यूपी में 10 एक्सप्रेस-वे, 12 हवाई अड्डे और 7 शहरों में मेट्रो: सीएम योगी ने गिनाई डबल इंजन सरकार की उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 29 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने 'स्पीड, स्केल और कनेक्टिविटी' के मंत्र से उत्तर प्रदेश की बुनियादी ढाँचागत तस्वीर को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे, हवाई अड्डों और मेट्रो विस्तार ने राज्य को 'नए भारत के नए उत्तर प्रदेश' की पहचान दी है।
मुख्य आँकड़े और दावे
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल डेढ़ एक्सप्रेस-वे थे, जबकि आज 10 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पहले हवाई सेवाएँ गिने-चुने शहरों तक सीमित थीं, और अब राज्य में 12 घरेलू और 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे काम कर रहे हैं।
मेट्रो सेवाओं पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश के किसी भी शहर में मेट्रो नहीं चलती थी, जबकि आज 7 शहरों में मेट्रो जनजीवन को गति दे रही है। उनकी पोस्ट में कहा गया, 'सड़क, रेल और हवाई संपर्क केवल दूरियाँ नहीं घटाते, ये सुविधा, समय की बचत और समृद्धि की नई संभावनाएँ लेकर आते हैं।'
विकास के व्यापक प्रभाव
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस बुनियादी ढाँचागत विकास से किसानों की उपज को बड़े बाज़ार तक पहुँच मिल रही है और उद्यमिता के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के लिए शिक्षा और रोज़गार तक पहुँच आसान हुई है, कामकाजी लोगों का समय बच रहा है और पर्यटन के विस्तार से स्थानीय परिवारों की आजीविका को नई शक्ति मिल रही है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में है और राज्य सरकार लगातार बुनियादी ढाँचे की उपलब्धियों को अपनी राजनीतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत करती रही है। यह Nवीं ऐसी घोषणा है जिसमें 2017 से पहले के काल को विकास-शून्य बताते हुए वर्तमान सरकार के कार्यकाल को मील का पत्थर कहा गया है।
सरकार का विज़न
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि 'विकास की यह गति आज गाँव से कस्बे और कस्बे से शहर तक नागरिकों के जीवन को बदल रही है।' उन्होंने 'हर क्षेत्र को अवसर, हर उद्यम को सामर्थ्य और हर परिवार के जीवन में बढ़ती खुशहाली' को 'नए उत्तर प्रदेश' की पहचान बताया।
राजनीतिक संदर्भ
आलोचकों का कहना है कि इन आँकड़ों की स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है और विपक्षी दलों ने बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता तथा रोज़गार सृजन पर प्रश्न उठाए हैं। हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) इन आँकड़ों को उत्तर प्रदेश में शासन परिवर्तन के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करती आई है। राज्य में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, और ऐसे बयान चुनावी जमीन तैयार करने की दृष्टि से भी अहम माने जा रहे हैं।