21 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताने पर फूलका का कांग्रेस पर हमला: '1984 के दोषी को महिमामंडित कर रही पार्टी'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताने पर फूलका का कांग्रेस पर हमला: '1984 के दोषी को महिमामंडित कर रही पार्टी'

सारांश

1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद पाए सज्जन कुमार के निधन पर कांग्रेस ने उन्हें 'रोल मॉडल' बताया। वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने इसे शर्मनाक करार देते हुए कहा कि राजीव गांधी की क्लीनचिट से लेकर आरोपियों की पदोन्नति तक — कांग्रेस का रवैया आज भी नहीं बदला।

मुख्य बातें

वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने 21 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जब पार्टी ने सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताया।
सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।
फूलका के अनुसार, 7 नवंबर 1984 को विपक्ष की मुलाकात के बावजूद राजीव गांधी ने सज्जन कुमार को क्लीनचिट दी।
जगदीश टाइटलर , कमलनाथ और एचकेएल भगत को दंगों के बाद मंत्री पद दिए जाने का आरोप।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में — 18 साल बाद — लोक अभियोजक नियुक्त किया, फिर भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई।

वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने 21 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा पाए सज्जन कुमार के निधन के बाद पार्टी द्वारा उन्हें 'रोल मॉडल' बताना गहरी नैतिक विफलता को दर्शाता है। फूलका के अनुसार, यह रवैया साबित करता है कि कांग्रेस आज भी उस त्रासदी से कोई सबक लेने को तैयार नहीं है।

फूलका का सीधा आरोप

पत्रकारों से बातचीत में फूलका ने कहा, 'कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए' कि वह सज्जन कुमार को अपना रोल मॉडल बता रही है। उनके अनुसार, 1984 के सिख विरोधी दंगों को अंजाम देने में सज्जन कुमार की केंद्रीय भूमिका थी और यह सब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के इशारे पर हुआ था, जबकि पार्टी ने हमेशा उन्हें संरक्षण दिया।

राजीव गांधी और क्लीनचिट का विवाद

फूलका ने ऐतिहासिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि 7 नवंबर 1984 को कुछ विपक्षी दल तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिले थे, फिर भी राजीव गांधी ने सज्जन कुमार को क्लीनचिट दे दी। इसके बाद 17 नवंबर को पीजूसीएल और पीजूडीआर की रिपोर्ट आई, जिसमें सज्जन कुमार का नाम अपराधियों में दर्ज था। 19 नवंबर को पोर्ट क्लब भाषण में राजीव गांधी ने कथित तौर पर कत्लेआम में शामिल लोगों को यह कहकर जस्टिफाई किया था कि 'जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है।'

आरोपियों को पदोन्नति का आरोप

फूलका के अनुसार, दंगों के बाद जगदीश टाइटलर, कमलनाथ और एचकेएल भगत — जिन पर भी गंभीर आरोप लगे थे — सभी को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने कहा कि 1992 में लोक अभियोजक ने माना था कि सिखों के कत्लेआम के मामले में केस बनता है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

चार्जशीट दबाने का दावा

फूलका ने बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार हो चुकी थी, परंतु उसे दाखिल नहीं किया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में — यानी 18 साल बाद — लोक अभियोजक नियुक्त किया। जाँच में पता चला कि आरोपपत्र किसी अन्य मामले से जोड़ा गया था, और अंततः आरोपियों को क्लीनचिट दे दी गई।

फूलका का निष्कर्ष

फूलका ने कहा कि सज्जन कुमार के पीड़ितों ने कई हलफनामे दाखिल किए थे, जिनमें बताया गया था कि किस प्रकार वे उग्र भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि कांग्रेस के रवैये में आज भी कोई बदलाव नहीं आया है और पार्टी की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 1984 की त्रासदी के प्रति पार्टी की दीर्घकालिक संस्थागत बेपरवाही का प्रतिबिंब है। फूलका का आरोप नया नहीं है — दशकों से दस्तावेज़ीकृत तथ्य यह बताते हैं कि चार्जशीट तैयार होने के बाद भी दाखिल न होना और आरोपियों को मंत्री पद देना महज संयोग नहीं था। असली सवाल यह है कि जब न्यायिक प्रक्रिया 18 साल बाद भी अधूरी रही, तो जवाबदेही का ढाँचा कहाँ चूका — और क्या कांग्रेस इस पर आत्ममंथन करने को तैयार है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताने पर विवाद क्यों हुआ?
1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा पाए सज्जन कुमार के निधन के बाद कांग्रेस ने उन्हें 'रोल मॉडल' बताया, जिसे वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका ने शर्मनाक करार दिया। फूलका के अनुसार, यह बयान दंगा पीड़ितों के साथ गहरा अन्याय है।
एचएस फूलका कौन हैं और 1984 दंगों से उनका क्या संबंध है?
एचएस फूलका वरिष्ठ अधिवक्ता हैं जो 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की ओर से दशकों से कानूनी लड़ाई लड़ते रहे हैं। उन्होंने सज्जन कुमार के खिलाफ मामले में अहम भूमिका निभाई थी।
राजीव गांधी ने सज्जन कुमार को क्लीनचिट कब और क्यों दी?
फूलका के अनुसार, 7 नवंबर 1984 को विपक्षी दलों की मुलाकात के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सज्जन कुमार को क्लीनचिट दे दी। इसके बाद 17 नवंबर को आई रिपोर्ट में सज्जन कुमार का नाम अपराधियों में दर्ज था।
1984 दंगों में सज्जन कुमार के खिलाफ चार्जशीट का क्या हुआ?
फूलका के अनुसार, चार्जशीट तैयार की गई थी लेकिन दाखिल नहीं की गई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2010 में — 18 साल बाद — लोक अभियोजक नियुक्त किया, जिसके बाद जाँच में आरोपियों को क्लीनचिट दे दी गई।
1984 दंगों के बाद कांग्रेस ने किन नेताओं को मंत्री पद दिए?
फूलका के अनुसार, जगदीश टाइटलर, कमलनाथ और एचकेएल भगत — जिन पर दंगों में शामिल होने के आरोप लगे थे — उन्हें बाद में मंत्री पद की जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। यह आरोप लंबे समय से विवाद का विषय रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 30 मिनट पहले
  2. 23 घंटे पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले