दीघा जगन्नाथ मंदिर का नाम बदला: 'धाम' हटा, अब 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' होगी पहचान
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के दीघा में स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर से अब 'धाम' शब्द हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 8 जून 2026 को घोषणा की कि इस परिसर को आगे से 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' के नाम से जाना जाएगा। राज्य कैबिनेट ने इस नामांतरण को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
नाम बदलने की पृष्ठभूमि
यह निर्णय ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के उस प्रस्ताव के बाद आया, जो वे पुरी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संबित पात्रा के माध्यम से पश्चिम बंगाल सरकार तक पहुँचाया था। सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम — बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी का जगन्नाथ धाम — आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित माने जाते हैं। दीघा मंदिर को 'धाम' कहे जाने पर ओडिशा में व्यापक आपत्ति थी।
संबित पात्रा का तर्क
सांसद संबित पात्रा ने ओडिशा की भावनाओं को स्पष्ट करते हुए कहा, 'सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम हैं। उनमें से एक ओडिशा में जगन्नाथ धाम है, जहाँ नारायण का वास है। आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना की थी। इसलिए जब दीघा में मंदिर बनाया गया और उसे 'धाम' कहा गया, तो न केवल साढ़े चार करोड़ ओडिया लोगों को, बल्कि बंगाल के भक्तों को भी दुख पहुँचा।' उन्होंने मुख्यमंत्री अधिकारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि 'नई सरकार परंपरा का सम्मान करती है।'
मुख्यमंत्री अधिकारी की घोषणा
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, 'ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए, हम दीघा परिसर से 'धाम' शब्द हटा रहे हैं। जहाँ ठाकुर की पूजा होती है, उस ढाँचे को मंदिर के रूप में जाना जाएगा — इसे 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' कहा जाएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूजा-पाठ भारतीय धर्मग्रंथों में निर्धारित नियमों के अनुसार और सात्विक तरीके से होगी। प्रसाद वितरण की व्यवस्था होगी और ट्रस्ट समिति की जानकारी मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। HIDCO के टेंडर और सरकारी फंड भी मंजूर हो चुके हैं।
इस्कॉन और ट्रस्टी की प्रतिक्रिया
दीघा मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी इस्कॉन की है। मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'हम माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर मुझसे चर्चा की थी और हम बहुत खुश हैं।' गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने मायापुर स्थित इस्कॉन मंदिर का दौरा कर राधारमण दास से इस विषय पर विमर्श किया था।
पिछली सरकार पर निशाना और आगे की राह
अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर को मूलतः एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में बनाया गया था और 'धाम' शब्द का प्रयोग पारंपरिक संस्कृति का अपमान था। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नई सरकार की स्थिति को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। नामांतरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद मंदिर के सभी सरकारी दस्तावेज़ों में नया नाम प्रभावी हो जाएगा।