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धर्मेंद्र प्रधान का ममता पर तीखा हमला: 'बंगाल में लोकतंत्र बंदूक की नोक पर', BJP ने जीतीं 206 सीटें

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धर्मेंद्र प्रधान का ममता पर तीखा हमला: 'बंगाल में लोकतंत्र बंदूक की नोक पर', BJP ने जीतीं 206 सीटें

सारांश

पश्चिम बंगाल में BJP की 206 सीटों की ऐतिहासिक जीत के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे 'बंदूक की नोक पर लोकतंत्र' करार देते हुए संवैधानिक जवाबदेही की माँग की — TMC के 15 साल के शासन के अंत की यह पटकथा अभी पूरी नहीं हुई।

मुख्य बातें

धर्मेंद्र प्रधान ने 6 मई को एक्स पर पोस्ट कर ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार को 'बंगाल में लोकतंत्र बंदूक की नोक पर' बताया।
BJP ने 293 घोषित सीटों में से 206 सीटें जीतीं; TMC केवल 81 सीटों पर सिमटी।
ममता बनर्जी भवानीपुर सीट पर BJP के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक वोटों से हारीं।
फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान निर्धारित; 294 सदस्यीय सदन में बहुमत का आँकड़ा 148 ।
BJP की जीत से पश्चिम बंगाल में TMC के 15 वर्षों के शासन का अंत होना तय।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार, 6 मई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की उस "हठधर्मिता" पर कड़ा प्रहार किया, जिसमें उन्होंने निवर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में राज्यपाल को स्वेच्छा से इस्तीफा सौंपने से साफ इनकार कर दिया। प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जनादेश को नकारना इस बात का प्रमाण है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखा जा रहा है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में निर्णायक बहुमत के साथ सरकार बनाने की कगार पर है।

चुनावी नतीजे और राजनीतिक उलटफेर

294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा 148 है। सोमवार को 293 निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम घोषित किए गए, जबकि दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान निर्धारित है। घोषित परिणामों में BJP ने 206 सीटें हासिल कीं, जबकि TMC केवल 81 सीटों पर सिमट गई। सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर सीट पर देखा गया, जहाँ ममता बनर्जी BJP के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गईं। इस जीत के साथ BJP राज्य में TMC के 15 वर्षों के शासन का अंत करने की स्थिति में है।

धर्मेंद्र प्रधान के तीखे बोल

प्रधान ने एक्स पर लिखा, "बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखा जा रहा है और चुनावी नतीजों को मानने से इनकार करना इस वास्तविकता को उजागर करता है। जनादेश को जनता की आवाज़ की बजाय ऐसे सुझावों की तरह माना जा रहा है जिन्हें अस्वीकार किया जा सकता है।" उन्होंने आगे कहा कि ममता बनर्जी न केवल जनता के जनादेश को नकार रही हैं, बल्कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और सुरक्षा बलों जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी धूमिल करने का प्रयास कर रही हैं।

शासन व्यवस्था पर सवाल

प्रधान के अनुसार, बंगाल लंबे समय से एक ऐसे शासन मॉडल के अधीन रहा है जो "धमकी, सिंडिकेट नेटवर्क और गहरे राजनीतिक संरक्षण" से चिह्नित है। उन्होंने कहा, "सच्चा लोकतंत्रवादी जनता के सामने झुकता है। तानाशाह जनता की परवाह किए बिना सत्ता से चिपके रहता है।" गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब BJP ने बंगाल में TMC के शासन पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया हो।

संवैधानिक जवाबदेही की माँग

प्रधान ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान शासन में हठधर्मिता को सद्गुण नहीं मानता। उन्होंने कहा, "जवाबदेही अनिवार्य है और जनादेश पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। बंगाल का जनादेश डर की अस्वीकृति, जबरदस्ती की अस्वीकृति और जवाबदेही की माँग है।" उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया और ममता के राजनीतिक भविष्य पर सवाल गहरे होते जा रहे हैं।

आगे की राह

फाल्टा सीट पर 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान के बाद अंतिम तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी, हालाँकि BJP का बहुमत पहले ही सुनिश्चित हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ममता बनर्जी का अगला कदम — चाहे वे विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाएँ या किसी अन्य सीट से उपचुनाव लड़ें — TMC के भविष्य की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा विरोधाभास भी छुपा है — BJP खुद बंगाल में चुनाव-पूर्व हिंसा के आरोपों से घिरी रही है, और 'लोकतांत्रिक जवाबदेही' की माँग तब अधिक विश्वसनीय लगती जब केंद्र में भी विपक्ष को समान मंच मिलता। ममता का इस्तीफे से इनकार संवैधानिक रूप से विवादास्पद है — परंपरा यही कहती है कि बहुमत खोने पर मुख्यमंत्री को त्यागपत्र देना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या TMC इस हार को स्वीकार कर लोकतांत्रिक विपक्ष की भूमिका निभाएगी, या सत्ता से चिपके रहने की कोशिश में संस्थाओं को और कमज़ोर करेगी — यही बंगाल की राजनीति की असली परीक्षा है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धर्मेंद्र प्रधान ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी चुनावी जनादेश को नकार रही हैं और भारतीय चुनाव आयोग तथा सुरक्षा बलों जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता धूमिल करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने इसे 'बंगाल में लोकतंत्र को बंदूक की नोक पर रखना' बताया।
पश्चिम बंगाल चुनाव में BJP को कितनी सीटें मिलीं?
घोषित 293 सीटों में BJP ने 206 सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ TMC केवल 81 सीटों पर सिमट गई। 294 सदस्यीय सदन में बहुमत का आँकड़ा 148 है, जो BJP ने स्पष्ट रूप से पार कर लिया है।
ममता बनर्जी भवानीपुर सीट पर क्यों हारीं?
ममता बनर्जी भवानीपुर सीट पर BJP के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गईं। यह हार उनके लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से बड़ा झटका मानी जा रही है।
फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान कब होगा?
दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान निर्धारित है। इस एक सीट के नतीजे से BJP के कुल बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा?
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, बहुमत खो देने वाले दल के नेता को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए। ममता बनर्जी ने इस्तीफे से इनकार किया है, जिसे BJP ने लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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