SIR और CEC विवाद: दिलीप घोष बोले — विरोध का अधिकार है, अराजकता नहीं
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध विपक्ष के चल रहे आंदोलन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस विरोध-प्रदर्शन को 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया और कहा कि लोकतंत्र में आवाज़ उठाना अधिकार है, किंतु अराजकता फैलाना स्वीकार्य नहीं।
मंत्री घोष का बयान
घोष ने कहा, 'किसी भी लोकतांत्रिक देश में कोई भी अपनी बात रख सकता है, आंदोलन कर सकता है या विरोध कर सकता है। लेकिन जिस तरह से देश में अराजकता फैलाने, प्रशासन को गुमराह करने और जनता को गुमराह करने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है, वह किसी के हित में नहीं है।' उन्होंने विपक्षी नेताओं की प्रदर्शन-शैली पर भी कटाक्ष किया।
उन्होंने कहा, 'कोई सड़क पर सोकर या लेटकर ड्रामा कर रहा है। कोई पेड़ पर चढ़ रहा है। ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी पेड़ नहीं चढ़ा, वह 60 साल की उम्र में पेड़ पर चढ़ रहा है। इस ड्रामे से कुछ नहीं निकलेगा।'
सरकार की स्थिति
मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार संविधान के दायरे में रहकर कार्य कर रही है और सभी निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप लिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास कार्य जारी हैं और जनता उनसे संतुष्ट है।
घोष ने कहा कि विपक्ष का यह व्यवहार नया नहीं है — 'चुनाव हारने के बाद इस तरह के विरोध-प्रदर्शन करना उनकी पुरानी आदत बन गई है। कुछ दिन सड़कों पर प्रदर्शन करने से कुछ हासिल नहीं होगा।'
SIR और CEC विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में विपक्षी दलों ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए देशभर में प्रदर्शन आयोजित किए हैं। आलोचकों का कहना है कि SIR के ज़रिए मतदाता सूची में हेरफेर की आशंका है, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को निराधार बताता रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया राजनीतिक बहस के केंद्र में है।
आगे की राजनीति
विपक्षी दलों ने घोष के बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन आंदोलन जारी रहने के संकेत हैं। लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता को लेकर यह बहस आने वाले हफ्तों में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि विभिन्न राज्यों में चुनावी कार्यक्रम पास आ रहे हैं।