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लखनऊ में 'इको-एजुकेशनल हब' का शुभारंभ, केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह बोले — 'संस्कृति, विज्ञान और कला का अनूठा संगम'

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लखनऊ में 'इको-एजुकेशनल हब' का शुभारंभ, केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह बोले — 'संस्कृति, विज्ञान और कला का अनूठा संगम'

सारांश

लखनऊ में शुभारंभ हुए 'इको-एजुकेशनल हब' को केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने संस्कृति, विज्ञान और कला का अनूठा संगम बताया। 52 स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनगाथा वाले बॉटनिकल गार्डन और 107 पत्तों के कमल के आविष्कार की विरासत के साथ यह केंद्र देश में पर्यावरण-आधारित शिक्षा का नया मॉडल बन सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह ने 8 अगस्त 2026 को लखनऊ में 'इको-एजुकेशनल हब' का शुभारंभ किया।
केंद्र में 52 स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनगाथा दर्शाने वाला बॉटनिकल गार्डन शामिल है।
इसी संस्थान में 107 पत्तों वाले कमल के फूल का आविष्कार हुआ था, जो 'कौन बनेगा करोड़पति' में प्रश्न का विषय बना।
आगामी दिनों में अन्य विश्वविद्यालयों के सहयोग से पीएचडी पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना।
मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग और प्रधानमंत्री के विज्ञान-प्रसार के निर्देश को सफलता का आधार बताया।

केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 8 अगस्त 2026 को लखनऊ में एक पर्यावरण शिक्षा केंद्र — जिसे देश के पहले 'इको-एजुकेशनल हब' के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है — के शुभारंभ पर कहा कि यह संस्था संस्कृति, विज्ञान और कला के मिश्रण का एक अद्वितीय प्रयोग है। शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल बताया।

हब की विशेषताएँ और संरचना

डॉ. सिंह ने बताया कि इस केंद्र में राज्य से जुड़े विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए हैं और एक बॉटनिकल गार्डन भी विकसित किया गया है। इस गार्डन की विशेषता यह है कि इसमें 52 स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनगाथा को विस्तार से दर्शाया गया है — उनके संघर्ष से लेकर उनकी पूरी जीवन यात्रा तक। यह प्रयोग इतिहास और प्रकृति को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।

शोध और शिक्षा का केंद्र बनेगा

मंत्री ने कहा कि यह हब हर पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला रहेगा। छात्र यहाँ आकर शोध कर सकते हैं, जबकि पर्यटक इसका भ्रमण कर सकते हैं। आगामी दिनों में अन्य विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग कर पीएचडी जैसे उच्च शोध पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की योजना है, जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।

107 पत्तों के कमल का ऐतिहासिक आविष्कार

डॉ. सिंह ने इस संस्थान की एक उल्लेखनीय उपलब्धि का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि इसी संस्थान में 107 पत्तों वाले कमल के फूल का आविष्कार हुआ था। यह फूल इतना चर्चित हुआ कि लोकप्रिय टेलीविज़न शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में एक महिला प्रतियोगी से इस पर प्रश्न पूछा गया, और सही उत्तर देने पर उन्हें पुरस्कार भी मिला।

सरकार की प्रतिक्रिया और समर्थन

मंत्री ने इस पहल की सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से यह स्पष्ट निर्देश है कि विज्ञान का प्रचार-प्रसार देश के छोटे-से-छोटे कस्बों तक पहुँचना चाहिए। पिछले कुछ महीनों में इस केंद्र में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की है।

आगे की राह

यह इको-एजुकेशनल हब उत्तर प्रदेश में पर्यावरण-आधारित शिक्षा के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जाए, तो यह विज्ञान शिक्षा को जमीनी स्तर तक ले जाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह मॉडल कितने विद्यार्थियों तक वास्तव में पहुँचेगा। 52 स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा और 107 पत्तों के कमल जैसी उपलब्धियाँ संस्थान की क्षमता को रेखांकित करती हैं, पर पीएचडी पाठ्यक्रम की योजना अभी भी 'आगामी दिनों' में अटकी है — बिना समयसीमा के। विज्ञान को कस्बों तक पहुँचाने का प्रधानमंत्री का निर्देश सराहनीय है, किंतु इसके लिए ठोस वित्त-पोषण और विश्वविद्यालयी साझेदारी की घोषणा अभी बाकी है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ का 'इको-एजुकेशनल हब' क्या है?
यह लखनऊ में स्थापित एक पर्यावरण शिक्षा केंद्र है जिसे संस्कृति, विज्ञान और कला के मिश्रण के रूप में विकसित किया गया है। इसमें बॉटनिकल गार्डन, स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनगाथाएँ और शोध सुविधाएँ शामिल हैं।
इस हब में 52 स्वतंत्रता सेनानियों का ज़िक्र क्यों है?
केंद्र के बॉटनिकल गार्डन में 52 स्वतंत्रता सेनानियों की पूरी जीवन यात्रा को विस्तार से दर्शाया गया है। यह इतिहास और प्रकृति को एक साथ जोड़ने का प्रयास है, ताकि आगंतुकों को देशभक्ति और पर्यावरण दोनों की जानकारी मिले।
107 पत्तों वाले कमल के फूल का इस संस्थान से क्या संबंध है?
इसी संस्थान में 107 पत्तों वाले कमल के फूल का आविष्कार हुआ था। यह फूल इतना प्रसिद्ध हुआ कि 'कौन बनेगा करोड़पति' टेलीविज़न शो में एक महिला प्रतियोगी से इस पर प्रश्न पूछा गया और सही उत्तर देने पर उन्हें पुरस्कार मिला।
क्या इस हब में पीएचडी की पढ़ाई हो सकेगी?
केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, आगामी दिनों में अन्य विश्वविद्यालयों के सहयोग से पीएचडी जैसे उच्च शोध पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। हालाँकि इसकी कोई निश्चित समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
इस पहल में उत्तर प्रदेश सरकार की क्या भूमिका है?
डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निरंतर सहयोग को इस परियोजना की सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार विज्ञान को छोटे-से-छोटे कस्बों तक पहुँचाने के भाव के साथ यह कार्य किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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