दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला: कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजम को 7 दिन के नोटिस के बिना गिरफ्तारी नहीं
सारांश
मुख्य बातें
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम की अग्रिम जमानत याचिका का निपटारा करते हुए दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया कि सांसद के विरुद्ध कोई भी कठोर कार्रवाई करने से पहले कम से कम 7 दिन पहले लिखित नोटिस व्यक्तिगत रूप से सौंपा जाए। इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से निर्वाचित इस सांसद को यह राहत ऐसे समय में मिली है जब वे यौन उत्पीड़न के आरोपों से संबंधित जांच में उलझे हुए हैं।
कोर्ट का आदेश और मुख्य शर्तें
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका का निपटारा करते हुए दोनों पक्षों पर बाध्यकारी निर्देश जारी किए। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अकोइजम जांच में सहयोग कर रहे हैं और गिरफ्तारी से पहले 7 दिन का लिखित नोटिस दिया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नोटिस व्यक्तिगत रूप से सौंपा जाए, डाक या अन्य माध्यम से नहीं। साथ ही अकोइजम को निर्देशित किया गया कि वे अपने परिवार के दो सदस्यों के संपर्क नंबर जांच अधिकारी को उपलब्ध कराएं ताकि नोटिस समय पर पहुंचाया जा सके।
सहयोग न करने पर क्या होगा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अकोइजम जांच में सहयोग नहीं करते, तो दिल्ली पुलिस को पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का अधिकार होगा। कोर्ट ने पुलिस को मामले की जांच शीघ्र पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश भी दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व राहत और JNU बर्खास्तगी
यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय की उस राहत के कुछ दिनों बाद आया है जो अकोइजम को 2 नवंबर को मिली थी। जस्टिस अनूप जे. भांभानी की एकल पीठ ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी जिसमें अकोइजम को सेवा से बर्खास्त किया गया था।
JNU की कुलपति संतीश्री डी. पंडित ने विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति की जांच के बाद 9 अक्टूबर को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने JNU को नोटिस जारी करते हुए मामले को जनवरी में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
आरोप और जांच की पृष्ठभूमि
अकोइजम के विरुद्ध इस वर्ष मई में 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। JNU ने कहा कि आंतरिक शिकायत समिति के निष्कर्षों और लागू सेवा नियमों के तहत उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
सांसद 15 अक्टूबर को समन पर दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में पेश हुए थे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा था कि वे जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं और नहीं चाहते कि उनकी उपस्थिति को असहयोग माना जाए।
आगे की राह
फिलहाल अकोइजम बर्खास्तगी के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका और दिल्ली पुलिस की आपराधिक जांच — दोनों मोर्चों पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अगली सुनवाई जनवरी में निर्धारित है, और तब तक अदालती संरक्षण उन्हें तत्काल गिरफ्तारी से राहत देता है।