डीपीडीपी एक्ट पर डीएनपीए की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस दिया, 17 नवंबर को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई 17 नवंबर को उसी विषय पर दायर अन्य याचिकाओं के साथ एकसाथ की जाएगी। याचिका में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डीपीडीपी रूल्स, 2025 के कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार के हनन का आरोप लगाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वोच्च न्यायालय ने फ़िलहाल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और डीपीडीपी रूल्स 2025 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों के भी अपने अधिकार हैं और एक उचित संतुलन बनाना आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह विभिन्न पक्षों की बात सुनने के बाद ही कोई अंतरिम राहत देने पर विचार करेगा।
याचिका में क्या-क्या उठाए गए हैं सवाल
डीएनपीए की याचिका में तर्क दिया गया है कि डीपीडीपी एक्ट में पत्रकारिता कार्यों के लिए कोई स्पष्ट छूट न होने से खोजी पत्रकारिता गंभीर खतरे में पड़ जाएगी। याचिका के अनुसार, गोपनीय स्रोतों की सुरक्षा बाधित होगी और सहमति तथा डेटा हटाने की जटिल शर्तें समाचार संस्थानों पर अनुचित बोझ डालेंगी।
इसके अतिरिक्त, याचिका में आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) में हुए संशोधन को भी चुनौती दी गई है, जो सरकारी अधिकारियों से जुड़ी जानकारी तक पहुँच को सीमित करता है। साथ ही, डीपीडीपी अधिनियम के तहत केंद्र सरकार को दी गई जानकारी माँगने की व्यापक शक्तियों पर भी आपत्ति जताई गई है। याचिका में अदालत से इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की माँग की गई है।
डीएनपीए: पृष्ठभूमि और प्रतिनिधित्व
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) भारत का एक प्रमुख मीडिया उद्योग संगठन है, जिसकी स्थापना 2018 में हुई थी। यह देश के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया समूहों के डिजिटल विंग्स का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल समाचार उद्योग में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और प्रकाशकों के हितों की रक्षा करना है।
संगठन में लगभग 17 से 21 प्रमुख मीडिया समूह शामिल हैं, जिनमें दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, नेटवर्क18, एनडीटीवी, इंडिया टुडे समूह, अमर उजाला और एबीपी नेटवर्क जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
व्यापक संदर्भ: प्रेस स्वतंत्रता बनाम डेटा संरक्षण
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश में डेटा गोपनीयता और डिजिटल मीडिया विनियमन पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि डीपीडीपी एक्ट 2023 को संसद ने पारित किया था और इसके नियम 2025 में अधिसूचित हुए। आलोचकों का कहना है कि इन नियमों में पत्रकारिता को अलग श्रेणी में रखे बिना उन पर सामान्य डेटा नियंत्रण थोपना, लोकतंत्र में जवाबदेही पत्रकारिता को कमज़ोर कर सकता है। सरकार का पक्ष यह है कि नागरिकों के निजता अधिकारों की भी रक्षा की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 17 नवंबर 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब सर्वोच्च न्यायालय इस विषय पर दायर सभी याचिकाओं पर एकसाथ विचार करेगा। कोर्ट का यह निर्णय न केवल डिजिटल मीडिया के लिए, बल्कि आरटीआई और खोजी पत्रकारिता के भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।