डीसा में एशिया के पहले डेजर्ट थीम जू को सीजेडए की मंजूरी, ₹542 करोड़ की परियोजना
सारांश
मुख्य बातें
बनासकांठा जिले के डीसा में प्रस्तावित एशिया के प्रथम डेजर्ट थीम आधारित जूलॉजिकल पार्क एवं ड्राइव थ्रू नाइट सफारी को सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) की औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। गुजरात वन विभाग द्वारा विकसित की जा रही इस ₹542.14 करोड़ की परियोजना का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई ऊँचाई देना है। यह मंजूरी उत्तर गुजरात के पर्यटन परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
परियोजना का विस्तार और विशेषताएँ
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि यह परियोजना जूना (पुराने) डीसा में लगभग 103 हेक्टेयर क्षेत्र में आकार लेगी और सीजेडए के दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है। परियोजना की अनुमानित लागत ₹542.14 करोड़ है।
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा, 'इस प्राणी संग्रहालय को एक आधुनिक संरक्षण सुविधा के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें लगभग 83 प्रजातियों के करीब 2,700 देशी एवं विदेशी पशु-पक्षियों को रखा जाएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीसा में बन रहा यह जू एशिया का पहला और विश्व का तीसरा डेजर्ट थीम जू होगा, साथ ही विश्व की चौथी नाइट सफारी भी।
नाइट सफारी और मुख्य आकर्षण
माली के अनुसार, परियोजना का केंद्रीय आकर्षण विश्व स्तरीय नाइट सफारी होगी, जहाँ आगंतुक सूर्यास्त के बाद विशेष रूप से निर्मित एन्क्लोजर में निशाचर प्राणियों को देख सकेंगे। इसमें एक अलग डे जू और नाइट सफारी के लिए पाँच समर्पित एन्क्लोजर होंगे।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि इस प्राणी संग्रहालय में चिंकारा, काला हिरण, भारतीय घुड़खर (जंगली गधा), एशियाटिक सिंह और तेंदुए जैसे प्राणी रखे जाएँगे। इसके अतिरिक्त अलग-अलग प्रजातियों के लिए एन्क्लोजर, पक्षीघर, सरीसृप घर, बटरफ्लाई पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, फूड कोर्ट, सॉवेनियर शॉप और गोल्फ कार्ट सेवा जैसी सुविधाएँ भी शामिल होंगी।
अंतरराष्ट्रीय और देशी वन्यजीव संग्रह
भारतीय मरुस्थल के प्राणियों में साही, डेजर्ट हेयर, भारतीय भेड़िया, कैराकल, लकड़बग्घा और भारतीय रेगिस्तानी लोमड़ी शामिल होंगे। अफ्रीकी रेगिस्तान के मुख्य आकर्षणों में अंगोलन जिराफ, ग्रेवीज़ ज़ेब्रा, सिमिटार ओरिक्स, ब्लैक राइनोसॉरस, अफ्रीकी चीता, अफ्रीकी शेर, चिंपैंजी और मीरकैट होंगे। ऑस्ट्रेलियाई रेगिस्तान का प्रतिनिधित्व कंगारू, एमू और वॉलाबी करेंगे। परियोजना के अन्य आकर्षणों में रेप्टाइल सफारी, रेन फॉरेस्ट बायोम और एक्वेरियम भी शामिल हैं।
पर्यावरणीय स्थिरता और हरित प्रौद्योगिकी
गांधीनगर वाइल्डलाइफ सर्कल की मुख्य वन संरक्षक आराधना साहू ने बताया कि पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम रखने के लिए परियोजना में वर्षाजल संचयन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, सोलर एनर्जी, स्थानीय वनस्पतियों का रोपण और ग्रीन बफर जोन जैसी हरित तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
पर्यटन सर्किट में महत्व और आगे की राह
बनासकांठा वाइल्डलाइफ डिवीजन के उप वन संरक्षक पोपटराव गारडी के अनुसार, वडनगर, अंबाजी और नडाबेट जैसे स्थापित पर्यटन स्थलों के साथ यह प्राणी संग्रहालय उत्तर गुजरात के टूरिज्म सर्किट में एक प्रमुख फ्लैगशिप डेस्टिनेशन बनेगा। यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, प्रजनन, रेस्क्यू, पुनर्वास और पर्यावरणीय शिक्षा के केंद्र के रूप में भी कार्य करेगी। सीजेडए की मंजूरी मिलने के बाद अब निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत का मार्ग प्रशस्त हो गया है।