सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताने पर फूलका का कांग्रेस पर हमला: '1984 के दोषी को महिमामंडित कर रही पार्टी'
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने 21 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा पाए सज्जन कुमार के निधन के बाद पार्टी द्वारा उन्हें 'रोल मॉडल' बताना गहरी नैतिक विफलता को दर्शाता है। फूलका के अनुसार, यह रवैया साबित करता है कि कांग्रेस आज भी उस त्रासदी से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है।
फूलका का सीधा आरोप
पत्रकारों से बातचीत में फूलका ने कहा, 'कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए' कि वह सज्जन कुमार को अपना रोल मॉडल बता रही है। उनके अनुसार, 1984 के सिख विरोधी दंगों को अंजाम देने में सज्जन कुमार की केंद्रीय भूमिका थी और यह सब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर हुआ था, जबकि पार्टी ने हमेशा उन्हें संरक्षण दिया।
राजीव गांधी और क्लीनचिट का विवाद
फूलका ने ऐतिहासिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि 7 नवंबर 1984 को कुछ विपक्षी दल तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिले थे, फिर भी राजीव गांधी ने सज्जन कुमार को क्लीनचिट दे दी। इसके बाद 17 नवंबर को पीजूसीएल और पीजूडीआर की रिपोर्ट आई, जिसमें सज्जन कुमार का नाम अपराधियों में दर्ज था। 19 नवंबर को पोर्ट क्लब भाषण में राजीव गांधी ने कथित तौर पर कत्लेआम में शामिल लोगों को यह कहकर जस्टिफाई किया था कि 'जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है।'
आरोपियों को पदोन्नति का आरोप
फूलका के अनुसार, दंगों के बाद जगदीश टाइटलर, कमलनाथ और एचकेएल भगत — जिन पर भी गंभीर आरोप लगे थे — सभी को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने कहा कि 1992 में लोक अभियोजक ने माना था कि सिखों के कत्लेआम के मामले में केस बनता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
चार्जशीट दबाने का दावा
फूलका ने बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार हो चुकी थी, परंतु उसे दाखिल नहीं किया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में — यानी 18 साल बाद — लोक अभियोजक नियुक्त किया। जाँच में पता चला कि आरोपपत्र किसी अन्य मामले से जोड़ा गया था, और अंततः आरोपियों को क्लीनचिट दे दी गई।
फूलका का निष्कर्ष
फूलका ने कहा कि सज्जन कुमार के पीड़ितों ने कई हलफनामे दाखिल किए थे, जिनमें बताया गया था कि किस प्रकार वे उग्र भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि कांग्रेस के रवैये में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है और पार्टी की स्थिति जस की तस बनी हुई है।