दीघा जगन्नाथ मंदिर का नाम बदला: 'धाम' हटा, 'श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' का नया बोर्ड लगा
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी मेदिनीपुर जिले के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर में बुधवार, 11 जून 2025 को नया साइनबोर्ड स्थापित किया गया, जिसमें 'धाम' शब्द को हटाकर परिसर का नाम 'श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' रखा गया है। यह बदलाव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद अमल में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंदिर परिसर को अब आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज नाम से ही पुकारा जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे पुराने 'जगन्नाथ धाम' साइनबोर्ड को हटा दिया गया और उसकी जगह परिसर के भीतर 'श्री श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र' नाम का नया फ्लेक्स बोर्ड लगाया गया। इस कार्यक्रम में रामनगर के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक चंद्रशेखर मंडल और कोलकाता के इस्कॉन अध्यक्ष व मंदिर के न्यासी राधार्मन दास उपस्थित रहे।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि आधिकारिक दस्तावेजों में इस परिसर को शुरू से ही सांस्कृतिक केंद्र के रूप में दर्ज किया गया था। हालाँकि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने मंदिर निर्माण के बाद इसके नाम में 'धाम' शब्द जोड़ दिया था, जो विवाद का विषय बन गया। तब विपक्ष के नेता रहे सुवेंदु अधिकारी ने इस पर आपत्ति जताई थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मोहन चरण माझी के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मंगलवार को यह घोषणा की। BJP विधायक चंद्रशेखर मंडल ने कहा, 'हमें बदलाव नहीं चाहिए, हमें सुधार चाहिए। हमारी सरकार ने पिछली सरकार की परियोजना को रद्द नहीं किया, बल्कि उसमें सुधार किया है। इसी तरह, दीघा जगन्नाथ धाम को लेकर कई विवादों के चलते, इसके नाम से 'धाम' हटाकर इसे 'दीघा जगन्नाथ मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र' कर दिया गया है।'
आम जनता और धार्मिक संस्थाओं पर असर
यह परिवर्तन केवल नामकरण तक सीमित नहीं है — यह उस बहस को भी रेखांकित करता है कि राज्य-वित्त पोषित धार्मिक परिसरों को किस रूप में परिभाषित किया जाए। मंदिर के न्यासी और इस्कॉन अध्यक्ष राधार्मन दास की उपस्थिति यह संकेत देती है कि धार्मिक प्रबंधन इस बदलाव के साथ सहमति में है।
क्या होगा आगे
अब यह देखना होगा कि परिसर के अन्य आधिकारिक दस्तावेजों, वेबसाइटों और सरकारी प्रचार सामग्री में भी यह संशोधित नाम लागू किया जाता है या नहीं। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि TMC इस कदम को किस रूप में लेती है, क्योंकि 'जगन्नाथ धाम' नामकरण उसी सरकार की पहल थी।