दीपेंद्र हुड्डा को CWC से हटाने की मांग, सज्जन कुमार पर टिप्पणी से कांग्रेस में घमासान
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता और हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा ने 23 अगस्त 2026 को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर पार्टी नेता दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) से तत्काल हटाने की मांग की है। यह विवाद तब उठा जब दीपेंद्र हुड्डा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी करार दिए गए सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताया और उनके निधन को 'अपूरणीय क्षति' कहा।
मामले की पृष्ठभूमि
सज्जन कुमार, जो 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी थे और दो उम्रकैद की सज़ा काट रहे थे, का 20 अगस्त को 80 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में निधन हो गया। इसके बाद CWC के स्थायी आमंत्रित सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने उनकी प्रशंसा में बयान जारी किया, जिसने पार्टी के भीतर और सिख समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
कुलदीप शर्मा के आरोप
अपने पत्र में कुलदीप शर्मा ने लिखा, 'जब से CWC के स्थायी आमंत्रित सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने दिवंगत सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताते हुए उनके गुणों की प्रशंसा में बयान दिया है, तब से भारत के सिख समुदाय में नाराजगी है।' उन्होंने बताया कि हरियाणा और पंजाब में उनके सिख साथियों ने फोन कर इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।
पंजाब चुनाव पर संभावित असर
कुलदीप शर्मा ने चेतावनी दी कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह का बयान पार्टी की संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि किसान आंदोलन के बाद सिख समुदाय ने बड़ी संख्या में कांग्रेस का समर्थन किया था, और यह बयान उस विश्वास को तोड़ सकता है। उनके अनुसार, विपक्षी दल पहले से ही इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने में जुट गए हैं।
पार्टी की स्थिति और विरोधाभास
कुलदीप शर्मा ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस पार्टी ने पहले ही खुद को सज्जन कुमार से पूरी तरह अलग कर लिया था। ऐसे में दीपेंद्र हुड्डा का बयान पार्टी की आधिकारिक स्थिति के विपरीत है। उन्होंने लिखा, 'इस तरह के बचकाने और गैर-जिम्मेदाराना बयानों ने कांग्रेस को कमजोर किया है, खासकर उस समुदाय की नजरों में जो पंजाब में बहुत अहम है।'
आगे क्या होगा
कुलदीप शर्मा ने खड़गे से मांग की है कि दीपेंद्र हुड्डा को CWC से हटाकर पार्टी अपनी 'सच्ची मंशा' सामने रखे। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कांग्रेस पंजाब में सत्ता वापसी की कोशिश में है और देश-विदेश में रह रहे सिख समुदाय की भावनाएँ पार्टी के लिए निर्णायक मानी जाती हैं। खड़गे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।