1 अक्टूबर 2026
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दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने ८ साल से फरार ३ घोषित अपराधी किए गिरफ्तार, हत्या से ड्रग तस्करी तक के मामले

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दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने ८ साल से फरार ३ घोषित अपराधी किए गिरफ्तार, हत्या से ड्रग तस्करी तक के मामले

सारांश

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने एक साथ तीन बड़ी गिरफ्तारियाँ कीं — हत्या दोषी अमजद ८ साल बाद राजस्थान से, हथियार तस्कर इमरान १० साल बाद मथुरा से, और ड्रग तस्कर राकेश बवाना से पकड़ा गया। तीनों अलग-अलग अदालतों द्वारा भगोड़ा घोषित थे।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने 1 अक्टूबर 2026 को ३ घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया, जो 8 से 10 वर्ष से फरार थे।
हत्या दोषी अमजद (43 वर्ष) को राजस्थान के तिजारा से गिरफ्तार किया गया; उस पर ₹50,000 का इनाम था।
हथियार तस्कर इमरान उर्फ एब्बार (34 वर्ष) को मथुरा, उत्तर प्रदेश से 27 सितंबर को पकड़ा गया।
ड्रग तस्कर राकेश कुमार (48 वर्ष) को बवाना, दिल्ली से गिरफ्तार किया गया; पटियाला हाउस कोर्ट ने 2018 में उसे भगोड़ा घोषित किया था।
तीनों गिरफ्तारियाँ अलग-अलग राज्यों में हुईं — राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 1 अक्टूबर 2026 को एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई में 8 वर्ष से अधिक समय से न्यायिक पकड़ से बाहर रहे तीन घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया। ये तीनों हत्या, अवैध हथियार तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे संगीन मामलों में वांछित थे। यह कार्रवाई दिल्ली के साथ-साथ राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर तक फैली।

पहली गिरफ्तारी: हत्या का दोषी अमजद

इंस्पेक्टर विनय पाल और इंस्पेक्टर मनोज कुमार की अगुवाई में, एसीपी आशीष कुमार की देखरेख में स्पेशल सेल की टीम ने उम्रकैद की सजा पाए अपराधी अमजद (उम्र 43 वर्ष, निवासी हथीन, पलवल, हरियाणा) को वक्फ बोर्ड की मस्जिद, बेगन हेरी, तिजारा, राजस्थान से मंगलवार को गिरफ्तार किया।

31 मई 2013 को दिल्ली के साकेत स्थित एक मदरसे के अंदर 12 वर्षीय एक बालक बेहोश अवस्था में मिला था। उसके मुँह और दोनों अंगूठों पर सफेद कपड़े की पट्टियाँ बंधी थीं, हालाँकि शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं थी। एम्स में उसे मृत घोषित किया गया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया।

आईपीसी की धारा 302 के तहत दर्ज इस मामले में अमजद को गिरफ्तार किया गया था और 4 सितंबर 2015 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। 9 दिसंबर से 16 दिसंबर 2015 तक दी गई सात दिन की अंतरिम जमानत समाप्त होने के बाद उसने सरेंडर नहीं किया। साकेत कोर्ट, दिल्ली ने 30 जनवरी 2017 को उसे भगोड़ा घोषित किया। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने उसकी गिरफ्तारी पर ₹50,000 का इनाम घोषित किया हुआ था।

दूसरी गिरफ्तारी: हथियार तस्कर इमरान उर्फ एब्बार उर्फ एब्बे

एसीपी विवेक त्यागी की देखरेख में इंस्पेक्टर पंकज चौहान और इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी की टीम ने अवैध हथियार तस्करी के मामले में 10 वर्ष से अधिक समय से फरार इमरान उर्फ एब्बार उर्फ एब्बे (उम्र 34 वर्ष, निवासी बागर खादर, नगला उतावर बुखारी, मथुरा, उत्तर प्रदेश) को 27 सितंबर को उसके गृहनगर से गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि 25 दिसंबर 2014 को सराय काले खां बस स्टैंड, दिल्ली से तीन आरोपियों — सलामुद्दीन, इस्ताक और भीला सिंह — को पकड़ा गया था। इनसे कुल 10 देसी पिस्तौलें बरामद की गई थीं। जाँच में सामने आया कि मध्य प्रदेश के रहने वाले राजपाल ने इमरान के निर्देश पर भीला सिंह को अवैध हथियारों की खेप पहुँचाई थी।

तीसरी गिरफ्तारी: ड्रग तस्कर राकेश कुमार

स्पेशल सेल/एनडीआर की टीम ने — जो एसीपी आशीष कुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर विनय पाल और इंस्पेक्टर मनोज के नेतृत्व में काम कर रही थी — अंतर-राज्यीय ड्रग तस्कर राकेश कुमार (उम्र 48 वर्ष, निवासी चिड़ावा, झुंझुनू, राजस्थान) को बुधवार को अस्थल कॉलोनी, बवाना, दिल्ली से गिरफ्तार किया। पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली ने 2018 में उसे भगोड़ा घोषित किया था।

3 फरवरी 2011 को गुप्त सूचना के आधार पर स्पेशल सेल की टीम ने सरिता विहार मेट्रो स्टेशन के निकट राकेश कुमार और शकील को पकड़ा था। तब राकेश के पास से एक देसी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए थे। वह हाईवे लुटेरों के एक गिरोह का सदस्य था और आर्म्स एक्ट के तहत उसके विरुद्ध मामला दर्ज हुआ था।

कार्रवाई का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध अभियान तेज कर रही है। तीनों गिरफ्तारियाँ अलग-अलग राज्यों — राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली — में हुईं, जो इस कार्रवाई की बहु-राज्यीय समन्वय क्षमता को दर्शाती हैं। अधिकारियों के अनुसार तीनों आरोपियों को संबंधित अदालतों में पेश किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि उम्रकैद की सजा पाया अपराधी आठ साल तक न्यायिक निगरानी से कैसे बचा रहा। अमजद का मामला विशेष रूप से चिंताजनक है — अदालत द्वारा दी गई अंतरिम जमानत के बाद फरार होना और फिर इतने वर्षों तक राजस्थान में छिपे रहना, जमानत प्रणाली की निगरानी खामियों की ओर इशारा करता है। देरी से हुई गिरफ्तारी पीड़ित पक्ष के लिए न्याय में विलंब का प्रतीक भी है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने किसे-किसे गिरफ्तार किया?
स्पेशल सेल ने तीन घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया — हत्या दोषी अमजद (43 वर्ष, हरियाणा), हथियार तस्कर इमरान उर्फ एब्बार (34 वर्ष, मथुरा, यूपी), और ड्रग तस्कर राकेश कुमार (48 वर्ष, झुंझुनू, राजस्थान)। तीनों 8 से 10 वर्ष से फरार थे।
अमजद पर क्या मामला दर्ज था और उसे कब सज़ा मिली थी?
अमजद को 2013 में दिल्ली के साकेत में एक 12 वर्षीय बालक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। 4 सितंबर 2015 को उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन अंतरिम जमानत समाप्त होने के बाद उसने सरेंडर नहीं किया और 30 जनवरी 2017 को उसे भगोड़ा घोषित किया गया।
इमरान उर्फ एब्बार का हथियार तस्करी मामला क्या था?
25 दिसंबर 2014 को सराय काले खां बस स्टैंड से पकड़े गए तीन आरोपियों के पास से 10 देसी पिस्तौलें बरामद हुई थीं। जाँच में सामने आया कि इमरान ने मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति के जरिये यह अवैध हथियारों की खेप सप्लाई करवाई थी। वह 10 वर्ष से अधिक समय से फरार था।
राकेश कुमार को भगोड़ा कब घोषित किया गया था?
पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली ने 2018 में राकेश कुमार को भगोड़ा घोषित किया था। वह हाईवे लुटेरों के गिरोह का सदस्य था और 3 फरवरी 2011 को सरिता विहार मेट्रो स्टेशन के पास से उसके पास देसी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
इन गिरफ्तारियों में स्पेशल सेल के कौन-से अधिकारी शामिल थे?
एसीपी आशीष कुमार और एसीपी विवेक त्यागी की देखरेख में इंस्पेक्टर विनय पाल, इंस्पेक्टर मनोज कुमार, इंस्पेक्टर पंकज चौहान और इंस्पेक्टर सुरेश चौधरी की टीमों ने ये तीनों गिरफ्तारियाँ की। कार्रवाई तीन अलग-अलग राज्यों में समन्वित रूप से की गई।
राष्ट्र प्रेस
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