरकारी दाम पर निर्भर हैं। राज्य सरकार को चाहिए कि वह खरीद-वितरण में पारदर्शिता लाए और मूल्यनियंत्रण उल्लंघनों पर ठोस कार्रवाई करे — अन्यथा 'आविन' जैसी सहकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता दाँव पर लगती रहेगी।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई में 'आविन' दूध की बिक्री क्यों घट रही है?
दूध एजेंटों के अनुसार, 'आविन' के लोकप्रिय हरे पैकेट की आपूर्ति माँग के अनुरूप नहीं हो पा रही, जिसके कारण पिछले छह महीनों में बिक्री 10 से 15 प्रतिशत तक गिर गई है। एजेंट इसके लिए आविन प्रबंधन द्वारा अपर्याप्त दूध खरीद को जिम्मेदार मानते हैं।
'आविन' के हरे पैकेट की कीमत क्या है और क्या यह तय दाम पर मिल रहा है?
हरे पैकेट की सरकारी कीमत आधे लीटर के लिए ₹22 है। हालांकि, ग्राहकों के अनुसार कई दुकानों पर यह ₹24 में बेचा जा रहा है, जो कि प्रति पैकेट ₹2 की अतिरिक्त वसूली है।
क्या यह समस्या सिर्फ चेन्नई तक सीमित है?
नहीं, कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, सलेम और इरोड जिलों में भी 'आविन' दूध की आपूर्ति में कमी की खबरें हैं। कई आउटलेट्स पर क्रेट्स की संख्या भी घटाई गई है।
ग्राहकों और एजेंटों ने क्या माँगें रखी हैं?
ग्राहकों और एजेंटों ने तमिलनाडु सरकार और आविन प्रबंधन से माँग की है कि दूध की खरीद और आपूर्ति को पहले के स्तर पर लाया जाए, सरकारी मूल्य पर बिक्री सुनिश्चित की जाए और कृत्रिम कमी रोकने के लिए रिटेल आउटलेट्स की नियमित जाँच की जाए।
इस कमी का आम परिवारों पर क्या असर पड़ रहा है?
'आविन' दूध पर निर्भर परिवारों को महँगे निजी डेयरी ब्रांड खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनका मासिक घरेलू खर्च बढ़ गया है। जो ग्राहक देर से आउटलेट पहुँचते हैं उन्हें अक्सर दूध नहीं मिलता और कई दुकानों पर भटकना पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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