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डेरेक ओ'ब्रायन ने PM मोदी को लिखा पत्र: परिसीमन और FCRA विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग

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डेरेक ओ'ब्रायन ने PM मोदी को लिखा पत्र: परिसीमन और FCRA विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग

सारांश

TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने PM मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन और FCRA संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक की माँग की है। FCRA को 'दमनकारी' बताते हुए उन्होंने 54,000 शैक्षणिक संस्थानों और 6 करोड़ छात्रों पर पड़ने वाले असर की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने 19 जुलाई 2026 को PM मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक की माँग की।
पत्र में परिसीमन विधेयक और FCRA संशोधन विधेयक — दोनों पर व्यापक विचार-विमर्श की अपील की गई।
FCRA संशोधन को 'दमनकारी' बताया; आशंका कि इससे ईसाई समुदाय के 54,000 शैक्षणिक संस्थान और 6 करोड़ छात्र प्रभावित होंगे।
16-17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश परिसीमन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने से पारित नहीं हो पाया था।
ओ'ब्रायन ने 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक का उदाहरण देकर पूरक कार्यसूची के दुरुपयोग पर आपत्ति जताई।
संविधान के अनुच्छेद 19 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा की माँग की गई।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने 19 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयक और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। ओ'ब्रायन ने FCRA संशोधन विधेयक को 'दमनकारी' करार देते हुए सरकार की मंशा और संसदीय प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाई हैं।

पत्र में उठाई गई मुख्य माँगें

ओ'ब्रायन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि आगामी मानसून सत्र की सरकारी कामकाज की सूची में परिसीमन से संबंधित कोई विधेयक अभी शामिल नहीं है। बावजूद इसके, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का रिकॉर्ड रहा है, जिसके कारण विपक्ष उसकी मंशा को लेकर आशंकित है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई अहम विधेयकों को अंतिम समय में पूरक कार्यसूची में शामिल कर सांसदों के सामने रखा गया।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन का हवाला

टीएमसी सांसद ने वर्ष 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक का उदाहरण दिया, जिसके ज़रिए राज्य का दर्जा समाप्त किया गया था। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरक कार्यसूची में उस समय जोड़ा गया जब सांसदों को इसकी सूचना विधेयक पेश होने के कुछ ही मिनट पहले मिली — जिसे उन्होंने संसदीय प्रक्रिया के विरुद्ध बताया। ओ'ब्रायन ने सरकार से आग्रह किया कि परिसीमन और FCRA संशोधन के मामले में ऐसी कार्यप्रणाली न दोहराई जाए।

परिसीमन विधेयक का पृष्ठभूमि संदर्भ

ओ'ब्रायन ने याद दिलाया कि 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक लोकसभा में पेश किए थे। हालाँकि, 17 अप्रैल को ये विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सके और पारित नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि परिसीमन देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संघीय ढाँचे से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है, और ऐसे विधेयक को लाने में पूरी पारदर्शिता अपेक्षित है।

FCRA संशोधन से शिक्षा संस्थानों पर संभावित असर

FCRA संशोधन विधेयक पर चिंता जताते हुए ओ'ब्रायन ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दशकों से सेवारत संस्थाओं को कमज़ोर कर सकता है। उनके अनुसार, इससे देशभर में ईसाई समुदाय द्वारा संचालित लगभग 54,000 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हो सकते हैं, जहाँ हर वर्ष करीब 6 करोड़ छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं।

संवैधानिक अधिकारों की दुहाई

ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन सरकार को विभिन्न सामाजिक संस्थाओं पर अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण का अधिकार देगा, जिससे वंचित वर्गों के लिए काम करने वाले कई प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संगठन प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 26 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकार की ओर से इस पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है; मानसून सत्र की शुरुआत के साथ यह विषय संसद में केंद्रीय बहस का मुद्दा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 संस्थानों का आँकड़ा ध्यान खींचने वाला है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार संसद में बहुमत के बिना इन विधेयकों को आगे बढ़ाने का जोखिम उठाएगी, या मानसून सत्र एक और टकराव का मंच बनेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डेरेक ओ'ब्रायन ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने PM मोदी से परिसीमन विधेयक और FCRA संशोधन विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की है। उनका कहना है कि ये दोनों विधेयक लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से सीधे जुड़े हैं और बिना व्यापक सहमति के पारित नहीं होने चाहिए।
FCRA संशोधन विधेयक को 'दमनकारी' क्यों कहा जा रहा है?
ओ'ब्रायन के अनुसार, प्रस्तावित FCRA संशोधन सरकार को सामाजिक संस्थाओं पर अत्यधिक प्रशासनिक नियंत्रण देगा। इससे ईसाई समुदाय द्वारा संचालित लगभग 54,000 शैक्षणिक संस्थान प्रभावित हो सकते हैं, जहाँ हर साल करीब 6 करोड़ छात्र पढ़ते हैं।
परिसीमन विधेयक पहले कब पेश किया गया था और क्या हुआ?
केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश किए थे। 17 अप्रैल को ये विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सके।
ओ'ब्रायन ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक का उदाहरण क्यों दिया?
उन्होंने 2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक का हवाला देते हुए बताया कि उसे पूरक कार्यसूची में तब शामिल किया गया जब सांसदों को विधेयक पेश होने के कुछ मिनट पहले ही जानकारी मिली थी। उनका कहना है कि परिसीमन और FCRA विधेयकों के साथ ऐसी कार्यप्रणाली नहीं अपनाई जानी चाहिए।
इन विधेयकों से संविधान के किन अधिकारों पर असर पड़ सकता है?
ओ'ब्रायन ने कहा कि FCRA संशोधन से संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार) के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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