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मेट्रो मंडे अभियान: विजेंद्र गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट स्टेशन से दिल्ली विधानसभा तक मेट्रो से तय किया सफर

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मेट्रो मंडे अभियान: विजेंद्र गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट स्टेशन से दिल्ली विधानसभा तक मेट्रो से तय किया सफर

सारांश

'मेट्रो मंडे' अब सिर्फ एक सरकारी संदेश नहीं — दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता समेत उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई मंत्री इसमें शामिल हो चुके हैं। PM मोदी के ईंधन संरक्षण आह्वान से प्रेरित यह पहल राजधानी में टिकाऊ शहरी परिवहन की दिशा में एक सामूहिक प्रयास बनती जा रही है।

मुख्य बातें

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 25 मई को 'मेट्रो मंडे' अभियान के तहत सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से दिल्ली विधानसभा तक मेट्रो से यात्रा की।
यात्रा के दौरान राजीव चौक पर ट्रेन बदली और सहयात्रियों से पर्यावरण-अनुकूल परिवहन पर संवाद किया।
'मेट्रो मंडे' दिल्ली सरकार की 'मेरा भारत, मेरा योगदान' मुहिम का हिस्सा है, जो PM मोदी के ईंधन बचाने के आह्वान से प्रेरित है।
अभियान में उपराज्यपाल टी.एस.
संधू , मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता , मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह , कपिल मिश्रा और आशीष सूद पहले ही भाग ले चुके हैं।
पहल का लक्ष्य दिल्ली में टिकाऊ शहरी गतिशीलता, यातायात जाम में कमी और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार, 25 मई को 'मेट्रो मंडे' अभियान में भाग लेते हुए तिलक मार्ग स्थित अपने आवास से दिल्ली विधानसभा तक की यात्रा दिल्ली मेट्रो के ज़रिए पूरी की। सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से यात्रा शुरू कर उन्होंने सहयात्रियों से बातचीत की और रोज़मर्रा के जीवन में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन अपनाने की अपील की। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन संरक्षण के आह्वान से प्रेरित है।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के बयान के अनुसार, गुप्ता ने राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन बदली और वहाँ से विधानसभा पहुँचे। इस दौरान उन्होंने यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के फायदे गिनाए और ईंधन बचाने की ज़िम्मेदारी को नागरिक कर्तव्य से जोड़ा।

'मेट्रो मंडे' दिल्ली सरकार की उस व्यापक मुहिम 'मेरा भारत, मेरा योगदान' का हिस्सा है, जो नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए चलाई जा रही है।

अभियान में कौन-कौन शामिल हुए

पिछले सोमवार से शुरू हुई इस मुहिम में दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी पहले ही भाग ले चुके हैं।

समाज कल्याण एवं एससी/एसटी/ओबीसी कल्याण मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह ने पिछले सप्ताह मेट्रो और फीडर बस सेवाओं का उपयोग कर दिल्ली सचिवालय तक यात्रा की। श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने भी मेट्रो और फीडर बस से सफर करते हुए कहा कि दिल्ली के नागरिक सार्वजनिक परिवहन और 'मेक इन इंडिया' पहलों को प्राथमिकता देकर प्रधानमंत्री की अपील का जवाब दे रहे हैं। शिक्षा मंत्री आशीष सूद को भी मेट्रो से यात्रा करते और यात्रियों से संवाद करते देखा गया।

अभियान का उद्देश्य

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी में टिकाऊ शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देना, यातायात जाम में कमी लाना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार आदतों में जन-भागीदारी सुनिश्चित करना है।

गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में चलाया जा रहा है जब ईंधन की कीमतें राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बनी हुई हैं और केंद्र सरकार ऊर्जा संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

आम जनता पर असर

यह पहल केवल सरकारी प्रतीकात्मकता तक सीमित नहीं है — इसका उद्देश्य दिल्ली के आम नागरिकों को भी हर सोमवार निजी वाहन छोड़कर मेट्रो या अन्य सार्वजनिक साधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है। यदि बड़े पैमाने पर अपनाया जाए, तो यह शहर के कार्बन उत्सर्जन और यातायात दबाव दोनों में उल्लेखनीय कमी ला सकता है।

क्या होगा आगे

'मेट्रो मंडे' अभियान आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, और दिल्ली सरकार इसे अन्य सरकारी विभागों तथा संस्थाओं तक विस्तारित करने की योजना बना रही है। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे इस मुहिम को अपनी साप्ताहिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली कसौटी यह होगी कि क्या यह सरकारी फोटो-ऑप से आगे बढ़कर नागरिकों की आदतें बदल पाती है। दिल्ली में निजी वाहनों की संख्या और प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है, और केवल सोमवार को मेट्रो लेने से संरचनात्मक बदलाव नहीं आएगा। इस अभियान की विश्वसनीयता तब बढ़ेगी जब सरकार मेट्रो कनेक्टिविटी, फीडर बस नेटवर्क और अंतिम-मील परिवहन में ठोस निवेश के आँकड़े सामने रखे। फिलहाल यह पहल राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दिखाती है, पर नीतिगत गहराई का इंतज़ार अभी बाकी है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मेट्रो मंडे' अभियान क्या है?
'मेट्रो मंडे' दिल्ली सरकार की एक साप्ताहिक पहल है, जिसके तहत हर सोमवार को मंत्री, अधिकारी और नागरिक निजी वाहन छोड़कर दिल्ली मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग करते हैं। यह 'मेरा भारत, मेरा योगदान' मुहिम का हिस्सा है और PM मोदी के ईंधन संरक्षण आह्वान से प्रेरित है।
विजेंद्र गुप्ता ने मेट्रो से कहाँ से कहाँ तक यात्रा की?
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 25 मई को सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन से यात्रा शुरू की, राजीव चौक पर ट्रेन बदली और दिल्ली विधानसभा पहुँचे। उनका आवास तिलक मार्ग पर स्थित है।
इस अभियान में दिल्ली के कौन-कौन से नेता शामिल हुए हैं?
अभियान में दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह, श्रम मंत्री कपिल मिश्रा और शिक्षा मंत्री आशीष सूद शामिल हो चुके हैं। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने 25 मई को इसमें भाग लिया।
'मेट्रो मंडे' का उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में टिकाऊ शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देना, यातायात जाम कम करना और नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाना है। अधिकारियों के अनुसार यह ईंधन संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता का व्यापक संदेश देती है।
क्या यह अभियान आगे भी जारी रहेगा?
'मेट्रो मंडे' हर सोमवार को जारी रहने की योजना है और दिल्ली सरकार इसे अन्य सरकारी विभागों तक विस्तारित करने पर विचार कर रही है। नागरिकों से इसे अपनी साप्ताहिक दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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