चक्रवात और समुद्री आपात के लिए भारतीय तटरक्षक बल हाई अलर्ट पर, पश्चिम एशिया तनाव के बीच बहते मलबे पर कड़ी निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल ने मानसून सत्र और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में समुद्री सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। 22 जून 2026 को जारी दिशानिर्देशों में तटरक्षक इकाइयों को चक्रवात राहत, बहते जहाजों की निगरानी और मछुआरों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। तटरक्षक बल इस मौसम में फर्स्ट रिस्पॉन्डर एजेंसी की भूमिका में तैनात है।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय तटरक्षक के प्रवक्ता कमांडेंट अमित उनियाल ने बताया कि पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति ने समुद्री घटनाओं की संभावना को और बढ़ा दिया है। इससे बिना निगरानी वाले जहाजों या नावों के भारतीय समुद्री क्षेत्र की ओर बहकर आने का जोखिम काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे खतरों से निपटने के लिए निरंतर निगरानी और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है।
समुद्री मलबे में खाली छोड़े गए जहाज, नावें, दुर्घटनाग्रस्त जहाजों से गिरे कंटेनर और डूबे हुए जहाजों के अवशेष शामिल हैं, जो तटीय क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
निगरानी और तैयारी के निर्देश
जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, एकीकृत समुद्री, वायु और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है। तटरेखा पर जहाजों के फँसने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए बहते जहाजों या वस्तुओं की तत्काल रिपोर्टिंग, ट्रैकिंग और जोखिम आकलन अनिवार्य किया गया है।
इसके साथ ही नवरिया वॉर्निंग और संबंधित नाविक सूचनाओं (एनटीएम) की लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भारतीय समुद्री क्षेत्र को प्रभावित करने वाली किसी भी घटना की समय रहते पहचान हो सके। समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने को भी कहा गया है।
मछुआरा समुदाय की अहम भूमिका
कमांडेंट उनियाल ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि समुद्र में कोस्ट गार्ड की 'आंख और कान' कहे जाने वाले मछुआरा समुदाय से मिली जानकारियों को प्राथमिकता दी जाए। मछुआरे बहते जहाजों या अज्ञात वस्तुओं की प्रारंभिक सूचना देने में सबसे प्रभावी होते हैं, और यह सूचना तंत्र तटरक्षक की त्वरित प्रतिक्रिया का आधार बनता है।
चक्रवात राहत की तैयारी
किसी भी चक्रवात की स्थिति या उसके बाद राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी तटरक्षक स्टेशन सक्रिय कर दिए गए हैं। तटरक्षक बल मुख्यालय ने सभी ऑफशोर पेट्रोलिंग वेसल्स को सर्च एंड रेस्क्यू, फायर फाइटिंग, प्रदूषण प्रतिक्रिया और नाविकों-मछुआरों की सहायता के लिए तत्पर रहने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग की मौसम सूचनाओं की निरंतर निगरानी के साथ-साथ जेमिनी बोट, लाइफबोट, लाइफबॉय और लाइफजैकेट जैसे जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की सक्रियता के साथ चक्रवाती तूफानों का मौसम अपने चरम पर होता है।
आगे की राह
गौरतलब है कि हर वर्ष मानसून के दौरान भारतीय तटरक्षक बल इसी तरह की व्यापक तैयारियाँ करता है, लेकिन इस बार पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण समुद्री खतरों का दायरा बढ़ा है। आने वाले हफ्तों में तटरक्षक की सक्रियता और समन्वय की असली परीक्षा होगी, जब मानसून की तीव्रता बढ़ेगी।