पश्चिम एशिया संकट: घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई लागत ₹1,600 पार, प्रति सिलेंडर ₹700 अंडर-रिकवरी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया संकट के बीच 14.2 किलोग्राम के घरेलू LPG सिलेंडर की आयात-आधारित सप्लाई लागत बढ़कर ₹1,600 से अधिक हो गई है, जबकि उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर उससे कहीं कम कीमत पर मिल रहा है। इससे प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर लगभग ₹700 की अंडर-रिकवरी हो रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 7 जून 2026 को यह जानकारी सार्वजनिक की और बताया कि इस दौरान घरेलू कुकिंग गैस की कीमत में प्रति सिलेंडर ₹29 की बढ़ोतरी भी की गई है।
कमर्शियल और घरेलू गैस की कीमतों में बड़ा अंतर
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान पाँच बार दाम बढ़ने के बाद होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में ₹3,113.50 (लगभग ₹164 प्रति किलो) में बिक रहा है। इसके विपरीत, घरेलू सिलेंडर की दर संशोधन के बाद भी लगभग ₹66 प्रति किलो ही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल गैस पर टैक्स और मार्जिन अधिक होने के कारण उसकी कीमत घरेलू गैस की लागत-आधारित दर से अधिक है।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और सप्लाई पर असर
संघर्ष के कारण जब होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक आवाजाही लगभग ठप हो गई, तब भारत के लिए चुनौती और गहरी हो गई। भारत की कुल LPG खपत का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से आता था। यह ऐसे समय में आया जब देशभर में घरेलू रसोई गैस की माँग अपने चरम पर थी। गौरतलब है कि भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल रहा जिसने इस संकट के दौरान भी अपने ऊर्जा कार्गो की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की।
सरकार ने सप्लाई बनाए रखने के लिए क्या किए उपाय
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय झंडे वाले टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से निरंतर गुजरते रहे और बिना कोई टोल चुकाए भारतीय बंदरगाहों पर कच्चा तेल व LPG की खेप उतारते रहे। भारत ने किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक जहाज इस मार्ग से निकाले।
आपूर्ति पक्ष पर, आयात में आई कमी की भरपाई के लिए घरेलू LPG उत्पादन को लगभग 32 टीएमटी से बढ़ाकर लगभग 52 टीएमटी कर दिया गया — यानी 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि। इसके साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे उन देशों से भी LPG मंगाई गई जिनके जहाज होर्मुज से नहीं गुजरते। उपलब्ध गैस को घरों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं तक पहुँचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
माँग प्रबंधन के तहत ग्राहकों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे सिलेंडरों पर दबाव कम हुआ। इसके अलावा, OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ाया गया ताकि सब्सिडी वाली घरेलू LPG का कमर्शियल बाज़ार में दुरुपयोग रोका जा सके।
अंडर-रिकवरी और सरकारी मुआवज़ा
पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर ₹60,000 करोड़ हो गई, जो उससे पिछले वर्ष ₹41,338 करोड़ थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्केटिंग कंपनियों को इस मद में ₹30,000 करोड़ का मुआवज़ा देने को मंजूरी दी है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह मुआवज़ा उज्ज्वला सब्सिडी से अलग है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर ₹300 की अतिरिक्त सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है, जो 10.58 करोड़ से अधिक कनेक्शन तक पहुँचती है।
आगे क्या होगा
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं हुई और बॉटलिंग व वितरण का काम पूरे नेटवर्क में सामान्य रूप से जारी रहा। हालाँकि, ₹60,000 करोड़ की बढ़ती अंडर-रिकवरी और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अनिश्चितता को देखते हुए आने वाले महीनों में घरेलू LPG मूल्य नीति पर सरकार के निर्णय महत्त्वपूर्ण होंगे।