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डोडा में जल जीवन मिशन की ₹12-15 करोड़ की परियोजना अधूरी, एलजी मनोज सिन्हा से जाँच की माँग

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डोडा में जल जीवन मिशन की ₹12-15 करोड़ की परियोजना अधूरी, एलजी मनोज सिन्हा से जाँच की माँग

सारांश

डोडा के कहरा-भटोगड़ा क्षेत्र में ₹12-15 करोड़ की जल जीवन मिशन परियोजना तीन-चार साल बाद भी अधूरी है। पाइप फट रहे हैं, फिल्टर प्लांट बेकार पड़ा है और विभागीय रिपोर्ट ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खाती — सामाजिक कार्यकर्ता सफदर पारे ने एलजी मनोज सिन्हा से स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

डोडा जिले के कहरा-भटोगड़ा क्षेत्र में जल जीवन मिशन की ₹12-15 करोड़ की परियोजना तीन-चार वर्षों से अधूरी है।
सामाजिक कार्यकर्ता सफदर पारे ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से PHE विभाग की स्वतंत्र टीम भेजकर जाँच कराने की माँग की।
विभाग ने भटोगड़ा लिफ्ट स्टेशन चालू होने और पाइपलाइन मरम्मत का दावा किया, लेकिन पारे के अनुसार यह रिपोर्ट वास्तविकता से मेल नहीं खाती।
कई स्थानों पर पाइप फट रहे हैं और फिल्टर प्लांट तैयार होने के बावजूद योजना अधूरी छोड़ी गई है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर चुनावी वादों — मुफ्त बिजली और पानी — को पूरा न करने का आरोप लगाया गया है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के गुंडोह क्षेत्र में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत स्वीकृत ₹12 से 15 करोड़ की पेयजल परियोजना वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी है, जिसके चलते कहरा-भटोगड़ा क्षेत्र के सैकड़ों परिवार स्वच्छ पेयजल से वंचित हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सफदर पारे ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप की अपील करते हुए परियोजना की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है।

परियोजना की स्थिति

सफदर पारे के अनुसार, तीन से चार वर्ष पहले तहसील कहरा के भटोगड़ा-टांटा क्षेत्र में जल जीवन मिशन के अंतर्गत यह पेयजल परियोजना शुरू की गई थी। इसके लिए ₹12 से 15 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। परंतु कथित तौर पर धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद परियोजना आज तक पूरी नहीं हो सकी और स्थानीय निवासियों को इसका कोई लाभ नहीं मिला।

विभागीय जवाब पर सवाल

सफदर पारे का आरोप है कि उन्होंने इस मामले में उपराज्यपाल कार्यालय और पीएचई (PHE) विभाग को शिकायतें और रिपोर्ट भेजी हैं। विभाग की ओर से यह दावा किया गया कि भटोगड़ा लिफ्ट स्टेशन चालू कर दिया गया है और पाइपलाइन की मरम्मत हो चुकी है। हालाँकि, पारे का कहना है कि ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है — मौके पर कोई प्रभावी कार्य नहीं हुआ और विभागीय रिपोर्ट वास्तविकता से मेल नहीं खाती।

गुणवत्ता पर गंभीर आरोप

पारे ने परियोजना में इस्तेमाल पाइपों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, कई स्थानों पर पाइप फट रहे हैं और फिल्टर प्लांट तैयार होने के बावजूद पूरी योजना अधूरी छोड़ दी गई है। उन्होंने उपराज्यपाल से आग्रह किया कि PHE विभाग की एक स्वतंत्र टीम को भटोगड़ा लिफ्ट स्टेशन भेजकर पूरे प्रोजेक्ट की जाँच करवाई जाए।

राजनीतिक आरोप

सफदर पारे ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाया कि वह लोगों की बुनियादी समस्याओं के समाधान में विफल रही है। उनके अनुसार, चुनाव के दौरान मुफ्त बिजली और पानी सहित कई वादे किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में हाल ही में चुनी गई सरकार पर शासन-वितरण की कसौटी पर खरा उतरने का दबाव है।

माँग और आगे की राह

सफदर पारे ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जल जीवन मिशन की योजनाएँ शुरू हुईं, लेकिन अब इन परियोजनाओं की नियमित निगरानी आवश्यक है। उन्होंने माँग की कि मामले की निष्पक्ष जाँच हो, जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और कहरा-भटोगड़ा क्षेत्र में अधूरी परियोजना जल्द पूरी की जाए, ताकि वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे गरीब और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों को राहत मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नल से बहते पानी से मापे। नई निर्वाचित सरकार के लिए यह परीक्षा है कि वह विरासत में मिली प्रशासनिक खामियों को सुधारे, न कि उन्हें आगे बढ़ाए।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोडा में जल जीवन मिशन की अधूरी परियोजना क्या है?
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की तहसील कहरा के भटोगड़ा-टांटा क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत ₹12 से 15 करोड़ की एक पेयजल परियोजना तीन-चार वर्ष पहले शुरू की गई थी, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। फिल्टर प्लांट तैयार होने के बावजूद स्थानीय लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा।
सफदर पारे ने एलजी मनोज सिन्हा से क्या माँग की है?
सामाजिक कार्यकर्ता सफदर पारे ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से PHE विभाग की एक स्वतंत्र टीम को भटोगड़ा लिफ्ट स्टेशन भेजकर पूरे प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जाँच कराने की अपील की है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई और परियोजना को जल्द पूरा करने की भी माँग की है।
PHE विभाग पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
सफदर पारे का आरोप है कि PHE विभाग ने अपनी रिपोर्ट में लिफ्ट स्टेशन चालू होने और पाइपलाइन मरम्मत का दावा किया, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्य नहीं हुआ। कई स्थानों पर पाइप फट रहे हैं और विभागीय रिपोर्ट वास्तविकता से मेल नहीं खाती।
इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर क्या सवाल उठे हैं?
सफदर पारे ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार चुनाव के दौरान मुफ्त बिजली और पानी सहित किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। उनके अनुसार, जमीनी स्तर पर हालात वादों से बिल्कुल अलग हैं।
कहरा-भटोगड़ा क्षेत्र के लोगों पर इस परियोजना की विफलता का क्या असर है?
क्षेत्र के गरीब और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे हैं। ₹12-15 करोड़ की परियोजना स्वीकृत होने के बावजूद स्थानीय निवासियों को स्वच्छ पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं मिल पा रही।
राष्ट्र प्रेस
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