एंटी-पेपर लीक बिल 2026 लोकसभा में पारित, BJP के रोहन गुप्ता बोले — कांग्रेस ने संसद को बनाया अखाड़ा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में बुधवार, 29 जुलाई 2026 को 'एंटी-पेपर लीक बिल 2026' ध्वनि मत से पारित हो गया। बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस ने संसद को राजनीति का अखाड़ा बना दिया है।
रोहन गुप्ता का पलटवार
रोहन गुप्ता ने कहा, 'संसद लोकतंत्र का मंदिर है। बिना तथ्यों और सबूतों के इतने गंभीर आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप संसद की गरिमा के अनुकूल नहीं हैं और ऐसे बयानों से पहले ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल
गुप्ता ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आजादी के बाद सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली पार्टी अब व्यवस्था की शिकायत कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि 2010 में पेपर लीक रोकने के लिए एक विधेयक पेश किया गया था, लेकिन वह कभी पारित नहीं हुआ — 'राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी।' उनके अनुसार, 'कांग्रेस ने अपने शासनकाल में कानून क्यों नहीं बनाया और अब उसे लागू होने पर सवाल कैसे उठा सकती है? इस माफिया सिस्टम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।'
मोदी सरकार की उपलब्धि का दावा
रोहन गुप्ता ने कहा कि 12 वर्षों के इंतजार के बाद 2024 में पहली बार मोदी सरकार एंटी-पेपर लीक कानून लेकर आई। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले में एक हाईपावर कमेटी का गठन कर रही है, जबकि कांग्रेस चर्चा से दूर भागती रही। गुप्ता ने कहा, 'छात्रों की सुरक्षा और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है — युवाओं के सपनों से कोई समझौता नहीं होगा।'
विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप
अन्य राज्यों में पेपर लीक के मामलों का ज़िक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में भी इसी तरह के मामले सामने आए हैं। उन्होंने पूछा, 'जो लोग यहाँ इस्तीफे की माँग और नैतिक जिम्मेदारी की बात कर रहे हैं, वे उन राज्यों पर चुप क्यों हैं? यह पूरी तरह राजनीति और पाखंड है।' यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक का मुद्दा पूरे देश में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और कई राज्यों में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या
बिल के पारित होने के बाद अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। सरकार द्वारा गठित की जाने वाली हाईपावर कमेटी के स्वरूप और कार्यक्षेत्र पर सभी की नज़रें टिकी हैं। गौरतलब है कि NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लीक के मामलों ने इस विधायी कदम को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से अहम बना दिया है।