सीडब्ल्यूसी बैठक के फैसलों पर भाजपा का पलटवार: 'तथ्यों पर बात करे कांग्रेस, जनता को गुमराह न करे'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की 20 अगस्त को नई दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कड़ा पलटवार किया। बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेपर लीक और 'वंदे मातरम' के गायन पर 1937 के प्रस्ताव का पालन करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर निर्णय लिए गए, जिसके बाद राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ गया।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
हैदराबाद में भाजपा नेता टी. आर. श्रीनिवास ने सीडब्ल्यूसी के फैसलों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हाल ही में हुई सीडब्ल्यूसी बैठक में के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि वह चढ़ावा चोरी का मुद्दा हर शहर में ले जाएंगे। वेणुगोपाल, सबसे पहले यह समझ लें — अगर इस पर प्रतिक्रिया आएगी, तो यह शिकायत न करें कि हमने कुछ कहा।'
श्रीनिवास ने छात्र और शिक्षा मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा, 'वेणुगोपाल ने अपनी सीडब्ल्यूसी बैठक में दावा किया कि छात्रों के मुद्दे पर सरकार बैकफुट पर है। वेणुगोपाल, आप सरकार की नीतियों और फैसलों से कितने अनजान हैं? अगर हम इतने ही अलग-थलग होते, तो अपने सम्मानित शिक्षा मंत्री से पद छोड़ने, बीच में सुधार करने, पूरे NTA को बदलने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्यों कहते? कृपया तथ्यों के साथ बात करें।'
सीडब्ल्यूसी बैठक में क्या हुआ
बुधवार को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पार्टी की रणनीतिक दिशा तय की। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में कहा, 'सीडब्ल्यूसी की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि लोगों तक क्या संदेश पहुंचाना है और किन मुद्दों को उठाना है। हमारे वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस को संबोधित किया और अपनी बात रखी। सीडब्ल्यूसी निश्चित रूप से एक संदेश और पार्टी का कार्यक्रम लेकर आएगी, जिसे हम लोगों तक पहुंचाएंगे।'
विपक्षी गठबंधन में भी उठे सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता को लेकर भी अंदरूनी सवाल उठ रहे हैं। पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने सीडब्ल्यूसी की बैठक पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो भी चर्चा हुई, वह मेरे लिए कम महत्वपूर्ण है। ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि यह देश आज भी वैसा ही है। हमने असल में क्या हासिल किया है? मध्ययुगीन व्यवस्था आज भी मौजूद है। सवाल सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे का नहीं है — सवाल यह है कि एक इंसान का दूसरे इंसान के प्रति नज़रिया क्या तय करता है।'
गौरतलब है कि झा का यह बयान सीडब्ल्यूसी की बैठक की सीमाओं को रेखांकित करता है और यह संकेत देता है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर भी प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद हैं।
आगे की राजनीतिक दिशा
सीडब्ल्यूसी के फैसलों के बाद कांग्रेस राम मंदिर चढ़ावा चोरी और पेपर लीक के मुद्दों को जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन मुद्दों पर कांग्रेस को तथ्यात्मक रूप से घेरेगी। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इन संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।