7 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंजाब में लू से बचाव: NGOs और धार्मिक संस्थाओं ने अमृतसर-चंडीगढ़ में स्थापित किए सामुदायिक कूलिंग जोन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंजाब में लू से बचाव: NGOs और धार्मिक संस्थाओं ने अमृतसर-चंडीगढ़ में स्थापित किए सामुदायिक कूलिंग जोन

सारांश

पंजाब में भीषण गर्मी के बीच NGOs और गुरुद्वारों ने मिलकर अमृतसर, चंडीगढ़ और पटियाला में सामुदायिक कूलिंग जोन बनाए हैं — दिहाड़ी मजदूरों और यात्रियों को छाया और पानी देने की यह पहल सरकारी तंत्र से परे, ज़मीनी सामाजिक जवाबदेही की मिसाल है।

मुख्य बातें

सांझ पंजाब , इको सेवा , केंद्रीय सिख सभा और पटियाला के गुरुद्वारा साहिब ने 8 जून को पंजाब में सामुदायिक कूलिंग जोन नेटवर्क शुरू किया।
अमृतसर के सदर चौक पर बांस की संरचना से निर्मित लू-राहत आश्रय का उद्घाटन स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.
योगेश अरोरा ने किया।
चंडीगढ़ सेक्टर 28 और पटियाला के शेखूपुर में भी राहत केंद्र स्थापित; आने वाले हफ्तों में और केंद्र खुलेंगे।
पहल का लक्ष्य दिहाड़ी मजदूरों, दैनिक वेतन भोगियों और यात्रियों को छाया, पीने का पानी और अस्थायी राहत देना है।
आयोजकों को उम्मीद है कि यह मॉडल सरकारी एजेंसियों और नागरिक समाज के बीच व्यापक सहयोग को प्रेरित करेगा।

भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप के बीच पंजाब में सांझ पंजाब, इको सेवा, केंद्रीय सिख सभा और पटियाला के गुरुद्वारा साहिब सहित कई गैर-सरकारी एवं धार्मिक संगठनों ने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से दिहाड़ी मजदूरों, यात्रियों और आम नागरिकों के लिए सामुदायिक कूलिंग जोन और लू-राहत आश्रयों का नेटवर्क तैयार किया है। 8 जून को शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी से प्रभावित संवेदनशील आबादी को छाया, पीने का पानी और अस्थायी राहत उपलब्ध कराना है।

मुख्य घटनाक्रम

अमृतसर नगर निगम, इको सेवा और सांझ पंजाब ने संयुक्त रूप से अमृतसर के सदर चौक पर एक लू-राहत आश्रय स्थल का उद्घाटन किया। इस आश्रय का उद्घाटन स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश अरोरा ने किया। यह संरचना पर्यावरण के अनुकूल बांस की जाली और बांस के ढाँचे से निर्मित है, जो पैदल यात्रियों को प्राकृतिक छाया प्रदान करती है।

अमृतसर जिले की जगदेव कलां ग्राम पंचायत ने भी अपने क्षेत्र में एक लू-राहत केंद्र स्थापित किया है। इको सेवा की ओर से निधि सिंधवानी, मीनाक्षी खन्ना, रिद्धि खन्ना, स्मृति कपूर, मानिक छिना, जैस्मीन गिल, हरवीन और दीप्ति खन्ना इस अवसर पर उपस्थित रहीं।

चंडीगढ़ और पटियाला में भी राहत केंद्र

चंडीगढ़ के सेक्टर 28 स्थित केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा के कार्यालय में अतिरिक्त शीतलन एवं विश्राम स्थल बनाए गए हैं, जहाँ कर्मचारियों, आगंतुकों और आम नागरिकों के लिए छायादार बैठने की व्यवस्था और पीने का पानी उपलब्ध है। इसी प्रकार, पटियाला के शेखूपुर स्थित गुरुद्वारा परमेश्वर द्वार में भी राहत केंद्र स्थापित किया गया है। आने वाले हफ्तों में पटियाला और अमृतसर में और अधिक कूलिंग जोन बनाने की योजना है।

आयोजकों की राय

केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा के गुरप्रीत सिंह ने कहा कि सिख परंपरा में 'सेवा' और मानवता की देखभाल का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे लू की तीव्रता बढ़ती जा रही है, पीने का पानी, छाया और आराम करने की जगह उपलब्ध कराना लोगों के स्वास्थ्य और सम्मान की रक्षा करने का एक व्यावहारिक तरीका है।'

इको सेवा की निधि सिंधवानी ने कहा कि पर्यावरण संबंधी कार्यों से लोगों को सीधा लाभ मिलना चाहिए। उनके अनुसार, 'हीट शेल्टर, वृक्षारोपण और पब्लिक कूलिंग जोन ऐसे सरल उपाय हैं जो शहरों को अधिक रहने योग्य बना सकते हैं और समुदायों को बढ़ते तापमान के अनुकूल ढलने में मदद कर सकते हैं।'

क्लीन एयर पंजाब की गुरप्रीत कौर ने कहा कि भीषण गर्मी पंजाब में लोगों के सामने सबसे गंभीर जलवायु जोखिमों में से एक है और सामुदायिक कूलिंग जोन एक कम लागत वाला, लेकिन प्रभावी उपाय है।

आम जनता पर असर

यह पहल विशेष रूप से उन दिहाड़ी मजदूरों और दैनिक वेतन भोगियों के लिए महत्वपूर्ण है जो दिन के सबसे गर्म घंटों में बाहर काम करते हैं और जिनके पास वातानुकूलित स्थानों तक पहुँच नहीं है। गौरतलब है कि भारत में हर वर्ष लू से सैकड़ों लोगों की जान जाती है, और पंजाब जैसे मैदानी राज्यों में जून-जुलाई के महीनों में तापमान 45°C से ऊपर पहुँच जाता है।

क्या होगा आगे

आयोजकों को उम्मीद है कि यह मॉडल समुदायों, धार्मिक संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों और सरकारी एजेंसियों के बीच व्यापक सहयोग को प्रेरित करेगा। सांझ पंजाब — जो कृषि, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण स्थिरता पर काम करने वाला नागरिक नेटवर्क है — इस पूरी पहल में समन्वय की भूमिका निभा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठता है कि राज्य की आपदा प्रबंधन मशीनरी कहाँ है। बांस के ढाँचे और स्वयंसेवी नेटवर्क सराहनीय हैं, लेकिन ये दीर्घकालिक जलवायु अनुकूलन की जगह नहीं ले सकते। असली परीक्षा यह है कि क्या पंजाब सरकार इस मॉडल को नीतिगत ढाँचे में समाहित करती है — या यह हर गर्मी में दोहराई जाने वाली आपातकालीन प्रतिक्रिया बनी रहती है।
RashtraPress
7 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में सामुदायिक कूलिंग जोन क्या हैं?
ये वे सार्वजनिक स्थान हैं जहाँ दिहाड़ी मजदूरों, यात्रियों और आम नागरिकों को भीषण गर्मी से अस्थायी राहत के लिए छाया, पीने का पानी और बैठने की सुविधा मुफ्त में दी जाती है। इन्हें NGOs, धार्मिक संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से स्थापित किया गया है।
ये कूलिंग जोन कहाँ-कहाँ स्थापित किए गए हैं?
फिलहाल अमृतसर के सदर चौक, जगदेव कलां ग्राम पंचायत, चंडीगढ़ के सेक्टर 28 और पटियाला के शेखूपुर में राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं। आने वाले हफ्तों में पटियाला और अमृतसर में और अधिक केंद्र खोले जाने की योजना है।
इस पहल में कौन-से संगठन शामिल हैं?
सांझ पंजाब, इको सेवा, केंद्रीय श्री गुरु सिंह सभा, पटियाला के गुरुद्वारा साहिब और अमृतसर नगर निगम इस पहल के प्रमुख भागीदार हैं। क्लीन एयर पंजाब जैसे पर्यावरण संगठन भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।
इन राहत केंद्रों से किसे सबसे अधिक फायदा होगा?
दिहाड़ी मजदूर, दैनिक वेतन भोगी, पैदल यात्री और वे लोग जिनके पास वातानुकूलित स्थानों तक पहुँच नहीं है, इन केंद्रों से सर्वाधिक लाभान्वित होंगे। बुजुर्ग, बच्चे और बाहर काम करने वाले श्रमिक विशेष रूप से लू के प्रति संवेदनशील माने जाते हैं।
क्या यह मॉडल पंजाब के अन्य जिलों में भी लागू होगा?
आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि यह मॉडल समुदायों, धार्मिक संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच व्यापक सहयोग को प्रेरित करेगा। अभी तक राज्य सरकार की ओर से इसे औपचारिक नीति का हिस्सा बनाने की कोई घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले