24 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

द्वाराहाट का मृत्युंजय मंदिर: नागर शैली की वास्तुकला और कत्यूरी विरासत का अनूठा संगम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
द्वाराहाट का मृत्युंजय मंदिर: नागर शैली की वास्तुकला और कत्यूरी विरासत का अनूठा संगम

सारांश

द्वाराहाट का मृत्युंजय मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं — यह कत्यूरी स्थापत्य कला का जीवंत दस्तावेज़ है। CM धामी की एक्स पोस्ट और ASI के संरक्षण अभियान ने इस प्राचीन धरोहर को फिर से राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

मुख्य बातें

द्वाराहाट स्थित मृत्युंजय मंदिर भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरूप को समर्पित है और नागर शैली में निर्मित है।
मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजवंश के शासनकाल — लगभग 8वीं से 16वीं शताब्दी — के बीच हुआ।
मंदिर संरचना में गर्भगृह , अंतराल और मंडप का सुव्यवस्थित संयोजन है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा कर श्रद्धालुओं से यहाँ आने का आग्रह किया।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) जैव-रासायनिक विधि से मंदिर की सफाई कर रहा है; महाशिवरात्रि के बाद आंतरिक भागों का उपचार होगा।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट में स्थित मृत्युंजय मंदिर भगवान शिव के मृत्युंजय स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है, जो अपनी विशिष्ट नागर शैली की स्थापत्य कला और आध्यात्मिक वातावरण के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। कत्यूरी राजवंश के शासनकाल — लगभग 8वीं से 16वीं शताब्दी के बीच — में निर्मित यह मंदिर उस युग की स्थापत्य दक्षता का जीवंत प्रमाण है।

मंदिर की स्थापत्य विशेषताएँ

मृत्युंजय मंदिर की संरचना नागर शैली के अनुरूप तीन प्रमुख घटकों — गर्भगृह, अंतराल और मंडप — के सुव्यवस्थित संयोजन पर आधारित है। 'मृत्युंजय' शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'मृत्यु पर विजय पाने वाला', और यह नाम भगवान शिव के उस स्वरूप को इंगित करता है जो महामृत्युंजय मंत्र में वर्णित है।

द्वाराहाट को 'मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ कई प्राचीन मंदिर-समूह एक साथ विद्यमान हैं। पहाड़ियों के बीच शांत प्राकृतिक परिवेश में स्थित होने के कारण यह स्थल आध्यात्मिक साधना और ध्यान के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने की मंदिर की सराहना

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए लिखा, "अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में स्थित मृत्युंजय मंदिर आध्यात्मिक अनुभव का एक खास केंद्र है। यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी श्रद्धा, शांत वातावरण और बेहतरीन आर्किटेक्चरल कला के कारण भक्तों को अपनी ओर खींचता है। अल्मोड़ा जिले में आने पर आपको भी इस मंदिर में जरूर जाना चाहिए।"

धामी की इस पोस्ट के बाद मंदिर को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज़ हो गई और श्रद्धालुओं में इसे लेकर नई जिज्ञासा जागी है।

संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्य

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और जीर्णोद्धार का कार्य कर रहा है। मंदिर परिसर में दीप, धूप और अगरबत्ती के धुएँ से जमा हुए कार्बन-सूट को हटाने के लिए जैव-रासायनिक विधि से सफाई की जा रही है।

प्रथम चरण में महामृत्युंजय मंदिर के बाहरी भाग की सफाई की जा रही है, जबकि महाशिवरात्रि के पश्चात मंदिर के आंतरिक भागों का उपचार किए जाने की योजना है। यह पहल मंदिर की मूल पाषाण कला को दीर्घकालिक क्षति से बचाने के उद्देश्य से की जा रही है।

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

अल्मोड़ा जनपद पहले से ही अपनी प्राकृतिक सुंदरता, लोकसंस्कृति और पौराणिक मंदिरों के लिए जाना जाता है। मृत्युंजय मंदिर इस क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन को नई ऊँचाई देने की क्षमता रखता है। गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार पहले से ही चारधाम यात्रा के अतिरिक्त छोटे तीर्थ स्थलों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

ASI के संरक्षण प्रयासों और मुख्यमंत्री की सक्रिय रुचि के साथ, द्वाराहाट का मृत्युंजय मंदिर आने वाले समय में उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक-पर्यटन केंद्रों में अपनी पहचान और मज़बूत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह ध्यान केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहेगा या इससे मंदिर तक पहुँचने वाले बुनियादी ढाँचे — सड़क, आवास, सूचना केंद्र — में भी सुधार होगा। उत्तराखंड में दर्जनों ऐसे अल्पज्ञात ऐतिहासिक मंदिर हैं जो ASI संरक्षण सूची में तो हैं, लेकिन पर्यटन मानचित्र पर नहीं। धामी सरकार यदि इस मंदिर को वास्तविक धार्मिक-पर्यटन केंद्र बनाना चाहती है, तो एक्स पोस्ट से आगे जाकर ठोस नीतिगत कदम उठाने होंगे।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्वाराहाट का मृत्युंजय मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद के द्वाराहाट क्षेत्र में स्थित है। द्वाराहाट को 'मंदिरों की नगरी' भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ कई प्राचीन मंदिर-समूह एक साथ विद्यमान हैं।
मृत्युंजय मंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया?
इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजवंश के शासनकाल में, लगभग 8वीं से 16वीं शताब्दी के बीच, हुआ बताया जाता है। यह मंदिर उस युग की नागर शैली स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मृत्युंजय मंदिर की वास्तुकला में क्या खास है?
मंदिर नागर शैली में बना है और इसमें गर्भगृह, अंतराल और एक विशाल मंडप का सुव्यवस्थित संयोजन है। यह स्थापत्य शैली उत्तर भारतीय मंदिर निर्माण परंपरा की विशेषता है।
ASI इस मंदिर का संरक्षण कैसे कर रही है?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) जैव-रासायनिक विधि से मंदिर में दीप-धूप के धुएँ से जमे कार्बन-सूट को हटा रही है। प्रथम चरण में बाहरी भाग की सफाई हो रही है, जबकि महाशिवरात्रि के बाद आंतरिक भागों का उपचार किए जाने की योजना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मंदिर के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री धामी ने सोमवार को एक्स पर मंदिर का वीडियो साझा करते हुए इसे 'आध्यात्मिक अनुभव का खास केंद्र' बताया और लोगों से अल्मोड़ा आने पर इस मंदिर में अवश्य जाने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले