दिग्विजय सिंह का CM मोहन यादव को पत्र: MP में 36.99 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग अटकी, किसान-मिलर्स-सरकार सभी को नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 24 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य में उपार्जित धान की मिलिंग में हो रही गंभीर देरी की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि इस देरी से किसान, राइस मिलर्स और राज्य सरकार — तीनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मिलिंग की स्थिति: आँकड़े क्या बताते हैं
जिला कांग्रेस कमेटी रीवा (ग्रामीण) के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के हवाले से दिग्विजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश में किसानों से लगभग 51.54 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया था। इसमें से अब तक केवल 14.49 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग हो सकी है, जबकि 36.99 लाख मीट्रिक टन धान अभी भी मिलिंग की प्रतीक्षा में है।
उपार्जन केंद्रों से धान सीधे मिलर्स को देने के बजाय बड़ी मात्रा में धान का भंडारण वेयरहाउस एवं खुले स्थानों पर किया गया, जिसे इस देरी का प्रमुख कारण बताया गया है।
गुणवत्ता और सार्वजनिक वितरण पर मंडराता खतरा
पत्र में आशंका व्यक्त की गई है कि मिलिंग में और अधिक देरी होने से धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए आवश्यक चावल की समय पर उपलब्धता पर भी संकट आ सकता है। यह ऐसे समय में चिंताजनक है जब देश के कई हिस्सों में खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला पहले से दबाव में है।
सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ की आशंका
राजेन्द्र शर्मा के अनुसार, पूर्व में शासन द्वारा वेयरहाउस से मिलर्स तक धान पहुँचाने के लिए लगभग ₹95 प्रति क्विंटल की दर से परिवहन व्यय वहन किया गया, जिस पर करीब ₹475 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। यदि अब पुनः धान का परिवहन करना पड़ा, तो राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार आ सकता है।
दिग्विजय सिंह की माँग
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि किसानों, मिलर्स और राज्य सरकार के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले का तत्काल निराकरण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों को उपार्जित धान शीघ्र मिलर्स को मिलिंग के लिए उपलब्ध कराने के समुचित निर्देश दिए जाएँ।
आगे क्या होगा
फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि धान उपार्जन और मिलिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता मध्य प्रदेश में हर सीज़न एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनती है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस माँग पर कितनी तेज़ी से कदम उठाती है और बची हुई 36.99 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग कब तक पूरी होती है।