अशोक गहलोत के बयान पर बिहार मंत्री अशोक चौधरी का पलटवार, कांग्रेस को आत्मचिंतन की नसीहत
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने सोमवार, 15 जून को पटना में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के उस बयान को सिरे से अप्रासंगिक करार दिया, जिसमें गहलोत ने कहा था कि यदि इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं तो वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर प्रतिबंध लगा देतीं। चौधरी ने इस बयान को 'तानाशाही सोच' बताते हुए कहा कि इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
लोकतंत्र बनाम तानाशाही
मंत्री अशोक चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, राजतंत्र नहीं। उनके अनुसार, BJP सत्ता में किसी की इच्छा या अनिच्छा से नहीं, बल्कि जनता के जनादेश के बल पर है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की जनता पसंद करती है, इसीलिए आज भाजपा सत्ता में है।' उनका तर्क था कि इंदिरा गांधी के होने या न होने की परिकल्पना से पहले कांग्रेस को अपनी आंतरिक कमज़ोरियों पर विचार करना चाहिए।
कांग्रेस को आत्मचिंतन की नसीहत
चौधरी ने कांग्रेस को सीधी सलाह देते हुए कहा कि पार्टी को पहले यह पता लगाना चाहिए कि उसके भीतर कहाँ खामियाँ हैं और फिर उन्हें दूर करना चाहिए, ताकि संगठन को मज़बूती मिल सके। उन्होंने कहा, 'आपको आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है।' आलोचकों का कहना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस कई राज्यों में संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है।
पश्चिम बंगाल में TMC पर प्रतिक्रिया
मंत्री चौधरी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे बवाल पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोगों में TMC की कार्यशैली को लेकर गहरा आक्रोश है, जो अब सड़कों पर फूट रहा है। उनके अनुसार, जब तक TMC सत्ता में थी, लोग अपना रोष खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते थे, लेकिन सत्ता से बाहर होते ही जनता का दबा हुआ गुस्सा सामने आ गया।
पश्चिम बंगाल का राजनीतिक ट्रेंड
चौधरी ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक विरासत का हवाला देते हुए कहा कि यह राज्य सत्ता-परिवर्तन के लिए जाना जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले कांग्रेस, फिर वामपंथी, फिर TMC और अब BJP — यह बदलाव का एक स्थापित चक्र है। उनके अनुसार, TMC का सत्ता से बाहर होना कोई अप्रत्याशित घटना नहीं, बल्कि राज्य के राजनीतिक इतिहास की स्वाभाविक कड़ी है। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल में राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।