सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताने पर पंजाब भाजपा का कांग्रेस पर हमला, सिख-विरोधी सोच का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 को कांग्रेस नेताओं के उन बयानों की कड़ी निंदा की, जिनमें 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दोषी और पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताया गया था। ढिल्लों ने कहा कि इस बयान ने एक बार फिर कांग्रेस की सिख-विरोधी मानसिकता को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार को सज्जन कुमार का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कुमार की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। उनके निधन के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा उन्हें 'रोल मॉडल' बताने वाले बयानों ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
ढिल्लों ने कहा कि 1984 के दंगों के 42 वर्ष बाद भी पीड़ित परिवारों के घाव नहीं भरे हैं। उनके अनुसार, ऐसे संवेदनशील समय में नरसंहार के मुख्य दोषी को 'रोल मॉडल' बताना पीड़ित परिवारों की दर्दनाक यादों को फिर से ताज़ा करने की निंदनीय कोशिश है।
उन्होंने माँग की कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) अपने नेताओं के इन गैर-जिम्मेदाराना बयानों के लिए पीड़ित परिवारों और समस्त सिख समुदाय से बिना शर्त माफी माँगे।
सज्जन कुमार का कानूनी इतिहास
सज्जन कुमार को 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली की पालम कॉलोनी के राज नगर पार्ट-I में पाँच सिख पुरुषों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने की घटनाओं में भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। यह हिंसा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद भड़की थी।
17 दिसंबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के 2013 के बरी करने वाले फैसले को पलटते हुए कुमार को आपराधिक साजिश और उकसाने का दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई। अपने ऐतिहासिक फैसले में अदालत ने 1984 की सिख-विरोधी हिंसा को 'मानवता के विरुद्ध अपराध' करार दिया था।
व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज़ है और 1984 के दंगों का मुद्दा आज भी सिख समुदाय की राजनीतिक संवेदनाओं के केंद्र में है। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे को कांग्रेस के विरुद्ध चुनावी और वैचारिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है।
आगे क्या
कांग्रेस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा के इस हमले के बाद पंजाब में राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है, विशेष रूप से सिख समुदाय से जुड़े संगठनों की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़रें टिकी हैं।