दीपेंद्र हुड्डा का सज्जन कुमार बयान पर खेद, बोले- ‘रोल मॉडल’ शब्द इस्तेमाल नहीं किया
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने 23 अगस्त को चंडीगढ़ में सज्जन कुमार को लेकर दिए गए अपने हालिया बयान पर उठे विवाद पर खेद व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि उनके बयान को ‘तोड़-मरोड़कर’ पेश किया गया है। हुड्डा ने कहा कि उन्होंने वह शब्द इस्तेमाल ही नहीं किया जिसका हवाला मीडिया रिपोर्टों में दिया जा रहा है, और न ही उनका ऐसा कोई आशय था।
मुख्य स्पष्टीकरण
रोहतक से सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने ज़ोर देकर कहा कि उनका किसी भी समुदाय, विशेषकर सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सिख समुदाय के साथ ‘चार पीढ़ियों से घनिष्ठ संबंध’ रहे हैं और वह अपने ‘सिख भाइयों’ की भावनाओं को आहत करने की कल्पना भी नहीं कर सकते।
हुड्डा ने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएँ आहत हुई हैं, तो वह ‘एक भाई के रूप में’ इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने दोहराया कि वह हमेशा 1984 के सिख विरोधी दंगों में प्रभावित हुए परिवारों को न्याय दिलाने की वकालत करते रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला
कांग्रेस सांसद ने अपने परिवार और सिख समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि पंजाब के ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन के दौरान उनके परदादा चौधरी मातूराम और शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह को एक ही दिन ‘काला पानी’ की सज़ा सुनाई गई थी।
उन्होंने कहा कि इसके बाद से हर बड़े संघर्ष में उनका परिवार सिख समुदाय के साथ खड़ा रहा है। हुड्डा ने हालिया किसान आंदोलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब पंजाब से किसान दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचे, तब वह व्यक्तिगत रूप से समर्थन में सबसे पहले पहुँचने वाले नेताओं में से थे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 1984 के दंगों के दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार को लेकर हुड्डा के कथित बयान पर सिख संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की गई थी। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब पंजाब और हरियाणा की राजनीति में सिख भावनाओं का प्रश्न बार-बार केंद्र में आता रहा है।
हुड्डा ने अंत में दोहराया कि उनके और उनके परिवार के सिख समुदाय के साथ रिश्ते ‘केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और ऐतिहासिक’ हैं, इसलिए किसी भी प्रकार से सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का सवाल ही नहीं उठता।
आगे क्या
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर अभी औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सिख संगठनों की प्रतिक्रिया और हुड्डा के इस स्पष्टीकरण से विवाद की दिशा तय होगी।