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रथ यात्रा 2025: इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास ने बताया दीघा मंदिर विवाद, स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा का महत्व

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रथ यात्रा 2025: इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास ने बताया दीघा मंदिर विवाद, स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा का महत्व

सारांश

इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास ने रथ यात्रा की वैश्विक विरासत, स्नान पूर्णिमा की परंपरा और दीघा मंदिर के 'धाम' नामकरण विवाद पर खुलकर बात की — और सुवेंदु अधिकारी के नाम बदलने के फैसले का स्वागत किया।

मुख्य बातें

इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास ने 9 जून 2025 को कोलकाता में भगवान जगन्नाथ, रथ यात्रा और दीघा मंदिर विवाद पर विचार रखे।
स्नान पूर्णिमा 29 जून 2025 को है; इसके बाद भगवान 14 दिनों तक दर्शन नहीं देते — धार्मिक मान्यता के अनुसार।
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन से चौदह पीढ़ियों को आध्यात्मिक लाभ मिलता है — मान्यता के अनुसार।
पुरी के बाद कोलकाता की रथ यात्रा विश्व की सबसे बड़ी रथ यात्राओं में शामिल है।
दीघा मंदिर के नाम से 'धाम' हटाकर 'मंदिर' जोड़ने की घोषणा सुवेंदु अधिकारी ने की; राधारमण दास ने इसका स्वागत किया।

कोलकाता में इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने 9 जून 2025 को भगवान जगन्नाथ की आस्था, दीघा जगन्नाथ मंदिर से जुड़े नामकरण विवाद, स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा की धार्मिक परंपरा पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ सभी के हैं और जो भी सनातन धर्म की सेवा में समर्पित है, उसका योगदान प्रशंसनीय है।

दीघा जगन्नाथ मंदिर और ममता बनर्जी की भूमिका

राधारमण दास ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दीघा में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर बनवाया है, जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता आए थे, तब उन्होंने भी इस विशाल मंदिर के निर्माण की सराहना की थी।

स्नान पूर्णिमा: परंपरा और धार्मिक मान्यता

इस्कॉन प्रवक्ता ने बताया कि इस वर्ष स्नान पूर्णिमा 29 जून को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि अत्यधिक स्नान के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और अगले 14 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते। रथ यात्रा से एक दिन पूर्व भगवान पुनः दर्शन देते हैं और फिर रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं।

रथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व

राधारमण दास ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से व्यक्ति की चौदह पीढ़ियों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर समस्त भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

रथ यात्रा की वैश्विक पहचान और इस्कॉन की भूमिका

रथ यात्रा को विश्वभर में पहुँचाने का श्रेय इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद को जाता है। विदेश प्रवास के दौरान उन्होंने सर्वप्रथम भगवान बलदेव, सुभद्रा और जगन्नाथ की मूर्तियाँ स्थापित कीं, जिसके बाद दुनिया के अनेक देशों में रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत हुई। पुरी के बाद कोलकाता की रथ यात्रा को सबसे विशाल रथ यात्राओं में गिना जाता है।

दीघा मंदिर नामकरण विवाद और समाधान

दीघा जगन्नाथ मंदिर के नामकरण को लेकर उठे विवाद पर राधारमण दास ने कहा कि मंदिर के उद्घाटन के समय इसका नाम 'जगन्नाथ धाम दीघा' रखा गया था, जिस पर ओडिशा के लोगों ने आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि 'धाम' शब्द का उपयोग केवल पुरी के लिए होना चाहिए, क्योंकि जगन्नाथ धाम पुरी का धार्मिक महत्व अद्वितीय है। अब इस विवाद का समाधान हो गया है — सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि मंदिर के नाम से 'धाम' शब्द हटाकर उसकी जगह 'मंदिर' जोड़ा जाएगा। राधारमण दास ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए सुवेंदु अधिकारी को धन्यवाद दिया और कहा कि इससे ओडिशा के श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान होगा। यह कदम आस्था और क्षेत्रीय सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह दरअसल धार्मिक भूगोल पर नियंत्रण की गहरी राजनीति को उजागर करता है — पुरी की अनन्य सांस्कृतिक पहचान और बंगाल की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बीच टकराव। सुवेंदु अधिकारी का त्वरित सुधार व्यावहारिक राजनीति है, न कि केवल धार्मिक संवेदनशीलता। गौरतलब है कि इस्कॉन जैसी संस्था का इस विवाद में मध्यस्थ स्वर अपनाना यह दर्शाता है कि धार्मिक संगठन अब राज्य-स्तरीय राजनीतिक विवादों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्नान पूर्णिमा 2025 कब है और इसका क्या महत्व है?
इस वर्ष स्नान पूर्णिमा 29 जून 2025 को है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष अभिषेक होता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके बाद भगवान 14 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते।
दीघा जगन्नाथ मंदिर के नाम से 'धाम' क्यों हटाया जा रहा है?
मंदिर का नाम 'जगन्नाथ धाम दीघा' रखे जाने पर ओडिशा के लोगों ने आपत्ति जताई थी, क्योंकि उनका मानना है कि 'धाम' शब्द केवल पुरी के लिए प्रयुक्त होना चाहिए। सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि नाम में 'धाम' की जगह 'मंदिर' जोड़ा जाएगा।
रथ यात्रा को वैश्विक स्तर पर किसने पहुँचाया?
इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद ने विदेश में भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा की मूर्तियाँ स्थापित कर रथ यात्रा को वैश्विक पहचान दिलाई। इसके बाद दुनिया के अनेक देशों में यह उत्सव मनाया जाने लगा।
कोलकाता की रथ यात्रा कितनी बड़ी है?
पुरी के बाद कोलकाता की रथ यात्रा को विश्व की सबसे बड़ी रथ यात्राओं में गिना जाता है। इस्कॉन की सक्रिय भागीदारी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान दिलाई है।
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन का क्या फल माना जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से व्यक्ति की चौदह पीढ़ियों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास ने इस परंपरा का विशेष उल्लेख किया।
राष्ट्र प्रेस
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