मालवीय नगर अग्निकांड: अतिक्रमण और एक ही निकास बना बड़ी वजह, बोले पूर्व फायर निदेशक अतुल गर्ग
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के मालवीय नगर में 3 जून को सुबह करीब 9:00 बजे एक रेस्तरां में लगी भीषण आग के दौरान दिल्ली फायर सर्विसेज को राहत और बचाव अभियान में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में फैले अतिक्रमण, संकरी गलियों और पानी की कमी ने दमकल गाड़ियों की आवाजाही और रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद कठिन बना दिया।
रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौतियाँ
दिल्ली फायर सर्विसेज के पूर्व निदेशक अतुल गर्ग ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि शुरुआत में 7 से 8 दमकल गाड़ियाँ घटनास्थल पर भेजी गई थीं, जिनकी संख्या बाद में बढ़ाकर 20 से अधिक कर दी गई। उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन बहुत मुश्किल था क्योंकि यह क्षेत्र भीड़भाड़ वाला है, जिससे यह वाहनों के लिए दुर्गम हो गया है।’
गर्ग के अनुसार, वाहन पार्किंग, अतिक्रमण और मौके पर उपलब्ध पानी की कमी जैसे मुद्दों ने राहत कार्य की रफ्तार को धीमा किया। दमकलकर्मियों को घटनास्थल तक पहुँचने के लिए संकरी गलियों से जूझना पड़ा।
आग नहीं, धुआँ बना मुख्य वजह
गर्ग ने बताया कि अधिकांश मौतें आग से नहीं, बल्कि धुएँ के कारण हुईं। आग जिस रेस्तरां में लगी, वह उस वक़्त बंद था और अंदर कुछ लोग सो रहे थे। उन्होंने कहा, ‘उन्हें लोग सोए हुए मिले, जिनकी दुर्भाग्य से मृत्यु हो गई। धीरे-धीरे आग फैल गई। इस वजह से इतना नुकसान हुआ।’
उन्होंने आगे जोड़ा कि इस तरह की इमारतें ‘चिमनी की तरह काम करती हैं, जिससे गर्मी बहुत तेज़ी से फैलती है,’ और लोगों के पास बाहर निकलने का समय नहीं बचता।
लाइसेंस और सुरक्षा मानकों पर सवाल
पूर्व निदेशक के मुताबिक, ‘ऐसा लगता है कि इमारत उचित लाइसेंस के बिना चल रही थी, जो एक बहुत ही गंभीर मामला है, जिसके लिए कार्रवाई की आवश्यकता है।’ उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी होटल, गेस्ट हाउस या व्यावसायिक इमारत के लिए दो निकास अनिवार्य सुरक्षा शर्त है, ताकि आपात स्थिति में लोग बाहर निकल सकें।
इस इमारत में केवल एक ही निकास था और धुएँ की वजह से अंदर मौजूद लोग बेहोश होकर भागने में असमर्थ हो गए।
सरकार की प्रतिक्रिया और जाँच
दिल्ली फायर सर्विसेज के पीआरओ एके मलिक ने बताया कि दिल्ली सरकार के मंत्री ने घटनास्थल का दौरा किया। संबंधित डीसी और एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसी सभी इमारतों — चाहे वे अवैध रूप से बनाई जा रही हों, अवैध रूप से चल रही हों या लाइसेंसिंग अनियमितताओं से जुड़ी हों — का तुरंत निरीक्षण किया जाए।
मलिक ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है। उन्होंने कहा, ‘हमने अंतिम तलाशी ले ली है और पूरी इमारत दिल्ली पुलिस को हैंडओवर कर दी है।’
आगे क्या
गर्ग और मलिक दोनों के बयानों के बाद राजधानी में अवैध निर्माण, बिना लाइसेंस चल रहे प्रतिष्ठानों और अग्नि-सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर बहस तेज़ हो गई है। निरीक्षण अभियान से यह तय होगा कि मालवीय नगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में कितनी इमारतें इन्हीं जोखिमों के बीच चल रही हैं।