चुनाव आयोग विवाद पर दिलीप घोष का पलटवार — 'राहुल गांधी क्या अदालत बन गए हैं?'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कोलकाता में विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने की अवधि में चुनाव आयोग के निर्णयों पर 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। घोष ने इन रिपोर्टों को आधारहीन बताते हुए विपक्ष से सबूत माँगे।
मुख्य घटनाक्रम
पत्रकारों से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा, 'एसआईआर का मुद्दा अदालत में भी उठा और लोगों ने अदालतों का रुख भी किया था, लेकिन कहीं भी कोई रुकावट नहीं आई। किसी के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि क्या गलत हुआ।' उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से अवैध रूप से हटाया गया हो और वह दस्तावेज़ प्रस्तुत करे, तो उसका नाम बहाल किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग स्वयं यह स्पष्ट कर चुका है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) सहित सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे।
राहुल गांधी और विपक्ष पर तीखा निशाना
दिलीप घोष ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की माँग पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'क्या राहुल गांधी अदालत और न्यायपालिका बन गए हैं? क्या वे स्वयं संविधान बन गए हैं कि उन्हें यह तय करने का अधिकार है कि किसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए — वो भी ऐसे व्यक्ति को जिसने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाए।'
विपक्ष की लगातार आलोचना पर घोष ने व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, 'आज विपक्ष के पास करने को कुछ नहीं है। जो उपचुनाव में उम्मीदवार तक नहीं उतार सकते, उनकी बात कौन सुनेगा?'
चुनाव हार का ज़िम्मेदार कौन
घोष ने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि वह अपनी चुनावी हार का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'यदि आप चुनाव हार जाओगे, जनता आपको वोट नहीं देगी — तो इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
न्यू टाउन में अदाणी ग्रुप का 2,000 बेड का अस्पताल
इसी अवसर पर दिलीप घोष ने कोलकाता के न्यू टाउन में अदाणी ग्रुप द्वारा स्थापित किए जा रहे प्रस्तावित 2,000 बेड के अस्पताल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गुरुवार को इस परियोजना का भूमि पूजन समारोह आयोजित किया जा रहा है और इसमें से 1,000 बेड गरीब मरीजों के लिए निःशुल्क होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगपतियों और व्यापारिक समूहों का स्वागत करती है और उन्हें क्रमशः भूमि आवंटित की जाएगी। साथ ही, उन कंपनियों से भूमि वापस ली जाएगी जिन्होंने पहले ज़मीन तो ले ली थी, लेकिन कोई कार्य आरंभ नहीं किया।
आगे की स्थिति
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, विशेष रूप से जब संसद का अगला सत्र नज़दीक आएगा। घोष की टिप्पणियाँ सत्तारूढ़ दल की उस रणनीति को रेखांकित करती हैं, जिसमें विपक्षी आरोपों को सबूत के अभाव में निराधार बताया जा रहा है।