दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 208 पहुंचा, सीएक्यूएम ने ग्रैप-1 लागू किया
सारांश
मुख्य बातें
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मंगलवार, 19 मई 2026 को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 208 के स्तर पर पहुंचने के बाद पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण की समस्त पाबंदियाँ तत्काल प्रभाव से लागू कर दीं। एक्यूआई का यह स्तर 'खराब' श्रेणी में आता है, जो सामान्य नागरिकों — विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों — के स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक माना जाता है।
ग्रैप-1 में क्या पाबंदियाँ लागू हुईं
सीएक्यूएम की सब-कमेटी ने निर्देश दिए हैं कि पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। इसके साथ ही निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अनिवार्य किए गए हैं और सड़कों की मशीनों से नियमित सफाई सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
सब-कमेटी ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मौसम पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया। अनुमान है कि आने वाले दिनों में हवा की गति कम रहने से प्रदूषण और बढ़ सकता है।
फ्लाइंग स्क्वॉड की कार्रवाई: 125 निरीक्षण, 39 उल्लंघन
सीएक्यूएम की फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों ने 29 अप्रैल से 19 मई के बीच कुल 125 निरीक्षण किए। इनमें 20 जांच निर्माण एवं ध्वस्तीकरण साइटों पर, 51 औद्योगिक क्षेत्रों में और 54 डीजल जनरेटर सेट से संबंधित थीं।
इन निरीक्षणों में कुल 39 उल्लंघन पाए गए — जिनमें 10 निर्माण एवं ध्वस्तीकरण साइटों से, 10 औद्योगिक इकाइयों से और 19 डीजल जनरेटर सेट से जुड़े थे। यह आँकड़े 131वीं प्रवर्तन कार्यबल बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में सामने आए।
सरकार की प्रतिक्रिया और दंडात्मक कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों ने कई सख्त कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। इनमें 7 इकाइयों/परियोजनाओं को बंद करना, 13 डीजल जनरेटर सेट सील करना, 12 कारण बताओ नोटिस जारी करना, 4 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाना और 3 मामलों में सलाह जारी करना शामिल है।
बयान के अनुसार, प्रस्तावित कार्रवाइयों में से 6 पहले ही पूरी की जा चुकी हैं, जबकि शेष प्रक्रिया में हैं। गौरतलब है कि नियमों का पालन सुनिश्चित होने के बाद अब तक 17 इकाइयों को दोबारा संचालन की अनुमति दी गई है — जिनमें 13 औद्योगिक इकाइयाँ और 4 निर्माण एवं ध्वस्तीकरण साइट शामिल हैं।
आम जनता पर असर
एक्यूआई का 208 का स्तर 'खराब' श्रेणी में आता है, जिसमें लंबे समय तक बाहर रहने पर सांस की तकलीफ, आँखों में जलन और हृदय संबंधी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस स्तर पर बुजुर्ग, बच्चे और दमा के मरीज बाहरी गतिविधियाँ सीमित रखें।
यह ऐसे समय में आया है जब मई में गर्मी और शुष्क हवाओं के कारण धूल का स्तर वैसे भी ऊँचा रहता है। दिल्ली में ग्रैप का यह सक्रियण मई माह में असामान्य नहीं है, लेकिन इस बार निरीक्षण अभियान की तीव्रता उल्लेखनीय है।
आगे क्या होगा
सीएक्यूएम की सब-कमेटी वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान की नियमित समीक्षा जारी रखेगी। यदि एक्यूआई 300 के पार जाता है, तो ग्रैप के अगले चरण — ग्रैप-2 — की पाबंदियाँ लागू की जा सकती हैं, जिनमें कुछ निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण रोक और भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल हैं।