20 अगस्त 2026
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सज्जन कुमार का निधन: 1984 दंगों में उम्रकैद काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद का 80 वर्ष की आयु में देहांत

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सज्जन कुमार का निधन: 1984 दंगों में उम्रकैद काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद का 80 वर्ष की आयु में देहांत

सारांश

1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की आयु में तिहाड़ जेल में निधन हो गया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2018 में पाँच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया था।

मुख्य बातें

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 20 अगस्त 2026 को 80 वर्ष की आयु में तिहाड़ जेल में निधन।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 दिसंबर 2018 को 1984 सिख विरोधी दंगों में पाँच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अपील खारिज कर दी थी; वे सात वर्षों से जेल में थे।
SIT ने फरवरी 2015 में जनकपुरी हिंसा के दो अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की थी।
7 जुलाई 2025 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में दिए अंतिम बयान में उन्होंने दंगों में शामिल होने से इनकार किया था।
इस वर्ष अप्रैल में बीमार पत्नी से मिलने के लिए माँगी गई जमानत सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दी थी।

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 20 अगस्त 2026 को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे नई दिल्ली के तिहाड़ जेल में 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 दिसंबर 2018 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था।

न्यायिक यात्रा और दोषसिद्धि

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी क्षेत्र में पाँच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इससे पहले 2013 में उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था।

उन्होंने इस दोषसिद्धि को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इस प्रकार सात वर्षों से अधिक समय तक वे तिहाड़ जेल में बंद रहे।

जनकपुरी-विकासपुरी हिंसा के अलग मामले

जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा मामले में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पहले सज्जन कुमार को बरी कर दिया था, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी। मामले के पुनः उजागर होने के बाद विशेष जाँच दल (SIT) ने फरवरी 2015 में उनके खिलाफ दो अलग एफआईआर दर्ज कीं।

पहली एफआईआर 1 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी। दूसरी एफआईआर 2 नवंबर 1984 को जनकपुरी में सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाकर मार डालने की घटना पर दर्ज हुई थी।

अंतिम बयान और जमानत याचिकाएँ

7 जुलाई 2025 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सज्जन कुमार ने अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि वे कभी भी 1984 के सिख विरोधी दंगों में शामिल नहीं थे और उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। उन्होंने जाँच एजेंसी पर निष्पक्ष जाँच न करने का आरोप भी लगाया था।

27 अप्रैल 2022 को दंगों से जुड़े एक मामले में उन्हें जमानत मिली थी, किंतु दूसरे मामले में दोषसिद्धि के कारण वे जेल में ही रहे। इस वर्ष अप्रैल में उन्होंने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से जमानत माँगी थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

1984 दंगों का ऐतिहासिक संदर्भ

1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे, जिनमें हज़ारों सिखों की जान गई थी। दशकों तक न्याय की प्रतीक्षा के बाद सज्जन कुमार की दोषसिद्धि उन मामलों में एक दुर्लभ कानूनी परिणाम था। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया जब पीड़ित परिवार न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहे थे।

सज्जन कुमार के निधन के साथ उन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया का एक अध्याय समाप्त होता है जो चार दशकों से भारतीय राजनीति और न्याय व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा करते रहे। उनसे जुड़े शेष मामलों की आगे की कानूनी स्थिति अदालतों द्वारा तय की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अधूरेपन का एहसास है। चार दशकों तक चली कानूनी लड़ाई यह भी उजागर करती है कि सत्ता में रहे लोगों के खिलाफ दोषसिद्धि कितनी दुर्लभ और देर से आती है। जनकपुरी-विकासपुरी के शेष मामले अभी भी अदालत में लंबित थे — उनका क्या होगा, यह प्रश्न अब और जटिल हो गया है। 1984 के दंगों में अभी भी अनेक आरोपी बिना सजा के जी रहे हैं, और सज्जन कुमार का मामला उस व्यापक जवाबदेही की कमी का प्रतीक बना रहेगा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सज्जन कुमार कौन थे और उन्हें किस मामले में सजा हुई थी?
सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व सांसद थे, जिन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 दिसंबर 2018 को 1984 के सिख विरोधी दंगों में दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी में पाँच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अपील खारिज कर दी थी।
सज्जन कुमार का निधन कब और कहाँ हुआ?
सज्जन कुमार का निधन 20 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के तिहाड़ जेल में हुआ। वे 80 वर्ष के थे और 1984 दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।
1984 दंगों में सज्जन कुमार के खिलाफ कितने मामले थे?
सज्जन कुमार के खिलाफ मुख्यतः दो श्रेणियों के मामले थे — दिल्ली कैंट-पालम कॉलोनी हत्याकांड, जिसमें उन्हें उम्रकैद मिली, और जनकपुरी हिंसा के दो अलग मामले, जिनमें SIT ने फरवरी 2015 में एफआईआर दर्ज की थी। जनकपुरी मामलों में राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई जारी थी।
सज्जन कुमार को जमानत क्यों नहीं मिली?
27 अप्रैल 2022 को एक मामले में जमानत मिलने के बावजूद दूसरे मामले में दोषसिद्धि के कारण वे जेल में रहे। इस वर्ष अप्रैल में बीमार पत्नी से मिलने के लिए माँगी गई जमानत को भी सर्वोच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया।
1984 के सिख विरोधी दंगे क्यों हुए थे?
1984 के सिख विरोधी दंगे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे। इन दंगों में हज़ारों सिखों की जान गई थी और दशकों बाद भी न्याय की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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