छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ ने नक्सलियों के 8 हथियार भंडार ध्वस्त किए, 21 आईईडी और बीजीएल राइफल बरामद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर और गरियाबंद जिलों में चलाए गए समन्वित नक्सल-विरोधी अभियान के दौरान नक्सलियों के आठ हथियार और विस्फोटक भंडारों का भंडाफोड़ किया है। 13 जून को अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान में एक बैरल ग्रेनेड लॉन्चर राइफल, 21 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) सहित भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री ज़ब्त की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस बरामदगी ने इलाके में अस्थिरता फैलाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
खुफिया जानकारी के आधार पर सीआरपीएफ ने बीजापुर के पिडिया और कुप्पागुडा इलाकों से सटे अद्रि, हर्रा और मदुमपारा गाँवों के घने जंगलों को घेर कर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सुरक्षा बलों को एक बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) राइफल, एक 8 एमएम राइफल, एक 12-बोर राइफल और 21 आईईडी बरामद हुए।
इसके अतिरिक्त, आईईडी निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री — जिसमें कॉर्डेक्स वायर, सेफ्टी फ्यूज़, इलेक्ट्रिक वायर, एयर गन राउंड और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं — भी ज़ब्त की गई। नक्सलियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कपड़ों सहित 58 अन्य वस्तुएँ भी अभियान में बरामद हुईं।
गरियाबंद में समानांतर ऑपरेशन
गरियाबंद जिले के दंडईपानी जंगल में सीआरपीएफ और पुलिस की संयुक्त टीमों ने नक्सलियों के एक और संदिग्ध ठिकाने का पर्दाफाश किया। बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीडीएस) ने वहाँ विस्फोटकों की पुष्टि की, जिनमें 4 किलो का प्रेशर आईईडी और एक कुकर आईईडी शामिल थे — दोनों को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया गया।
इस ऑपरेशन में एक भरमार राइफल, इंटरसेप्टर, यूबीजीएल राउंड, मैगज़ीन, कॉर्डेक्स वायर, बारूद, पटाखे, दवाएँ और रोज़मर्रा की उपयोगी वस्तुएँ भी ज़ब्त की गईं।
क्षेत्र की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अद्रि, हर्रा और मदुमपारा का इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा बल छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल प्रभाव को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर करने के अभियान तेज़ कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे अभियानों से विद्रोहियों के प्रभाव में धीरे-धीरे कमी आई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा है और विकास कार्यों का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
आम जनता पर असर
इस बरामदगी का सबसे बड़ा असर उन ग्रामीणों पर पड़ता है जो वर्षों से नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों के साये में जीते रहे हैं। बड़े पैमाने पर विस्फोटकों की बरामदगी से सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन को संभावित हमलों की योजना को विफल करने में मदद मिली है।
क्या होगा आगे
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि बरामद सामग्री की फोरेंसिक जाँच की जाएगी ताकि नक्सली नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाया जा सके। बीजापुर और गरियाबंद में अभियान जारी रहने की संभावना है।