25 जुलाई 2026
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दीघा जगन्नाथ मंदिर का नाम बदला: 'धाम' हटा, अब 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' होगी पहचान

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दीघा जगन्नाथ मंदिर का नाम बदला: 'धाम' हटा, अब 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' होगी पहचान

सारांश

पश्चिम बंगाल के दीघा जगन्नाथ मंदिर से 'धाम' शब्द हटाकर उसे 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' नाम दिया गया। ओडिशा CM के प्रस्ताव और साढ़े चार करोड़ ओडिया भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए CM सुवेंदु अधिकारी ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया — सनातन परंपरा में चार धामों की पवित्रता की रक्षा का प्रतीक।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर से 'धाम' शब्द हटाया गया, अब नाम होगा 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' ।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 8 जून 2026 को यह घोषणा की; राज्य कैबिनेट ने मंजूरी दी।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के प्रस्ताव को संबित पात्रा के माध्यम से स्वीकार किया गया।
सनातन परंपरा में चार धाम — जिनमें पुरी का जगन्नाथ धाम शामिल है — आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित माने जाते हैं।
मंदिर के ट्रस्टी व मुख्य पुजारी राधारमण दास (इस्कॉन) ने फैसले का स्वागत किया।
पूजा धर्मग्रंथ-सम्मत सात्विक पद्धति से होगी; HIDCO फंड और टेंडर मंजूर।

पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के दीघा में स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर से अब 'धाम' शब्द हटा दिया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 8 जून 2026 को घोषणा की कि इस परिसर को आगे से 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' के नाम से जाना जाएगा। राज्य कैबिनेट ने इस नामांतरण को औपचारिक मंजूरी दे दी है।

नाम बदलने की पृष्ठभूमि

यह निर्णय ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के उस प्रस्ताव के बाद आया, जो वे पुरी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संबित पात्रा के माध्यम से पश्चिम बंगाल सरकार तक पहुँचाया था। सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम — बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी का जगन्नाथ धाम — आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित माने जाते हैं। दीघा मंदिर को 'धाम' कहे जाने पर ओडिशा में व्यापक आपत्ति थी।

संबित पात्रा का तर्क

सांसद संबित पात्रा ने ओडिशा की भावनाओं को स्पष्ट करते हुए कहा, 'सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम हैं। उनमें से एक ओडिशा में जगन्नाथ धाम है, जहाँ नारायण का वास है। आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना की थी। इसलिए जब दीघा में मंदिर बनाया गया और उसे 'धाम' कहा गया, तो न केवल साढ़े चार करोड़ ओडिया लोगों को, बल्कि बंगाल के भक्तों को भी दुख पहुँचा।' उन्होंने मुख्यमंत्री अधिकारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि 'नई सरकार परंपरा का सम्मान करती है।'

मुख्यमंत्री अधिकारी की घोषणा

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, 'ओडिशा के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए, हम दीघा परिसर से 'धाम' शब्द हटा रहे हैं। जहाँ ठाकुर की पूजा होती है, उस ढाँचे को मंदिर के रूप में जाना जाएगा — इसे 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' कहा जाएगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूजा-पाठ भारतीय धर्मग्रंथों में निर्धारित नियमों के अनुसार और सात्विक तरीके से होगी। प्रसाद वितरण की व्यवस्था होगी और ट्रस्ट समिति की जानकारी मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। HIDCO के टेंडर और सरकारी फंड भी मंजूर हो चुके हैं।

इस्कॉन और ट्रस्टी की प्रतिक्रिया

दीघा मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी इस्कॉन की है। मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'हम माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर मुझसे चर्चा की थी और हम बहुत खुश हैं।' गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने मायापुर स्थित इस्कॉन मंदिर का दौरा कर राधारमण दास से इस विषय पर विमर्श किया था।

पिछली सरकार पर निशाना और आगे की राह

अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मंदिर को मूलतः एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में बनाया गया था और 'धाम' शब्द का प्रयोग पारंपरिक संस्कृति का अपमान था। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नई सरकार की स्थिति को लेकर चर्चाएँ तेज हैं। नामांतरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद मंदिर के सभी सरकारी दस्तावेज़ों में नया नाम प्रभावी हो जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दो BJP-शासित राज्यों के बीच समन्वय को दर्शाता है। गौर करने वाली बात यह है कि यह मंदिर पिछली TMC सरकार के कार्यकाल में बना था और उसे 'धाम' नाम दिया गया था — जिसे अब नई सरकार ने 'सांस्कृतिक अपमान' करार दिया। सवाल यह है कि क्या यह बदलाव केवल धार्मिक परंपरा की रक्षा है, या इसमें बंगाल-ओडिशा की राजनीतिक निकटता और आगामी चुनावी समीकरणों की भी भूमिका है — यह विश्लेषण का विषय बना रहेगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीघा जगन्नाथ मंदिर का नाम क्यों बदला गया?
सनातन परंपरा में केवल चार धाम मान्य हैं, जिनमें ओडिशा का पुरी जगन्नाथ धाम शामिल है। दीघा मंदिर को 'धाम' कहे जाने पर ओडिशा सरकार और वहाँ के भक्तों ने आपत्ति जताई, जिसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने नाम बदलकर 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' कर दिया।
दीघा मंदिर का नया आधिकारिक नाम क्या है?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की घोषणा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस मंदिर का नया नाम 'श्री जगन्नाथ देव मंदिर' है। पहले इसे 'श्रीश्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' भी कहा जाता था।
ओडिशा सरकार ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पुरी के सांसद संबित पात्रा को अपना प्रतिनिधि बनाकर पश्चिम बंगाल सरकार के पास प्रस्ताव भेजा। CM अधिकारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर 'धाम' शब्द हटाने की घोषणा की।
दीघा मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी किसकी है?
दीघा जगन्नाथ मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी इस्कॉन की है। मंदिर के ट्रस्टी और मुख्य पुजारी राधारमण दास इस्कॉन से जुड़े हैं और उन्होंने नाम बदलने के फैसले का स्वागत किया है।
क्या इस बदलाव से मंदिर में पूजा-पद्धति भी बदलेगी?
CM अधिकारी के अनुसार, पूजा भारतीय धर्मग्रंथों में वर्णित जगन्नाथ देव की पूजा के नियमों के अनुसार सात्विक तरीके से होगी। प्रसाद वितरण जारी रहेगा और ट्रस्ट समिति की जानकारी मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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