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यूपी में 'एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी': 5 स्मारक मित्र चुने गए, 26 और स्थलों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित

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यूपी में 'एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी': 5 स्मारक मित्र चुने गए, 26 और स्थलों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने धरोहर संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है — मथुरा, झाँसी और लखनऊ के 5 ऐतिहासिक स्थलों के लिए स्मारक मित्र चुने गए हैं और 26 और स्थलों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित होने वाले हैं। यह पहल सरकारी संरक्षण से आगे बढ़कर कॉर्पोरेट व सामाजिक संस्थाओं को सीधे विरासत से जोड़ती है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 'एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी' के तहत 5 संरक्षित स्मारकों के लिए स्मारक मित्रों का चयन किया।
चयनित स्थलों में मथुरा के कुसुमवन सरोवर, रसखान की समाधि, पोतराकुंड; झाँसी का लक्ष्मी मंदिर; और लखनऊ का हुलासखेड़ा पुरास्थल शामिल हैं।
अगले चरण में 26 अन्य ऐतिहासिक स्थलों के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) आमंत्रित किए जाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि कॉर्पोरेट, शैक्षणिक, NGO और सामाजिक संगठनों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
योजना का लक्ष्य पर्यटक सुविधाओं का विकास, रखरखाव और युवाओं में विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 24 जून 2026 को धरोहर संरक्षण में जनभागीदारी की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए 'एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी' के अंतर्गत पाँच संरक्षित स्मारकों और पुरास्थलों के लिए 'स्मारक मित्रों' का चयन किया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने घोषणा की कि अगले चरण में 26 अन्य ऐतिहासिक स्थलों के लिए इच्छुक संस्थाओं से 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) आमंत्रित किए जाएंगे।

किन स्थलों के लिए चुने गए स्मारक मित्र

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि अब तक मथुरा के कुसुमवन सरोवर, रसखान की समाधि और पोतराकुंड; झाँसी के लक्ष्मी मंदिर; तथा लखनऊ के हुलासखेड़ा पुरास्थल के लिए स्मारक मित्रों का चयन पूरा हो चुका है। इन संस्थाओं के सहयोग से संबंधित स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास, नियमित रखरखाव और पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य आरंभ किया जाएगा।

नीति का उद्देश्य और दायरा

सिंह ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को केवल सरकारी दायित्व तक सीमित नहीं रखना चाहती। इस अभियान में कॉर्पोरेट संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को जोड़ा जा रहा है, ताकि धरोहर संरक्षण एक जनआंदोलन का रूप ले सके। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुरातात्विक स्थलों के रखरखाव को लेकर संसाधनों की कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।

पर्यटन और युवा पीढ़ी पर असर

मंत्री के अनुसार इस पहल से ऐतिहासिक स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मथुरा, झाँसी और लखनऊ जैसे शहर पहले से ही सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। स्मारक मित्र योजना युवा पीढ़ी को प्रदेश की समृद्ध विरासत से जोड़ने और आम नागरिकों में धरोहर संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने का माध्यम भी बनेगी।

आगे क्या होगा

सरकार शीघ्र ही शेष संरक्षित स्मारकों और पुरास्थलों के लिए भी स्मारक मित्र नामित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। 26 अतिरिक्त स्थलों के लिए EOI आमंत्रित किए जाने की तैयारी है, जो इस योजना को प्रदेश के व्यापक धरोहर परिदृश्य तक विस्तारित करेगी। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी जनभागीदारी आधारित धरोहर संरक्षण का एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि स्मारक मित्रों की जवाबदेही कैसे तय होगी — क्या उनके काम की स्वतंत्र निगरानी होगी या यह केवल CSR-लेबलिंग तक सिमट जाएगी। मथुरा और झाँसी जैसे स्थल पहले से पर्यटन दबाव झेल रहे हैं; बिना स्पष्ट संरक्षण मानकों के 'सुविधा विकास' कभी-कभी धरोहर की मूल संरचना को नुकसान पहुँचा सकता है। 26 और स्थलों के लिए EOI की घोषणा महत्वाकांक्षी है, पर यह तभी सार्थक होगी जब चयन प्रक्रिया पारदर्शी हो और संस्थाओं की क्षमता का वास्तविक मूल्यांकन हो।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी में 'स्मारक मित्र' क्या होते हैं?
'स्मारक मित्र' वे संस्थाएँ होती हैं जो 'एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी' के तहत किसी ऐतिहासिक स्थल को गोद लेकर वहाँ सुविधाओं का विकास, रखरखाव और पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी उठाती हैं। इनमें कॉर्पोरेट, NGO, शैक्षणिक और सामाजिक संगठन शामिल हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में अब तक किन 5 स्थलों के लिए स्मारक मित्र चुने गए हैं?
मथुरा के कुसुमवन सरोवर, रसखान की समाधि और पोतराकुंड; झाँसी के लक्ष्मी मंदिर; तथा लखनऊ के हुलासखेड़ा पुरास्थल के लिए स्मारक मित्रों का चयन किया जा चुका है।
26 अन्य स्थलों के लिए EOI कब आमंत्रित होंगे?
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार 26 अतिरिक्त ऐतिहासिक स्थलों के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' जल्द आमंत्रित किए जाएंगे, हालाँकि अभी कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की गई है।
'एडॉप्ट ए हेरिटेज पॉलिसी' से पर्यटन को कैसे फायदा होगा?
इस नीति के तहत ऐतिहासिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा, पर्यटक अनुभव बेहतर होगा और स्थलों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित होगा। इससे उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इस योजना में आम नागरिक या संस्थाएँ कैसे जुड़ सकती हैं?
इच्छुक कॉर्पोरेट, शैक्षणिक संस्थान, NGO और सामाजिक संगठन 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EOI) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिसे उत्तर प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग जल्द जारी करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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