10 अगस्त 2026
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दिल्ली एसआईआर 2025: कांग्रेस ने बीएलओ बैठक में चेताया — 'यूपी-बिहार जैसी वोटर लिस्ट गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं'

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दिल्ली एसआईआर 2025: कांग्रेस ने बीएलओ बैठक में चेताया — 'यूपी-बिहार जैसी वोटर लिस्ट गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं'

सारांश

30 जून से दिल्ली में लागू होने वाली एसआईआर प्रक्रिया से पहले कांग्रेस ने अपने बूथ एजेंटों को सक्रिय कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि यूपी-बिहार में बड़े पैमाने पर वोटर नाम काटे गए — और वह दिल्ली में इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र खड़ा कर रही है।

मुख्य बातें

10 जून 2025 को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में बीएलओ प्रशिक्षण बैठक आयोजित हुई।
DPCC अध्यक्ष देवेंद्र यादव , राजेश लिलोठिया और पूर्व विधायक अब्दुल रहमान शामिल हुए।
दिल्ली में 30 जून 2025 से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होगी — यह 25 वर्षों के बाद दोबारा लागू हो रही है।
कांग्रेस ने हज़ारों बूथ एजेंट सक्रिय किए; 13 प्रकार के दस्तावेज़ों से मतदाता पंजीकरण संभव बताया।
पार्टी ने यूपी-बिहार में कथित मतदाता नाम कटौती का हवाला देते हुए दिल्ली में ऐसी स्थिति न आने देने की चेतावनी दी।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 10 जून 2025 को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) प्रशिक्षण बैठक आयोजित की, जो 30 जून से शुरू होने वाली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया की तैयारी के तहत बुलाई गई थी। बैठक में पार्टी नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश और बिहार में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हुई मतदाता नाम कटौती जैसी स्थिति दिल्ली में नहीं बनने दी जाएगी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस प्रशिक्षण सत्र में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेंद्र यादव, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीमापुरी प्रत्याशी राजेश लिलोठिया, तथा पूर्व सीलमपुर विधायक अब्दुल रहमान ने भाग लिया। बैठक का केंद्रीय एजेंडा एसआईआर के दौरान वोटर सहायता, दस्तावेज़ी प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं पर चर्चा करना था।

लिलोठिया की चेतावनी — यूपी-बिहार का हवाला

राजेश लिलोठिया ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि दिल्ली में ऐसी कोई अनियमितता न हो। पार्टी के बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट) अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची की गहन जाँच कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।

लिलोठिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम 2002 की मतदाता सूची में नहीं था, लेकिन उसके माता-पिता का नाम उसमें दर्ज है, तो अन्य दस्तावेज़ों के आधार पर पंजीकरण संभव है। उन्होंने बताया कि लगभग 13 प्रकार के दस्तावेज़ों में से किसी एक या दो के आधार पर वोटर आईडी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

देवेंद्र यादव का बयान — हज़ारों बूथ एजेंट सक्रिय

DPCC अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी एसआईआर को लेकर पहले से ही पूरी तैयारी कर चुकी है और दिल्ली भर में हज़ारों बूथ एजेंट सक्रिय किए जा चुके हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि उस पर चुनावों के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर के प्रयास के आरोप लगते रहे हैं — हालाँकि BJP ने इन आरोपों को अस्वीकार किया है।

यादव ने यह भी रेखांकित किया कि एसआईआर की यह प्रक्रिया लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद दोबारा लागू की जा रही है, जो इसे असाधारण रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सुनिश्चित करेगी कि मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी रहे और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।

आम मतदाताओं पर असर

नेताओं ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे बूथ स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएँ और हर पात्र नागरिक को मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया की सही जानकारी दें। वोट कटिंग या नाम हटाने की किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया गया। गौरतलब है कि दिल्ली में अल्पसंख्यक और प्रवासी आबादी बहुल क्षेत्रों में मतदाता सूची की शुद्धता हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रही है।

आगे क्या होगा

30 जून 2025 से दिल्ली में एसआईआर की औपचारिक शुरुआत होगी। कांग्रेस के बूथ एजेंट इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे और किसी भी अनियमितता की सूचना चुनाव आयोग (ECI) को देने के लिए तैयार हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य विपक्षी दल भी इसी तरह की निगरानी व्यवस्था खड़ी करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बूथ-स्तरीय निगरानी वास्तव में संस्थागत पारदर्शिता की जगह ले सकती है। यूपी और बिहार में मतदाता नाम कटौती के आरोप वर्षों से उठते रहे हैं, पर उनकी स्वतंत्र जाँच शायद ही कभी निर्णायक रही है। 25 साल बाद लागू हो रही एसआईआर प्रक्रिया में चुनाव आयोग की भूमिका और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए — न कि केवल दलगत निगरानी पर। दिल्ली की बहुस्तरीय जनसंख्या संरचना को देखते हुए, यह प्रक्रिया जितनी तकनीकी है, उतनी ही राजनीतिक भी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक चुनावी प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची की व्यापक जाँच और अद्यतन किया जाता है। दिल्ली में यह 30 जून 2025 से शुरू होगी और लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद दोबारा लागू हो रही है।
कांग्रेस को दिल्ली एसआईआर से क्या आपत्ति है?
कांग्रेस को एसआईआर से सैद्धांतिक आपत्ति नहीं है, बल्कि उसकी चिंता यह है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से न हटाए जाएँ। पार्टी ने उत्तर प्रदेश और बिहार में कथित बड़े पैमाने पर नाम कटौती का हवाला देते हुए दिल्ली में ऐसी स्थिति रोकने की चेतावनी दी है।
कांग्रेस ने एसआईआर के लिए क्या तैयारी की है?
कांग्रेस ने दिल्ली भर में हज़ारों बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-2) सक्रिय किए हैं जो मतदाता सूची की निगरानी करेंगे। 10 जून को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में बीएलओ प्रशिक्षण बैठक आयोजित कर कार्यकर्ताओं को दस्तावेज़ी प्रक्रिया और पंजीकरण की जानकारी दी गई।
मतदाता पंजीकरण के लिए कौन-से दस्तावेज़ मान्य हैं?
राजेश लिलोठिया के अनुसार, लगभग 13 प्रकार के दस्तावेज़ों में से किसी एक या दो के आधार पर वोटर आईडी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति का नाम 2002 की सूची में नहीं था लेकिन माता-पिता का नाम है, तो अन्य दस्तावेज़ों के आधार पर पंजीकरण संभव है।
दिल्ली एसआईआर प्रक्रिया कब तक चलेगी और आगे क्या होगा?
एसआईआर 30 जून 2025 से शुरू होगी। कांग्रेस के बूथ एजेंट पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे और किसी भी अनियमितता की सूचना चुनाव आयोग (ECI) को देने के लिए तैयार हैं।
राष्ट्र प्रेस
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