दिल्ली में घरों में स्मोक डिटेक्टर-स्प्रिंकलर अनिवार्य करने की सिफारिश, तुगलकाबाद आग में 3 की मौत के बाद फायर सर्विस सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने 13 जून 2026 को बताया कि विभाग ने दिल्ली सरकार को आवासीय भवनों में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य करने का औपचारिक प्रस्ताव भेज दिया है। यह कदम दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में एक पाँच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग के बाद उठाया गया है, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई और 5 अन्य घायल हुए।
तुगलकाबाद अग्निकांड: क्या हुआ उस रात
11-12 जून की रात लगभग 2:25 बजे फायर कंट्रोल रूम को तुगलकाबाद स्थित एक इमारत में आग की सूचना मिली। एक साथ कई कॉल आने पर स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए तत्काल 8 फायर टेंडर और एक असिस्टेंट डिविजनल ऑफिसर घटनास्थल के लिए रवाना किए गए।
चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक के अनुसार, आग की शुरुआत इमारत के भूतल से हुई और तेज़ी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। घने धुएँ के कारण ऊपरी मंजिलों पर रह रहे कई लोग इमारत में फँस गए। बचाव दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन 3 लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। अधिकारियों के अनुसार, समय पर बचाव अभियान न होता तो हताहतों की संख्या और अधिक हो सकती थी।
स्प्रिंकलर सिस्टम से 97% तक कम हो सकती है क्षति
मलिक ने कहा कि यदि आवासीय इमारतों में स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाए जाएँ, तो आग से होने वाली क्षति और दुर्घटनाओं में 97 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि विकसित देशों में ऐसी व्यवस्थाएँ पहले से लागू हैं और इससे जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है। विभाग का यह प्रस्ताव अब दिल्ली सरकार के विचाराधीन है।
गर्मियों में बढ़ता है आग का खतरा
चीफ फायर ऑफिसर ने बताया कि उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान अत्यधिक तापमान और कम नमी के कारण आग लगने की घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। लोग लंबे समय तक एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग करते हैं, लेकिन उनके रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इससे बिजली का लोड बढ़ता है और घरेलू वायरिंग तथा सर्किट सुरक्षा प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाती, जिसके परिणामस्वरूप ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएँ पैदा होती हैं।
जीपीएस-इनेबल्ड ऐप से बदलेगी आपातकालीन प्रतिक्रिया
दिल्ली फायर सर्विस एक जीपीएस-इनेबल्ड फायर डिपार्टमेंट ऐप विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वर्तमान में फायर टेंडरों की तैनाती काफी हद तक मैनुअल सिस्टम पर निर्भर है। नई प्रणाली में आग की सूचना मिलते ही कॉलर की लोकेशन स्वतः दर्ज हो जाएगी और सॉफ्टवेयर निकटतम उपलब्ध फायर टेंडरों को तुरंत रवाना करेगा।
इस व्यवस्था में सभी फायर टेंडरों की रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग होगी। सूचना देने वाले व्यक्ति को ऐप के ज़रिए यह भी पता चलेगा कि फायर टेंडर कहाँ तक पहुँचा है और कितनी देर में घटनास्थल पर पहुँचेगा। मलिक ने बताया कि इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा।
आगे क्या होगा
दिल्ली सरकार को भेजे गए प्रस्ताव पर निर्णय अपेक्षित है। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में गर्मियों के मौसम में आग की घटनाएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि स्प्रिंकलर और स्मोक डिटेक्टर अभी तक केवल व्यावसायिक और उच्च-वृद्धि भवनों में ही अनिवार्य हैं — आवासीय भवनों में इनकी अनिवार्यता एक नई नीतिगत दिशा होगी।