20 अगस्त 2026
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सीडब्ल्यूसी बैठक के फैसलों पर भाजपा का पलटवार: 'तथ्यों पर बात करे कांग्रेस, जनता को गुमराह न करे'

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सीडब्ल्यूसी बैठक के फैसलों पर भाजपा का पलटवार: 'तथ्यों पर बात करे कांग्रेस, जनता को गुमराह न करे'

सारांश

सीडब्ल्यूसी की बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर फैसले लेने के बाद कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। भाजपा ने 'तथ्यों पर बात करो' की चुनौती दी, तो RJD सांसद ने खुद सीडब्ल्यूसी की प्रासंगिकता पर सवाल उठा दिए — विपक्षी एकता की दरारें उजागर हो रही हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की 20 अगस्त को नई दिल्ली में बैठक हुई, जिसमें राम मंदिर चढ़ावा चोरी , पेपर लीक और 'वंदे मातरम' पर 1937 के प्रस्ताव जैसे मुद्दों पर निर्णय लिए गए।
श्रीनिवास ने हैदराबाद से कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और के.
वेणुगोपाल को तथ्यों पर बात करने की चुनौती दी।
भाजपा ने दावा किया कि सरकार ने NTA में सुधार, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और जवाबदेही सुनिश्चित कर छात्र मुद्दे पर ठोस कदम उठाए हैं।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सीडब्ल्यूसी जल्द ही पार्टी का कार्यक्रम और संदेश जनता तक पहुंचाएगी।
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने सीडब्ल्यूसी की बैठक को 'कम महत्वपूर्ण' बताते हुए सामाजिक व्यवस्था पर बड़े सवाल उठाए।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की 20 अगस्त को नई दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कड़ा पलटवार किया। बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेपर लीक और 'वंदे मातरम' के गायन पर 1937 के प्रस्ताव का पालन करने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर निर्णय लिए गए, जिसके बाद राजनीतिक तापमान तेज़ी से बढ़ गया।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

हैदराबाद में भाजपा नेता टी. आर. श्रीनिवास ने सीडब्ल्यूसी के फैसलों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हाल ही में हुई सीडब्ल्यूसी बैठक में के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि वह चढ़ावा चोरी का मुद्दा हर शहर में ले जाएंगे। वेणुगोपाल, सबसे पहले यह समझ लें — अगर इस पर प्रतिक्रिया आएगी, तो यह शिकायत न करें कि हमने कुछ कहा।'

श्रीनिवास ने छात्र और शिक्षा मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा, 'वेणुगोपाल ने अपनी सीडब्ल्यूसी बैठक में दावा किया कि छात्रों के मुद्दे पर सरकार बैकफुट पर है। वेणुगोपाल, आप सरकार की नीतियों और फैसलों से कितने अनजान हैं? अगर हम इतने ही अलग-थलग होते, तो अपने सम्मानित शिक्षा मंत्री से पद छोड़ने, बीच में सुधार करने, पूरे NTA को बदलने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्यों कहते? कृपया तथ्यों के साथ बात करें।'

सीडब्ल्यूसी बैठक में क्या हुआ

बुधवार को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने पार्टी की रणनीतिक दिशा तय की। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में कहा, 'सीडब्ल्यूसी की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि लोगों तक क्या संदेश पहुंचाना है और किन मुद्दों को उठाना है। हमारे वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस को संबोधित किया और अपनी बात रखी। सीडब्ल्यूसी निश्चित रूप से एक संदेश और पार्टी का कार्यक्रम लेकर आएगी, जिसे हम लोगों तक पहुंचाएंगे।'

विपक्षी गठबंधन में भी उठे सवाल

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता को लेकर भी अंदरूनी सवाल उठ रहे हैं। पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने सीडब्ल्यूसी की बैठक पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'कांग्रेस की सीडब्ल्यूसी की बैठक में जो भी चर्चा हुई, वह मेरे लिए कम महत्वपूर्ण है। ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि यह देश आज भी वैसा ही है। हमने असल में क्या हासिल किया है? मध्ययुगीन व्यवस्था आज भी मौजूद है। सवाल सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे का नहीं है — सवाल यह है कि एक इंसान का दूसरे इंसान के प्रति नज़रिया क्या तय करता है।'

गौरतलब है कि झा का यह बयान सीडब्ल्यूसी की बैठक की सीमाओं को रेखांकित करता है और यह संकेत देता है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर भी प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद हैं।

आगे की राजनीतिक दिशा

सीडब्ल्यूसी के फैसलों के बाद कांग्रेस राम मंदिर चढ़ावा चोरी और पेपर लीक के मुद्दों को जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी में है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इन मुद्दों पर कांग्रेस को तथ्यात्मक रूप से घेरेगी। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इन संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक टकराव और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कांग्रेस की असली चुनौती इन्हें चुनावी आख्यान में बदलने की है, न केवल बैठकों में प्रस्ताव पारित करने की। भाजपा का 'तथ्यों पर बात करो' वाला पलटवार रणनीतिक है — वह NTA सुधार और मंत्री के इस्तीफे को अपनी जवाबदेही का प्रमाण बताकर कांग्रेस के आरोपों को कुंद करने की कोशिश कर रही है। सबसे महत्वपूर्ण संकेत RJD सांसद मनोज कुमार झा का बयान है, जिसमें उन्होंने सीडब्ल्यूसी की प्रासंगिकता को ही सीमित बताया — यह विपक्षी गठबंधन के भीतर की दरारों को उजागर करता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीडब्ल्यूसी की 20 अगस्त की बैठक में कौन-से मुख्य फैसले लिए गए?
बैठक में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेपर लीक और 'वंदे मातरम' के गायन पर 1937 के प्रस्ताव का पालन करने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर निर्णय लिए गए। कांग्रेस ने इन मुद्दों को जनता तक ले जाने की रणनीति तय की।
भाजपा ने सीडब्ल्यूसी के फैसलों पर क्या कहा?
भाजपा नेता टी. आर. श्रीनिवास ने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और के. सी. वेणुगोपाल को तथ्यों के साथ बात करने की चुनौती दी। भाजपा ने दावा किया कि सरकार ने NTA सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसे कदम उठाकर छात्र मुद्दे पर जवाबदेही दिखाई है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने क्या कहा?
सुक्खू ने शिमला में कहा कि सीडब्ल्यूसी बैठक में पार्टी के संदेश और उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि पार्टी जल्द ही एक स्पष्ट कार्यक्रम के साथ जनता के बीच जाएगी।
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने सीडब्ल्यूसी पर क्या टिप्पणी की?
पटना में मनोज कुमार झा ने कहा कि सीडब्ल्यूसी की बैठक की चर्चा उनके लिए 'कम महत्वपूर्ण' है और असली सवाल यह है कि देश में मध्ययुगीन सामाजिक व्यवस्था अब भी कायम है। उनका यह बयान विपक्षी गठबंधन के भीतर प्राथमिकताओं पर मतभेद को उजागर करता है।
'वंदे मातरम' पर 1937 का प्रस्ताव क्या है और यह विवादास्पद क्यों है?
1937 में कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो छंद गाने की सिफारिश की गई थी। सीडब्ल्यूसी द्वारा इस पुराने प्रस्ताव का उल्लेख करने पर भाजपा ने इसे राष्ट्रीय भावनाओं के विरुद्ध बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
राष्ट्र प्रेस
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