दरभंगा के जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पर गिरी आकाशीय बिजली, शिखर और त्रिशूल क्षतिग्रस्त; 25 श्रद्धालु बाल-बाल बचे
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड स्थित होरलपट्टी गांव के ऐतिहासिक जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पर 29 जून की देर रात आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर का गुंबद और शिखर पर लगा त्रिशूल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय परिसर में मौजूद करीब 25 श्रद्धालु बाल-बाल बच गए और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
घटनाक्रम: रात 11 बजे का वह भयावह क्षण
स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार रात लगभग 11 बजे तेज बारिश और कड़कड़ाती गर्जना के बीच आकाशीय बिजली सीधे मंदिर के शिखर पर आ गिरी। उस समय मंदिर में बाबा की भोग आरती और पूजा संपन्न हो चुकी थी तथा मंदिर के पट बंद किए जा चुके थे। श्रद्धालु गणेशजी का प्रसाद लेने के लिए परिसर में ही खड़े थे, तभी यह हादसा हुआ।
बिजली की चपेट में आने से मंदिर के गुंबद का एक हिस्सा टूट गया और शिखर पर स्थापित त्रिशूल को भी भारी नुकसान पहुंचा। मंदिर के ऊपरी ढांचे को काफी क्षति पहुंची है।
पुजारी का बयान और पुरानी घटना का संदर्भ
मंदिर के पुजारी शिव शंकर गिरी ने बताया कि बिजली इतनी तीव्र थी कि शिखर और त्रिशूल को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी वर्षों पूर्व इस मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरने की घटना हो चुकी है, हालांकि उस समय वे स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे। गिरी ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से मंदिर के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत के लिए तत्काल आगे आने की अपील की है।
धार्मिक महत्व: मिथिलांचल की आस्था का केंद्र
पुजारी शिव शंकर गिरी के अनुसार, जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर मिथिलांचल की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र है। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। सावन माह और अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, जिससे इस मंदिर की व्यापक धार्मिक पहुंच का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
स्थानीय मांग: शीघ्र मरम्मत और संरक्षण
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त गुंबद की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के इस मंदिर के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।