27 अक्टूबर 2026
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डीपीडीपी एक्ट पर डीएनपीए की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया, 17 नवंबर को सुनवाई

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डीपीडीपी एक्ट पर डीएनपीए की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया, 17 नवंबर को सुनवाई

सारांश

डिजिटल मीडिया की आज़ादी और डेटा सुरक्षा के बीच टकराव अब सर्वोच्च न्यायालय में पहुँच गया है। डीएनपीए का तर्क है कि डीपीडीपी एक्ट की खामियाँ खोजी पत्रकारिता और आरटीआई को कमज़ोर करती हैं। 17 नवंबर की सुनवाई तय करेगी कि प्रेस स्वतंत्रता और नागरिक निजता के बीच संतुलन कहाँ बनेगा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को डीएनपीए की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित; अन्य याचिकाओं के साथ एकसाथ सुनवाई होगी।
डीपीडीपी एक्ट 2023 और डीपीडीपी रूल्स 2025 पर फ़िलहाल रोक लगाने से कोर्ट का इनकार।
याचिका में आरटीआई धारा 8(1)(जे) संशोधन और केंद्र की व्यापक डेटा-माँग शक्तियों को भी चुनौती।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा — नागरिकों के अधिकारों और प्रेस स्वतंत्रता के बीच संतुलन ज़रूरी।
डीएनपीए में दैनिक जागरण , टाइम्स ऑफ इंडिया , एनडीटीवी सहित लगभग 17-21 प्रमुख मीडिया समूह शामिल हैं।

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई 17 नवंबर को उसी विषय पर दायर अन्य याचिकाओं के साथ एकसाथ की जाएगी। याचिका में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डीपीडीपी रूल्स, 2025 के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार के हनन का आरोप लगाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

सर्वोच्च न्यायालय ने फ़िलहाल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और डीपीडीपी रूल्स 2025 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों के भी अपने अधिकार हैं और एक उचित संतुलन बनाना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह विभिन्न पक्षों की बात सुनने के बाद ही कोई अंतरिम राहत देने पर विचार करेगा।

याचिका में क्या-क्या उठाए गए हैं सवाल

डीएनपीए की याचिका में तर्क दिया गया है कि डीपीडीपी एक्ट में पत्रकारिता कार्यों के लिए कोई स्पष्ट छूट न होने से खोजी पत्रकारिता गंभीर खतरे में पड़ जाएगी। याचिका के अनुसार, गोपनीय स्रोतों की सुरक्षा बाधित होगी और सहमति तथा डेटा हटाने की जटिल शर्तें समाचार संस्थानों पर अनुचित बोझ डालेंगी।

इसके अतिरिक्त, याचिका में आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) में हुए संशोधन को भी चुनौती दी गई है, जो सरकारी अधिकारियों से जुड़ी जानकारी तक पहुँच को सीमित करता है। साथ ही, डीपीडीपी अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को दी गई जानकारी माँगने की व्यापक शक्तियों पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिका में अदालत से इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की माँग की गई है।

डीएनपीए: पृष्ठभूमि और प्रतिनिधित्व

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) भारत का एक प्रमुख मीडिया उद्योग संगठन है, जिसकी स्थापना 2018 में हुई थी। यह देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समूहों के डिजिटल विंग्स का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल समाचार उद्योग में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रकाशकों के हितों की रक्षा करना है।

संगठन में लगभग 17 से 21 प्रमुख मीडिया समूह शामिल हैं, जिनमें दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, नेटवर्क18, एनडीटीवी, इंडिया टुडे समूह, अमर उजाला और एबीपी नेटवर्क जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

व्यापक संदर्भ: प्रेस स्वतंत्रता बनाम डेटा संरक्षण

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में डेटा गोपनीयता और डिजिटल मीडिया विनियमन पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि डीपीडीपी एक्ट 2023 को संसद ने पारित किया था और इसके नियम 2025 में अधिसूचित हुए। आलोचकों का कहना है कि इन नियमों में पत्रकारिता को अलग श्रेणी में रखे बिना उन पर सामान्य डेटा नियंत्रण थोपना, लोकतंत्र में जवाबदेही पत्रकारिता को कमज़ोर कर सकता है। सरकार का पक्ष यह है कि नागरिकों के निजता अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 17 नवंबर 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सर्वोच्च न्यायालय इस विषय पर दायर सभी याचिकाओं पर एकसाथ विचार करेगा। कोर्ट का यह निर्णय न केवल डिजिटल मीडिया के लिए, बल्कि आरटीआई और खोजी पत्रकारिता के भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएनपीए की सुप्रीम कोर्ट में याचिका किस बारे में है?
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डीपीडीपी रूल्स, 2025 के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें रद्द करने की माँग की है। याचिका में आरोप है कि ये नियम प्रेस की स्वतंत्रता, सूचना के अधिकार और खोजी पत्रकारिता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने डीपीडीपी एक्ट पर रोक क्यों नहीं लगाई?
सर्वोच्च न्यायालय ने फ़िलहाल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और डीपीडीपी रूल्स 2025 पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों के निजता अधिकारों और प्रेस स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, और कोर्ट सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही राहत पर विचार करेगा।
अगली सुनवाई कब होगी और क्या होगा उसमें?
अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित है, जब सर्वोच्च न्यायालय डीएनपीए सहित इसी विषय पर दायर अन्य याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करेगा। इस सुनवाई में कोर्ट अंतरिम राहत और मामले की आगे की दिशा तय कर सकता है।
डीपीडीपी एक्ट से पत्रकारिता पर क्या असर पड़ सकता है?
याचिका के अनुसार, पत्रकारिता कार्यों के लिए स्पष्ट छूट न होने से खोजी पत्रकारिता खतरे में पड़ सकती है, गोपनीय स्रोतों की पहचान उजागर हो सकती है और सहमति व डेटा हटाने की जटिल शर्तें समाचार संस्थानों पर अनुचित बोझ डालेंगी। आरटीआई धारा 8(1)(जे) में संशोधन के कारण सरकारी अधिकारियों से जुड़ी जानकारी तक पहुँच भी सीमित हो सकती है।
डीएनपीए क्या है और इसमें कौन-से मीडिया समूह शामिल हैं?
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) 2018 में स्थापित एक प्रमुख मीडिया उद्योग संगठन है, जो देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समूहों के डिजिटल विंग्स का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, नेटवर्क18, एनडीटीवी, इंडिया टुडे समूह, अमर उजाला और एबीपी नेटवर्क सहित लगभग 17 से 21 मीडिया समूह शामिल हैं।
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