24 जुलाई 2026
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दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह दबोचा, 11 चोरी की बाइक और ऑटो-रिक्शा बरामद

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दिल्ली पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह दबोचा, 11 चोरी की बाइक और ऑटो-रिक्शा बरामद

सारांश

दिल्ली पुलिस ने महरौली में सक्रिय अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया। सरफराज और राहुल केशरवानी की गिरफ्तारी के साथ 11 चोरी की बाइक और एक ऑटो-रिक्शा बरामद हुआ। सीसीटीवी विश्लेषण और तकनीकी निगरानी से यह सफलता मिली।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई को अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया।
आरोपी सरफराज (महरौली, दिल्ली) और राहुल केशरवानी (अमेठी, उत्तर प्रदेश) गिरफ्तार।
आरोपियों के कब्जे से 11 चोरी की मोटरसाइकिलें और एक ऑटो-रिक्शा बरामद।
इस कार्रवाई से दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज 11 वाहन चोरी के मामले सुलझे।
गिरोह देर रात आवासीय कॉलोनियों में वाहन चुराकर पहचान बदलकर बेचता था।
दोनों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज।

दिल्ली पुलिस ने 24 जुलाई को महरौली क्षेत्र में सक्रिय एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 11 चोरी की मोटरसाइकिलें तथा वारदात में इस्तेमाल एक ऑटो-रिक्शा जब्त किया। इस कार्रवाई से दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज 11 वाहन चोरी के मामलों का एक साथ खुलासा हो गया है।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

बॉबी खान नामक व्यक्ति की शिकायत से इस पूरे मामले की कड़ी जुड़ी। उन्होंने छतरपुर पहाड़ी क्षेत्र से अपनी बजाज डिस्कवर मोटरसाइकिल चोरी होने की सूचना पुलिस को दी थी। शिकायत मिलते ही महरौली थाना पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की।

जाँच दल ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज का वैज्ञानिक विश्लेषण किया और स्थानीय स्तर पर गहन पूछताछ की। तकनीकी निगरानी और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने सीडीआर चौक के पास जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को रंगे हाथ दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में सरफराज, निवासी महरौली, दिल्ली, और राहुल केशरवानी, निवासी अमेठी, उत्तर प्रदेश, शामिल हैं। दोनों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरोह का अंतरराज्यीय स्वरूप इस बात से स्पष्ट होता है कि एक आरोपी दिल्ली का निवासी है जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश का।

गिरोह का तरीकावार

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई वाहन चोरी की वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उन्होंने बताया कि वे देर रात आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर बिना निगरानी खड़ी मोटरसाइकिलों और स्कूटियों को निशाना बनाते थे।

चोरी के बाद वाहनों को पहले सुनसान स्थानों पर छिपाया जाता था। इसके बाद उनकी पहचान बदलकर खरीदारों को बेच दिया जाता था, जिससे त्वरित नकदी मिल सके। वारदात को अंजाम देने के लिए गिरोह एक ऑटो-रिक्शा का उपयोग करता था, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और आगे की जाँच

दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से राजधानी में सक्रिय संगठित वाहन चोरी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। महरौली थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के वैज्ञानिक विश्लेषण, तकनीकी निगरानी और फील्ड इनपुट के समन्वय से यह सफलता हासिल की।

पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों तथा चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त में शामिल लोगों की तलाश कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में वाहन चोरी की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस नेटवर्क की है जो राज्य की सीमाएँ पार कर काम करता है। गिरोह का दिल्ली-उत्तर प्रदेश कनेक्शन दर्शाता है कि वाहन चोरी अब स्थानीय अपराध नहीं रही — यह संगठित अंतरराज्यीय व्यापार बन चुकी है। पुलिस की तकनीकी सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या चोरी के वाहन खरीदने वाली श्रृंखला तक भी जाँच पहुँचती है — क्योंकि माँग खत्म किए बिना आपूर्ति रोकना आधा काम है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस गिरोह का भंडाफोड़ किया है?
दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय वाहन चोर (ऑटो-लिफ्टर) गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और 11 चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
गिरफ्तार आरोपियों में सरफराज (निवासी महरौली, दिल्ली) और राहुल केशरवानी (निवासी अमेठी, उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। दोनों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वाहन चोर गिरोह किस तरह काम करता था?
गिरोह देर रात आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर बिना निगरानी खड़े वाहनों को निशाना बनाता था। चोरी के बाद वाहनों को सुनसान जगहों पर छिपाकर उनकी पहचान बदल दी जाती थी और फिर खरीदारों को बेच दिया जाता था।
पुलिस ने इस गिरोह को कैसे पकड़ा?
बॉबी खान की शिकायत के बाद महरौली थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज का वैज्ञानिक विश्लेषण और तकनीकी निगरानी शुरू की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सीडीआर चौक के पास जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई से कितने मामले सुलझे?
इस एक कार्रवाई से दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज 11 वाहन चोरी के मामले एक साथ सुलझ गए। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी के वाहन खरीदने वालों की तलाश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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