सज्जन कुमार पर हुड्डा की टिप्पणी से आक्रोश, 1984 दंगा पीड़िता ने कांग्रेस सांसद के घर के बाहर लगाया पोस्टर
सारांश
मुख्य बातें
1984 के सिख-विरोधी दंगों की पीड़िता निरप्रीत कौर ने 21 अगस्त को नई दिल्ली में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के आवास के बाहर एक पोस्टर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। पोस्टर पर लिखा था — 'अगर सज्जन कुमार रोल मॉडल हैं, तो दोषी कौन हैं... दीपेंद्र हुड्डा, आपको शर्म आनी चाहिए।' यह विरोध उस बयान के बाद भड़का, जिसमें हुड्डा ने दंगों के दोषी सज्जन कुमार की मृत्यु को 'देश के राजनीतिक परिदृश्य के लिए अपूरणीय क्षति' करार दिया था।
विवाद की जड़: हुड्डा का बयान
उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार का 20 अगस्त को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। इसके बाद कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पत्रकारों से कहा, 'सज्जन कुमार न केवल दिल्ली और ग्रामीण दिल्ली में, बल्कि पूरे उत्तर भारत में एक प्रमुख हस्ती थे। लोगों के साथ उनका जुड़ाव अनुकरणीय था और उन्हें हमारे देश भर में एक उदाहरण के तौर पर पेश किया जाता है।' इस बयान ने तत्काल राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
गौरतलब है कि सज्जन कुमार को दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2018 में 1984 के सिख-विरोधी दंगों में उनकी भूमिका के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ये दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद 31 अक्टूबर 1984 को भड़के थे, जिनमें हजारों सिखों की जान गई थी।
पीड़िता की पीड़ा: निरप्रीत कौर की कहानी
निरप्रीत कौर मात्र 16 वर्ष की थीं, जब उन्होंने 1 नवंबर 1984 की सुबह दिल्ली के राज नगर में एक गुरुद्वारे के पास अपने पिता को एक उन्मादी भीड़ द्वारा जिंदा जलाए जाते देखा था। उनके पिता उस गुरुद्वारे के मुख्य पुजारी थे। दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद जब 2018 में सज्जन कुमार को सजा सुनाई गई, तब कौर ने कहा था, 'मुझे 34 वर्ष बाद न्याय मिला है। सज्जन कुमार जेल जाएंगे।' हुड्डा के बयान ने उनकी उस पीड़ा को फिर से कुरेद दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: SAD और पीड़ित परिवारों का आक्रोश
शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने हुड्डा के बयान की कड़ी निंदा की। SAD नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा, 'मैं इस बयान की निंदा करता हूँ। दीपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस पार्टी को माफी माँगनी चाहिए। क्या दीपेंद्र हुड्डा इस टिप्पणी के बाद भी पार्टी का हिस्सा बने रहेंगे और अगर वह बने रहते हैं, तो मैं इसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मानसिकता मानूंगा।'
मजीठिया ने यह भी कहा, 'सिखों को अब यह समझ लेना चाहिए कि 1984 के नरसंहार पर कांग्रेस पार्टी का क्या रुख है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस पार्टी पहले से ही 1984 के दंगों को लेकर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रही है।
पीड़ित परिवारों की आवाज़
पीड़ित परिवार के एक सदस्य, जिन्होंने अपनी पहचान सुरजीत सिंह के रूप में बताई, ने कहा कि 1984 के दंगों के दौरान उनके परिवार के सात सदस्यों को जिंदा जला दिया गया था। उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि दीपेंद्र हुड्डा एक अपराधी का साथ दे रहे हैं। उन्हें ऐसे व्यक्ति की तारीफ करने पर शर्म आनी चाहिए, जो इतने सारे लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार है।'
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीतिक दल 1984 के पीड़ितों के प्रति अपनी जवाबदेही को लेकर वास्तव में गंभीर हैं — या यह संवेदनशील मुद्दा अब भी राजनीतिक सुविधा का साधन बना हुआ है।