दिशा 2.0 वर्कशॉप: अर्जुन राम मेघवाल बोले — न्याय सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं, नागरिक-सशक्तिकरण ही असली लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 22 सितंबर 2026 को दक्षिण गोवा में आयोजित दिशा 2.0 रीजनल वर्कशॉप के मौके पर स्पष्ट किया कि न्याय तक पहुँच केवल अदालतों और कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है — बल्कि इसका असली अर्थ है नागरिकों को उनके अधिकारों की जानकारी देकर सशक्त बनाना। इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च (IIULES) में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य टेली-लॉ, न्याय बंधु और प्रो-बोनो कानूनी सेवाओं के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम का मुख्य घटनाक्रम
कानून एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा आयोजित इस वर्कशॉप में गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू और IIULES गोवा के वाइस-चांसलर प्रो. (डॉ.) आर. वेंकटा राव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लाभार्थियों, विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर्स और पैनल वकीलों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि दिशा योजना किस प्रकार ग्रामीण भारत में न्याय की पहुँच को सरल बना रही है — विशेष रूप से उन तबकों के लिए जो आर्थिक कारणों से कानूनी प्रतिनिधित्व का खर्च नहीं उठा सकते।
दिशा 2.0 योजना के तीन स्तंभ
केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने पत्रकारों को बताया कि दिशा 2.0 तीन प्रमुख स्तंभों पर टिकी है: टेली-लॉ (फोन के ज़रिए कानूनी परामर्श), न्याय बंधु (प्रो-बोनो वकील नेटवर्क) और प्रो-बोनो कानूनी सेवाएँ। इन सेवाओं का वितरण स्थानीय निकायों और कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से किया जा रहा है।
उन्होंने 'न्याय प्रबोध: अवेकनिंग टू जस्टिस' पहल का भी उल्लेख किया और कहा कि कानूनी साक्षरता की संस्कृति को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों, छात्रों और युवा पेशेवरों की भूमिका अहम है। कार्यशाला में प्रो-बोनो क्लबों की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
ऐतिहासिक संदर्भ: चित्तरंजन दास और अलीपुर बम कांड
प्रो-बोनो सेवाओं के महत्व को समझाते हुए मेघवाल ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक अलीपुर बम कांड का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि चित्तरंजन दास ने निस्वार्थ भाव से अरविंद घोष का बचाव किया और उन्हें बरी कराया — यही सेवा-भावना आज न्याय बंधु पहल के माध्यम से जीवित है। उन्होंने कहा, 'प्रो-बोनो वकील वास्तव में न्याय के संरक्षक हैं।'
राहुल गांधी पर तीखी प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के दौरान मेघवाल ने इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित मिमिक्री की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भले ही कांग्रेस इसे 'मिमिक्री का एक्ट' बता रही हो, लेकिन उनके अनुसार इस प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति का अपमान हुआ है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली हो।
आगे क्या होगा
दिशा 2.0 के तहत इस तरह की रीजनल वर्कशॉप देश के अन्य हिस्सों में भी आयोजित की जाएँगी, ताकि टेक्नोलॉजी-आधारित और समुदाय-आधारित कानूनी सहायता का दायरा व्यापक बनाया जा सके। इस पहल का दीर्घकालिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी जानकारी और सेवाएँ सरल, सुलभ और जवाबदेह हों — विशेष रूप से ग्रामीण और हाशिये पर खड़े वर्गों के लिए।